Breaking News: ‘लद्दाख का शेर’ Col. Sonam Wangchuk MVC नहीं रहे, पूरा देश शोक में

Breaking News — आज 10 अप्रैल 2026 को भारत माता का एक वीर सपूत हमें छोड़ गया। कारगिल युद्ध के महावीर चक्र विजेता और ‘लद्दाख के शेर’ के नाम से मशहूर कर्नल सोनम वांगचुक (सेवानिवृत्त) का हार्ट अटैक से निधन हो गया। उनकी वीरता की कहानी आज भी हर भारतीय सैनिक को प्रेरित करती है।


Breaking News — कौन थे Col. Sonam Wangchuk?

कर्नल सोनम वांगचुक का जन्म 11 मई 1964 को लद्दाख के लेह जिले के संकर गांव में हुआ था। उन्होंने 1987 में भारतीय सेना में प्रवेश किया और पहले 4 असम रेजिमेंट में सेवा दी, फिर लद्दाख स्काउट्स — हिमालय के ‘स्नो वॉरियर्स’ — में शामिल हुए। तीन दशकों से अधिक की सेवा में वे भारत के सबसे दुर्जेय हाई-एल्टिट्यूड कमांडरों में से एक बने।

उन्होंने श्री वेंकटेश्वर कॉलेज में स्नातक की पढ़ाई बीच में छोड़कर सेना में भर्ती हुए — यही उनका देश के प्रति समर्पण दर्शाता है। 2018 में सेवानिवृत्त होने के बाद वे लद्दाख में रह रहे थे।


कैसे हुआ निधन? — Breaking News जिसने देश को हिला दिया

Breaking News: कर्नल सोनम वांगचुक शुक्रवार को अपने घर में हार्ट अटैक के कारण इस दुनिया से विदा हो गए। वे लद्दाख में सेवानिवृत्त जीवन जी रहे थे और लगभग 61 वर्ष के थे।

उनके परिवार के एक धार्मिक अनुष्ठान में भाग लेने के लिए वे हाल ही में लेह आए थे, तभी उनकी तबीयत बिगड़ी।

यह Breaking News सुबह-सुबह सोशल मीडिया पर फैली और देखते ही देखते पूरा देश शोक में डूब गया।

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Operation Vijay में वीरता की अमर गाथा — Batalik और Chorbat La

यह किस्सा है 30 मई 1999 की रात का — जब तत्कालीन मेजर सोनम वांगचुक ने इतिहास रच दिया।

केवल 40 सैनिकों की टीम का नेतृत्व करते हुए, उन्होंने चोरबत ला सेक्टर से 136 पाकिस्तानी घुसपैठियों को तीन दिनों की भीषण लड़ाई में खदेड़ा — गहरी बर्फ, विरल हवा और दुश्मन की लगातार गोलीबारी के बीच। यह अभियान कारगिल युद्ध की शुरुआती सफलताओं में से एक बना और मेजर वांगचुक को भारत के सर्वश्रेष्ठ हाई-एल्टिट्यूड कमांडरों की पंक्ति में ला खड़ा किया।

H4: सेना के वीरता पुरस्कार citation में क्या लिखा है?

30 मई 1999 को इंडस विंग, लद्दाख स्काउट्स के मेजर सोनम वांगचुक ने ऑपरेशन विजय के तहत बटालिक सेक्टर में लगभग 5,500 मीटर की ऊंचाई पर एक ग्लेशियरयुक्त क्षेत्र में LOC की रिज लाइन पर कब्जा करने के लिए एक दल का नेतृत्व किया।

दुश्मन की भारी गोलाबारी के बीच, चरम उच्च-ऊंचाई की स्थितियों में, उन्होंने एक साहसी काउंटर-एम्बुश शुरू किया, 10 दुश्मन सैनिकों को मार गिराया और बाकियों को अपनी चौकियां छोड़ने पर मजबूर किया।


