विदेशी नागरिकता लेने वाले गोवावासियों के माता-पिता जांच के घेरे में, EC करेगा सत्यापन

नई दिल्ली:
Goa Voters List Scrutiny: गोवा में विदेशी नागरिकता का मुद्दा अब मतदाता सूची तक पहुंच गया है।
पिछले एक दशक में करीब 30,000 गोवावासियों ने अपनी भारतीय नागरिकता छोड़कर विदेशी नागरिकता, खासतौर पर पुर्तगाल की नागरिकता, हासिल की है।

अब इसके चलते उनके माता-पिता भी जांच के दायरे में आ गए हैं। चुनाव आयोग (EC) Special Intensive Revision (SIR) के तहत मतदाता सूची का गहन सत्यापन कर रहा है।


🇵🇹 पुर्तगाली नागरिकता का कानूनी रास्ता

दरअसल,
👉 यदि किसी व्यक्ति का जन्म 19 दिसंबर 1961 (गोवा मुक्ति दिवस) के बाद हुआ है और वह पुर्तगाली नागरिकता चाहता है,
👉 तो उसके माता-पिता, यदि 1961 से पहले जन्मे हैं, को पुर्तगाल में जन्म और विवाह का पंजीकरण कराना पड़ता है।

इसी प्रक्रिया के जरिए बच्चों को पुर्तगाली पासपोर्ट मिलता है।


📊 10 साल में 29,831 पासपोर्ट सरेंडर

SIR के तहत चुनाव आयोग को सौंपे गए आंकड़ों के अनुसार,
2014 से अब तक 29,831 गोवावासियों ने अपने भारतीय पासपोर्ट सरेंडर कर विदेशी नागरिकता हासिल की है।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी संजय गोयल ने बताया,

“हम उन सभी लोगों की जांच करेंगे जिन्होंने विदेशी नागरिकता ली है और जिनके नाम अब भी मतदाता सूची में हैं। इसके बाद कानून विभाग से राय लेकर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।”


🗳️ वोटर लिस्ट से नाम हटेंगे?

गोयल के मुताबिक,

  • पासपोर्ट ऑफिस और गृह विभाग से विदेशी नागरिकता से जुड़ा डेटा मिला है
  • जिन लोगों ने विदेशी नागरिकता ली है और फिर भी वोटर लिस्ट में नाम है, उन्हें स्वतः संज्ञान (suo motu) नोटिस भेजा जाएगा

हालांकि,
👉 जिन लोगों ने एन्यूमरेशन फॉर्म नहीं भरा,
👉 और जिनके नाम 16 दिसंबर को प्रकाशित ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं हैं,
उन्हें नोटिस नहीं दिया जाएगा।


🛂 पिछले 5 साल में 8,000 नाम

गोवा के क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी निजो वर्गीज ने बताया कि
पिछले पांच सालों में ही 8,000 से ज्यादा ऐसे नाम चुनाव आयोग को भेजे गए हैं, जिन्होंने भारतीय पासपोर्ट छोड़कर विदेशी नागरिकता ली है।

इनमें

  • राजनेता
  • पुलिस अधिकारी
  • नौकरशाह
    भी शामिल बताए जा रहे हैं।

🏛️ राजनीति और पुरानी मांग

साल 2014 में मौजूदा मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने केंद्र सरकार से मांग की थी कि
गोवावासियों को पुर्तगाली पहचान पत्र रद्द कराने के लिए आम माफी (Amnesty) दी जाए, ताकि वे भारतीय नागरिकता बनाए रख सकें।

उन्होंने तब कहा था कि

“इन लोगों का उद्देश्य खुद नहीं, बल्कि अपने बच्चों के लिए पुर्तगाली पासपोर्ट और उससे मिलने वाले यूरोपीय लाभ सुनिश्चित करना था।”


Goa Voters List Scrutiny ने एक बार फिर नागरिकता, पहचान और मताधिकार के सवाल को केंद्र में ला दिया है।
आने वाले समय में यह जांच न सिर्फ मतदाता सूची को प्रभावित करेगी, बल्कि गोवा की राजनीति और प्रशासन पर भी इसका असर पड़ सकता है।