NCERT Book Controversy: 3 बड़ी सख्त टिप्पणी, Supreme Court नाराज़

NCERT Book Controversy ने देश की शिक्षा और न्याय व्यवस्था दोनों को एक साथ चर्चा के केंद्र में ला दिया है। कक्षा 7 की एनसीईआरटी किताब में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जुड़े अध्याय को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की पीठ में इस मामले की सुनवाई हुई। अदालत ने सख्त रुख दिखाया और स्पष्ट कहा कि संस्था को बदनाम करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इस बयान ने बहस को और तेज कर दिया है।


NCERT Book Controversy पर Supreme Court की सख्त टिप्पणी

NCERT Book Controversy पर सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “मैं किसी को भी संस्था को बदनाम करने की अनुमति नहीं दूंगा। कानून अपना काम करेगा।” यह बयान अदालत के सख्त रुख को दर्शाता है।

दरअसल, कक्षा 7 की एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से संबंधित एक अध्याय शामिल किया गया है। इसी विषय पर विवाद खड़ा हुआ। वरिष्ठ वकील और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल अदालत में पेश हुए। उन्होंने कहा कि एनसीईआरटी कक्षा 8 के छात्रों को न्यायिक भ्रष्टाचार के बारे में पढ़ा रही है। उन्होंने इसे गंभीर चिंता का विषय बताया।

हालांकि अदालत ने अभी अंतिम निर्णय नहीं दिया है, लेकिन स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई करना यह दर्शाता है कि मामला संवेदनशील है। इसलिए NCERT Book Controversy अब केवल शिक्षा का विषय नहीं, बल्कि संस्थागत गरिमा का मुद्दा बन गया है।

अधिक जानकारी के लिए सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट देखें:
https://www.sci.gov.in
एनसीईआरटी से संबंधित जानकारी यहां उपलब्ध है:
https://ncert.nic.in


क्यों बढ़ा विवाद?

पाठ्यपुस्तकों में सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को शामिल करना नया नहीं है। लेकिन जब बात न्यायपालिका की आती है, तो संवेदनशीलता और बढ़ जाती है।

इस बार कक्षा 7 की किताब में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जुड़ी चर्चा ने सवाल खड़े किए। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि छात्रों को संस्थाओं के कामकाज की जानकारी देना जरूरी है। हालांकि, दूसरी ओर यह तर्क भी दिया गया कि इससे न्यायपालिका की छवि प्रभावित हो सकती है।

इसी संदर्भ में NCERT Book Controversy ने तूल पकड़ा। अदालत ने स्वतः संज्ञान लेकर संकेत दिया कि वह इस मुद्दे को गंभीरता से देख रही है।


NCERT Book Controversy – मुख्य तथ्य

  • सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया
  • चीफ जस्टिस सूर्यकांत की पीठ में सुनवाई
  • कक्षा 7 की एनसीईआरटी किताब में अध्याय शामिल
  • कपिल सिब्बल ने चिंता जताई
  • अदालत ने संस्था की गरिमा पर जोर दिया

Impact और प्रतिक्रियाएं

NCERT Book Controversy के बाद शिक्षा जगत में बहस तेज हो गई है। कुछ शिक्षाविद मानते हैं कि छात्रों को संस्थागत चुनौतियों की जानकारी मिलनी चाहिए। लेकिन कई लोग इसे अनुचित मानते हैं।

साथ ही, राजनीतिक हलकों में भी चर्चा बढ़ी है। अदालत के सख्त बयान ने यह स्पष्ट किया कि न्यायपालिका अपनी प्रतिष्ठा को लेकर सतर्क है। इसलिए यह मामला आने वाले दिनों में और महत्वपूर्ण हो सकता है।

छात्रों और अभिभावकों के बीच भी सवाल उठ रहे हैं कि पाठ्यक्रम में किन विषयों को किस रूप में शामिल किया जाना चाहिए।


NCERT Book Controversy केवल एक अध्याय का विवाद नहीं है। यह शिक्षा, अभिव्यक्ति और संस्थागत गरिमा के संतुलन का प्रश्न है। सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी ने संदेश दिया है कि कानून और मर्यादा दोनों अहम हैं। अब सभी की नजर आगे की सुनवाई पर रहेगी।

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