Aluminium Dross Transport को लेकर छत्तीसगढ़ में एक बड़ा विवाद सामने आया है। जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने हाल ही में सभी उद्योगों के लिए इंटर-स्टेट परिवहन की अनुमति अस्थायी रूप से रोक दी है। इस संबंध में उद्योगों को आधिकारिक ई-मेल भी भेजा गया था। हालांकि आरोप है कि इसी दौरान एक निजी कंपनी को विशेष अनुमति दी जा रही है। इस मुद्दे ने उद्योग जगत, ट्रांसपोर्टरों और प्रशासन के बीच नई बहस छेड़ दी है। अब पूरे मामले में पारदर्शिता और नियमों के पालन को लेकर कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
Aluminium Dross Transport विवाद में अनुमति को लेकर उठे सवाल
Aluminium Dross Transport से जुड़े इस विवाद का केंद्र Runaya Refining LLP नामक कंपनी बताई जा रही है। आरोप है कि छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के कुछ अधिकारियों की कथित सांठगांठ से कंपनी को इंटर-स्टेट परिवहन की अनुमति दी जा रही है।
सूत्रों के अनुसार मंडल ने हाल ही में सभी उद्योगों के लिए इंटर-स्टेट परमिशन अस्थायी रूप से बंद कर दी थी। इसके बावजूद Runaya समूह को कथित रूप से अनुमति दिए जाने की बात सामने आई है।
मामले में यह भी बताया गया है कि Runaya समूह की दो अलग-अलग आवेदन मंडल में जमा किए गए थे। पहला आवेदन Runaya Refining LLP के नाम से 11 नवंबर 2025 को दिया गया था। दूसरा आवेदन Runaya Metsource Limited के नाम से 9 फरवरी 2026 को प्रस्तुत किया गया।
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नियमों के अनुसार यदि किसी नई कंपनी के नाम से आवेदन किया गया है, तो अनुमति उसी आवेदन के आधार पर दी जानी चाहिए। साथ ही उससे जुड़े सभी दस्तावेज जैसे स्थापना अनुमति, संचालन अनुमति और अन्य कागजात भी अपडेट होने चाहिए।
लेकिन आरोप है कि इन नियमों की अनदेखी करते हुए पुरानी आवेदन के आधार पर अनुमति दी जा रही है। इससे पूरे मामले में पारदर्शिता और नियमों के पालन पर सवाल खड़े हो गए हैं।
पर्यावरण नियमों से जुड़ी जानकारी यहां देखी जा सकती है:
https://cpcb.nic.in
https://moef.gov.in
उद्योगों और ट्रांसपोर्टरों की बढ़ती चिंता
Aluminium Dross Transport की इंटर-स्टेट अनुमति बंद होने से कई उद्योग और ट्रांसपोर्टर प्रभावित हुए हैं। बताया जा रहा है कि इस निर्णय के कारण ट्रांसपोर्ट कारोबार लगभग ठप पड़ गया है।
इसी समस्या को लेकर ट्रांसपोर्टरों ने 27 फरवरी को छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के कार्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन भी किया था।
प्रदर्शन के दौरान ट्रांसपोर्टरों ने मांग की थी कि सभी उद्योगों के लिए समान नीति लागू की जाए। उनका कहना था कि यदि इंटर-स्टेट परमिशन बंद है, तो यह नियम सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए।
वहीं यदि अनुमति दी जा रही है, तो फिर सभी कंपनियों को समान अवसर मिलना चाहिए।
अब आरोप यह भी लगाया जा रहा है कि एक विशेष कंपनी को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से नियमों में ढील दी जा रही है। हालांकि इस मामले में आधिकारिक जांच की मांग भी उठने लगी है।
Key Facts: Aluminium Dross Transport
- छत्तीसगढ़ में इंटर-स्टेट परिवहन अनुमति अस्थायी रूप से बंद की गई।
- Runaya समूह की दो अलग-अलग आवेदन CECB में जमा हुईं।
- पुरानी आवेदन के आधार पर अनुमति दिए जाने के आरोप।
- ट्रांसपोर्टरों ने 27 फरवरी को विरोध प्रदर्शन किया।
- अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं।
Impact और प्रतिक्रियाएं
Aluminium Dross Transport विवाद के सामने आने के बाद उद्योग जगत और ट्रांसपोर्टरों में असंतोष बढ़ रहा है। कई लोगों का कहना है कि नियमों का पालन सभी कंपनियों के लिए समान होना चाहिए।
इस मामले में छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के कुछ अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। इनमें सुरेश चंद और क्षितिश वर्मा के नाम चर्चा में आए हैं।
बताया जा रहा है कि पहले भी कुछ मामलों में जांच एजेंसियों की कार्रवाई हो चुकी है। इसलिए अब इस पूरे मामले में पारदर्शी जांच की मांग की जा रही है।
साथ ही यह भी मांग उठी है कि मंडल के सदस्य सचिव और अध्यक्ष इस विषय पर स्पष्ट जवाब दें।
विशेषज्ञों का मानना है कि पर्यावरण से जुड़े मामलों में नियमों का सख्ती से पालन होना जरूरी है। इससे उद्योग, प्रशासन और समाज के बीच विश्वास बना रहता है।



Aluminium Dross Transport से जुड़ा यह विवाद छत्तीसगढ़ में उद्योग और प्रशासन के बीच पारदर्शिता की बहस को तेज कर रहा है।
यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह नियमों के उल्लंघन का गंभीर मामला बन सकता है। इसलिए अब निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो रही है।
आने वाले दिनों में इस मामले की जांच और प्रशासनिक प्रतिक्रिया से ही साफ होगा कि Aluminium Dross Transport विवाद में सच्चाई क्या है और जिम्मेदारी किसकी है।
