यूरोपियन संघ की संसद में सीएए के खिलाफ प्रस्ताव, बुधवार को होगी बहस व मतदान

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नई दिल्ली। भारत के संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) व जम्मू-कश्मीर पर लिए गए फैसले के खिलाफ यूरोपीय संसद के कुछ सदस्यों द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव पर बहस और मतदान होना है। ईयू संसद पेश किए गए प्रस्ताव पर बहस और मतदान करेगी। संसद में इस सप्ताह की शुरुआत में यूरोपियन यूनाइटेड लेफ्ट, नॉर्डिक ग्रीन लेफ्ट (जीयूई-एनजीएल) समूह ने प्रस्ताव पेश किया था जिस पर बुधवार को बहस होगी और इसके एक दिन बाद मतदान होगा। वहीं भारत ने इसे अपना अंदरूनी मामला बताया है।
प्रस्ताव में कहा गया है, कि सीएए भारत में नागरिकता तय करने के तरीके में खतरनाक बदलाव करेगा। इससे नागरिकता विहीन लोगों के संबंध में बड़ा संकट विश्व में पैदा हो सकता है और यह बड़ी मानव पीड़ा का कारण बन सकता है। इसमें भारतीय प्राधिकारियों के अपील की गई है कि वे सीएए के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ रचनात्मक वार्ता करें और भेदभावपूर्ण सीएए को निरस्त करने की उनकी मांग पर विचार करें।
सीएए भारत में पिछले साल दिसंबर में लागू किया गया था जिसे लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। भारत सरकार का कहना है कि नया कानून किसी की नागरिकता नहीं छीनता है, बल्कि इसे पड़ोसी देशों में उत्पीड़न का शिकार हुए अल्पसंख्यकों की रक्षा करने और उन्हें नागरिकता देने के लिए लाया गया है।
आपको बता दें कि इससे पहले अमेरिका ने भी सीएए को लेकर अपनी राय रखी थी। अमेरिका ने कहा था कि सरकार ने देश में नागरिकता और धार्मिक आजादी जैसे मुद्दों पर मजबूत बहस छेड़ी है। अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो और रक्षा मंत्री मार्क एस्पर ने 18 दिसंबर को टू प्लस टू बातचीत के लिए भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर की मेजबानी की थी। एक सवाल में जब आरोप लगाया गया था कि यह कानून धार्मिक आधार पर नागरिकों से भेदभाव कर रहा है, इसके जवाब में एस जयशंकर कहा था कि आपने जो सवाल किया था वो भारत से जुड़ा है। अगर आप इसे ध्यान से पढ़ेंगे तो पाएंगे कि ये एक ऐसा उपाय है जो कुछ देशों के सताए हुए धार्मिक अल्पसंख्यकों की जरूरतों को पूरा करने के लिए बनाया गया है। उन्होंने आगे कहा था कि अगर आप ये देखते हैं कि वे देश क्या हैं और इसलिए उनके अल्पसंख्यक क्या हैं, तो शायद आप समझते हैं कि कुछ धर्मों की पहचान उन लोगों के चरित्र निर्माण की दिशा में क्यों की गई थी। राजनाथ सिंह ने कहा था कि नागरिकता संशोधन कानून किसी भी तरह से मुस्लिमों के खिलाफ नहीं है। इस कानून के तहत लोगों को नागरिकता दी जाएगी और इसका किसी भी भारतीय नागरिक पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
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