भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए गर्व की खबर है। Gevra Coal Mine अगले वर्ष दुनिया की सबसे अधिक कोयला उत्पादन करने वाली खदान बनने जा रही है। कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, वर्ष 2026-27 में इसका उत्पादन 63 मिलियन टन तक पहुंचने का अनुमान है।
यदि यह लक्ष्य हासिल होता है, तो Gevra Coal Mine अमेरिका की अग्रणी खदानों को भी पीछे छोड़ देगी।
1981 से ऊर्जा की धड़कन
छत्तीसगढ़ के कोरबा क्षेत्र में स्थित गेवरा खदान वर्ष 1981 से संचालन में है।
यह खदान South Eastern Coalfields Ltd (SECL) द्वारा संचालित है, जो कि Coal India Limited की सहायक कंपनी है।
आज यह भारत की सबसे बड़ी ओपनकास्ट (खुली खदान) कोयला परियोजना मानी जाती है। दशकों से यह खदान देश के थर्मल पावर प्लांट्स को ऊर्जा उपलब्ध कराकर औद्योगिक विकास की रीढ़ बनी हुई है।
इस वर्ष 56 मिलियन टन का लक्ष्य
वर्तमान वित्तीय वर्ष में Gevra Coal Mine से लगभग 56 मिलियन टन कोयला उत्पादन का अनुमान है।
हालांकि असली छलांग अगले वर्ष देखने को मिल सकती है, जब उत्पादन 63 मिलियन टन तक पहुंचने की संभावना जताई गई है।
यह उपलब्धि न केवल कंपनी के लिए, बल्कि पूरे भारतीय कोयला उद्योग के लिए ऐतिहासिक होगी।
70 मिलियन टन की पर्यावरणीय मंजूरी
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि Gevra Coal Mine को पहले ही 70 मिलियन टन प्रतिवर्ष उत्पादन क्षमता तक विस्तार के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति मिल चुकी है।
इससे भविष्य में उत्पादन और बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है।
हालांकि, उत्पादन वृद्धि के साथ पर्यावरण संरक्षण और पुनर्वास की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी। कंपनी का दावा है कि आधुनिक तकनीक और पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित किया जा रहा है।
भारत के ऊर्जा क्षेत्र को मजबूती
भारत तेजी से बढ़ती ऊर्जा मांग का सामना कर रहा है। ऐसे में Gevra Coal Mine की उत्पादन वृद्धि देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि कोयला अभी भी भारत के ऊर्जा मिश्रण का प्रमुख हिस्सा है। इसलिए घरेलू उत्पादन बढ़ाना आयात पर निर्भरता कम करने में सहायक होगा।
कोरबा क्षेत्र के हजारों परिवारों की आजीविका भी इस खदान से जुड़ी हुई है। उत्पादन बढ़ने से स्थानीय रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
वैश्विक स्तर पर भारत की पहचान
अगर निर्धारित लक्ष्य हासिल होता है, तो Gevra Coal Mine दुनिया की शीर्ष कोयला खदान के रूप में स्थापित होगी।
यह उपलब्धि भारत को वैश्विक कोयला उत्पादन मानचित्र पर और मजबूत स्थान दिलाएगी।
ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
स्पष्ट है कि Gevra Coal Mine सिर्फ एक खदान नहीं, बल्कि भारत की ऊर्जा शक्ति का प्रतीक बन चुकी है।
63 मिलियन टन उत्पादन का लक्ष्य देश के औद्योगिक और आर्थिक विकास को नई गति देगा। अब सबकी नजर अगले वित्तीय वर्ष के आंकड़ों पर टिकी है, जो इतिहास रच सकते हैं।
