बिहान योजना से आत्मनिर्भर बनीं करौली गांव की महिलाएं, सरसों तेल उत्पादन से बदल रही जिंदगी

सरगुजा, 18 अगस्त 2025।
छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी बिहान योजना ने ग्रामीण महिलाओं की जिंदगी बदल दी है। सरगुजा जिले के लुंड्रा विकासखंड के करौली गांव की महिलाएं अब न केवल आत्मनिर्भर बन चुकी हैं, बल्कि अपने परिवार के लिए भी मजबूत सहारा बन गई हैं।

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गांव की महिलाएं फूड प्रोसेसिंग यूनिट में सरसों तेल का उत्पादन कर रही हैं। इस काम से उन्हें रोजाना लगभग 200 रुपए और महीने में करीब 20,000 रुपए तक की आमदनी हो रही है। यही वजह है कि अब वे अपने बच्चों को बेहतर स्कूलों में पढ़ा पा रही हैं और परिवार की जरूरतें पूरी कर रही हैं।

2022 में मिली नई राह
यह पहल 2022 में शुरू हुई थी, जब गांव की 25 महिलाओं ने पीजी हिंगलेश्वरी समूह बनाया। इनमें से 10 महिलाएं सक्रिय रूप से हर दिन काम करती हैं। वे आसपास के गांवों से सरसों लाकर तेल निकालती हैं, बोतलों में भरती हैं और उस पर समूह का स्टीकर लगाकर बाजार में बेचती हैं।

आज उनका तेल रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, बस्तर से लेकर जसपुर तक सप्लाई हो रहा है।

शुद्धता ही पहचान
समूह की अध्यक्ष सरोज सानडिल बताती हैं कि उनका सरसों तेल पूरी तरह प्राकृतिक है और इसमें किसी भी तरह का केमिकल इस्तेमाल नहीं होता। यही वजह है कि लोग बाजार के तेल की बजाय उनका शुद्ध तेल खरीदना पसंद कर रहे हैं। वर्तमान में महिलाएं रोजाना 30 से 35 लीटर तेल का उत्पादन कर रही हैं।

बदलती तस्वीर
पहले करौली की महिलाएं घरेलू कामों तक ही सीमित थीं, लेकिन अब हर दिन प्लांट में जाकर काम करती हैं। राज्य सरकार ने उन्हें फूड प्रोसेसिंग भवन और पेराई मशीन निःशुल्क उपलब्ध कराई, जिसके चलते रोजगार का यह अवसर संभव हो पाया।

महिलाओं का कहना है कि बिहान योजना ने उन्हें आत्मनिर्भर बना दिया है। अब वे गर्व के साथ कह सकती हैं कि वे अपने बच्चों का भविष्य खुद संवार रही हैं।