Raman Effect Discovery: 1300 छात्रों का भव्य उत्साह

Raman Effect Discovery की 98वीं वर्षगांठ पर बेंगलुरु स्थित Raman Research Institute में ऐसा नज़ारा दिखा, मानो विज्ञान का मेला लग गया हो। शनिवार को आयोजित वार्षिक ओपन डे में 1300 से अधिक स्कूली छात्र और आम लोग पहुंचे। कोई ब्लैक होल के रहस्य पूछ रहा था, तो कोई इंद्रधनुषी क्रिस्टल के रंगों का कारण जानना चाहता था। जिज्ञासा से भरे इन सवालों ने पूरे परिसर को जीवंत बना दिया। हर कोने में विज्ञान की चर्चा थी और हर चेहरे पर सीखने की चमक साफ दिख रही थी।


Raman Effect Discovery पर विज्ञान का महोत्सव

Raman Effect Discovery को याद करते हुए संस्थान ने कई रोचक गतिविधियां आयोजित कीं। यह वही खोज है, जिसके लिए संस्थापक C. V. Raman को भारत का पहला और अब तक का एकमात्र विज्ञान नोबेल पुरस्कार मिला था।

ओपन डे में ‘मीट द साइंटिस्ट’, ‘मीट द स्टूडेंट्स’, ट्रेजर हंट और डॉक्यूमेंट्री स्क्रीनिंग जैसी गतिविधियां हुईं। साथ ही 20 से अधिक वैज्ञानिक स्टॉल लगाए गए। इन स्टॉल्स पर संस्थान के शोध समूहों ने खगोल विज्ञान और क्वांटम क्षेत्र में हो रहे अपने शोध प्रदर्शित किए।

बाहरी सहयोगी संस्थाओं ने भी शैक्षणिक प्रदर्शनी और टेलिस्कोप लगाए। इनमें यंग इनोवेटर्स एजुकेशनल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, साइंस गैलरी बेंगलुरु और आईसीटीएस जैसे समूह शामिल रहे।

संस्थान के निदेशक Tarun Souradeep ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम शोध जितने ही महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने बताया कि 2028 में खोज के 100 वर्ष पूरे होंगे और उससे पहले कई विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

अधिक जानकारी के लिए संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट देखी जा सकती है: https://www.rri.res.in

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98 वर्ष पहले हुई ऐतिहासिक खोज

साल 1928 में सी. वी. रमन ने प्रकाश के प्रकीर्णन से जुड़ा एक महत्वपूर्ण प्रभाव खोजा। इसे आज हम Raman Effect Discovery के नाम से जानते हैं। इस खोज ने भौतिकी की दुनिया में क्रांतिकारी बदलाव किया।

इसी उपलब्धि के लिए उन्हें 1930 में नोबेल पुरस्कार मिला। यह भारत के लिए ऐतिहासिक क्षण था। तब से हर वर्ष संस्थान इस दिन को ओपन डे के रूप में मनाता है।

इस बार कार्यक्रम में विज्ञान संग्रहालय भ्रमण, लाइव डेमो और क्विज प्रतियोगिताएं भी शामिल रहीं। इस आयोजन का उद्देश्य छात्रों को शोध से जोड़ना और विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाना है।


Raman Effect Discovery: Key Facts

  • 1300 से अधिक छात्रों ने ओपन डे में भाग लिया।
  • 20 से ज्यादा वैज्ञानिक प्रदर्शनी स्टॉल लगाए गए।
  • खगोल विज्ञान और क्वांटम शोध पर लाइव डेमो हुए।
  • 2028 में खोज के 100 वर्ष पूरे होंगे।
  • इंडिया पोस्ट ने टिकट और पोस्टकार्ड प्रदर्शनी लगाई।

Impact और छात्रों की प्रतिक्रिया

Raman Effect Discovery से जुड़ा यह आयोजन छात्रों के लिए प्रेरणादायक रहा। कई छात्रों ने पहली बार टेलिस्कोप से आकाश देखा। कुछ ने वैज्ञानिकों से सीधे सवाल पूछे।

इंडिया पोस्ट की प्रदर्शनी ने भी बच्चों का ध्यान खींचा। कई छात्र वहीं बैठकर पत्र लिखते नजर आए। इससे कार्यक्रम में पुरानी और नई तकनीक का अनोखा मेल दिखा।

निदेशक तरुण सौरदीप ने कहा कि देश में प्रतिभा की कमी नहीं है, लेकिन हमें उसे पहचानने की जरूरत है। उन्होंने जोर दिया कि ऐसे आउटरीच कार्यक्रम युवाओं को शोध की ओर प्रेरित करते हैं।


विज्ञान केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं रहता। Raman Effect Discovery का यह उत्सव इसी सोच को मजबूत करता है। जब छात्र खुद सवाल पूछते हैं और जवाब खोजते हैं, तभी असली सीख होती है। आने वाले वर्षों में भी ऐसे कार्यक्रम विज्ञान को जन-जन तक पहुंचाएंगे। यही Raman Effect Discovery की सच्ची विरासत है।

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