भारत में लागू हुए नए श्रम संहिता: महिलाओं की नाइट शिफ्ट से लेकर गिग वर्कर्स तक बड़े बदलाव, उद्योग को मिलेगी नई आज़ादी

नई दिल्ली, 21 नवंबर 2025। भारत सरकार ने शुक्रवार से चार नई श्रम संहिताओं (Labour Codes) को देशभर में लागू कर दिया। यह बदलाव पिछले कई दशकों में भारत के श्रम कानूनों में की गई सबसे बड़ी सुधार प्रक्रिया मानी जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन कानूनों को श्रमिकों के लिए सुरक्षा और उद्योगों के लिए सरलता का नया आधार बताया है।

इन संहिताओं का उद्देश्य पुराने, जटिल और कई बार औपनिवेशिक काल से चले आ रहे नियमों को बदलकर श्रमिकों की सुरक्षा बढ़ाना और निवेश के माहौल को बेहतर बनाना है।


🔧 29 पुराने कानून खत्म, 4 नई संहिताएँ लागू

नई श्रम संहिताएँ चार हिस्सों पर आधारित हैं—

  • वेतन संहिता (Wages Code)
  • औद्योगिक संबंध संहिता (Industrial Relations Code)
  • सामाजिक सुरक्षा संहिता (Social Security Code)
  • व्यावसायिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य संहिता (Occupational Safety Code)

ये 29 पुराने श्रम कानूनों को एकीकृत कर देशभर में एक समान व्यवस्था बनाने का दावा करते हैं।

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⚙️ हायर-एंड-फायर नियम आसान, फैक्ट्री शिफ्टें लंबी

नई संहिताओं के तहत—

  • 100 से बढ़ाकर 300 कर्मचारी तक की कंपनियों को छंटनी के लिए अब सरकार से पूर्व अनुमति की ज़रूरत नहीं।
  • महिलाओं को नाइट शिफ्ट में काम करने की अनुमति, सुरक्षा व्यवस्था के साथ।
  • फैक्ट्री शिफ्ट्स लंबी करने का विकल्प।

उद्योग जगत इसे लचीलापन बढ़ाने वाला कदम मान रहा है, जबकि ट्रेड यूनियन्स इसे “श्रमिक अधिकारों में कटौती” बता रही हैं।


📱 गिग और प्लेटफ़ॉर्म वर्कर्स को पहली बार कानूनी पहचान

स्विगी, ज़ोमैटो, ओला-उबर और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म्स से जुड़े करोड़ों श्रमिकों को अब—

  • सामाजिक सुरक्षा
  • न्यूनतम सुरक्षा मानक
  • और भविष्य की कल्याण योजनाओं का लाभ

मिल सकेगा। NITI Aayog के अनुसार, भारत में गिग सेक्टर 2024/25 के 1 करोड़ से बढ़कर 2030 तक 2.35 करोड़ से अधिक हो सकता है।


🗣️ सरकार का दावा: “श्रमिकों के लिए बेहतर सुरक्षा”

श्रम मंत्रालय ने बयान में कहा—
“नई संहिताएँ बेहतर वेतन, सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करेंगी। इससे महिला, युवा, असंगठित, गिग और प्रवासी श्रमिकों को विशेष लाभ मिलेगा।”

पीएम मोदी ने X पर लिखा—
“यह सुधार श्रमिकों के लिए सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा और सुरक्षित कार्यस्थल की मजबूत नींव रखेगा। इससे रोजगार और उत्पादकता दोनों बढ़ेंगे।”


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⚠️ ट्रेड यूनियनों का विरोध जारी

ट्रेड यूनियनों का कहना है कि नए नियम श्रमिकों के अधिकारों को कम करेंगे।
AITUC की महासचिव अमरजीत कौर ने कहा—
“नई श्रम संहिताएँ हमारे विरोध के बावजूद लागू की गई हैं। इससे निश्चित अवधि वाली नौकरियाँ बढ़ेंगी और कई पुराने अधिकार खत्म हो जाएंगे।”


📉 छोटे उद्योगों पर अल्पकालिक असर, दीर्घकाल में फायदा — विशेषज्ञ

भारत रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री देवेन्द्र कुमार पंत के अनुसार—
“शुरुआत में छोटे उद्योगों पर बोझ बढ़ सकता है, लेकिन लंबे समय में न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा बढ़ने से उपभोग और कार्य परिस्थितियों में सुधार होगा।”