महावीर चक्र — भारत का दूसरा सर्वोच्च वीरता सम्मान

महावीर चक्र दुश्मन की उपस्थिति में असाधारण वीरता के लिए दिया जाता है। यह परमवीर चक्र के बाद भारत का दूसरा सर्वोच्च सैन्य सम्मान है।

उन्होंने एक हेवी मशीन गन, एक यूनिवर्सल मशीन गन, गोला-बारूद और अन्य नियंत्रित सामग्री भी बरामद की। इस असाधारण वीरता के लिए उन्हें महावीर चक्र से सम्मानित किया गया।


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Breaking News पर देश की प्रतिक्रिया — राजनाथ सिंह से लेकर सेना तक

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने X पर लिखा — “मैं कर्नल सोनम वांगचुक के निधन से गहरे दुख में हूं। वे भारतीय सेना के अत्यंत सम्मानित अधिकारी थे, जो अपनी वीरता, दृढ़ नेतृत्व और कर्तव्य के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के लिए विख्यात थे।”

उन्होंने आगे कहा कि लद्दाख के इस गर्वित सपूत ने ऑपरेशन विजय के दौरान व्यक्तिगत उदाहरण देकर अपने जवानों को प्रेरित किया और यह भावना आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।

सेना प्रमुख और Fire & Fury Corps की श्रद्धांजलि

Breaking News: थलसेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी और भारतीय सेना के समस्त जवानों ने कर्नल सोनम वांगचुक को हार्दिक श्रद्धांजलि दी। सेना ने उन्हें एक वीर सैनिक, समर्पित नेता और लद्दाख का ऐसा सुपुत्र बताया, जिनका जीवन साहस, सेवा और एकता का प्रतीक था।

पूर्व सेना प्रमुख जनरल वी.पी. मलिक, जो कारगिल युद्ध के समय सेना का नेतृत्व कर रहे थे, ने X पर लिखा — “सोनम वांगचुक MVC के निधन की खबर सुनकर बेहद दुख हुआ। एक साहसी नेता और सच्चे सज्जन पुरुष को सलाम।”


दो सेना चौकियां हैं उनके नाम पर — “Sonam 1” और “Sonam 2”

यह शायद सबसे बड़ा सम्मान है जो एक सैनिक को मिल सकता है।

कारगिल में उनकी वीरता के सम्मान में भारतीय सेना ने दो सैन्य चौकियों का नाम उनके नाम पर रखा — “Sonam 1” और “Sonam 2” — जो आज भी लद्दाख की पहाड़ियों में उनकी अमर उपस्थिति की याद दिलाती हैं।


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परिवार और व्यक्तिगत जीवन

कर्नल सोनम वांगचुक के पीछे उनकी पत्नी पद्मा अंग्मो हैं, जो एक UT कैडर की सिविल सेवक हैं और वर्तमान में दिल्ली में तैनात हैं। उनके पुत्र का नाम रिग्याल ओटवम है।


निष्कर्ष — Breaking News जो इतिहास में दर्ज हो गई

यह Breaking News केवल एक वीर सैनिक के जाने की खबर नहीं है — यह एक युग के अंत की खबर है। कर्नल सोनम वांगचुक ने साबित किया कि देश के लिए जीना और मरना ही सच्ची वीरता है।

5,500 मीटर की बर्फीली ऊंचाइयों पर, दुश्मन की गोलियों के बीच, मात्र 40 जवानों के साथ 136 घुसपैठियों को खदेड़ना — यह काम किसी फिल्म की कहानी नहीं, बल्कि ‘लद्दाख के शेर’ की सच्ची जिंदगी थी।

उनकी विरासत — “Sonam 1” और “Sonam 2” चौकियों से लेकर महावीर चक्र तक — आने वाली पीढ़ियों को सदा प्रेरित करती रहेगी। Breaking News यह है कि शरीर चला गया, लेकिन वीरता की यह कहानी अमर है।

🇮🇳 वीर सैनिक को शत-शत नमन।

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