Oil Prices में शुक्रवार सुबह हल्की गिरावट दर्ज की गई, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार को अस्थायी राहत मिली। अमेरिका ने एक अहम फैसला लेते हुए देशों को समुद्र में फंसे रूसी तेल और पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने के लिए 30 दिन की विशेष अनुमति दे दी। इस फैसले के बाद बाजार की चिंता कुछ कम हुई और तेल की कीमतों में नरमी आई। हालांकि, मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और Strait of Hormuz को लेकर जारी अनिश्चितता अभी भी बाजार पर भारी दबाव बनाए हुए है। विशेषज्ञ मानते हैं कि फिलहाल राहत मिली है, लेकिन स्थिति अभी भी बेहद संवेदनशील बनी हुई है।
Oil Prices में गिरावट के पीछे क्या हैं बड़े कारण
अंतरराष्ट्रीय बाजार में Oil Prices शुक्रवार को गिरकर थोड़ी नीचे आ गईं। वैश्विक बेंचमार्क Brent Crude 71 सेंट यानी लगभग 0.71% गिरकर 99.75 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं अमेरिकी West Texas Intermediate (WTI) 88 सेंट यानी 0.92% गिरकर 94.85 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा।
इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका का नया फैसला है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने देशों को समुद्र में फंसे रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिन का लाइसेंस जारी किया। ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि यह कदम वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर करने के लिए उठाया गया है।
विश्लेषकों के अनुसार, यह फैसला तुरंत राहत जरूर देता है, लेकिन असली समस्या अभी भी बनी हुई है। हैतोंग फ्यूचर्स के विश्लेषक यांग एन ने कहा कि सबसे अहम मुद्दा Strait of Hormuz में सुरक्षित नौवहन बहाल होना है।
इसी बीच अमेरिकी ऊर्जा विभाग ने यह भी घोषणा की कि वह रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार से 172 मिलियन बैरल तेल जारी करेगा। यह कदम भी तेजी से बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए उठाया गया है।
इस फैसले को अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) का भी समर्थन मिला है। एजेंसी ने रिकॉर्ड 400 मिलियन बैरल तेल वैश्विक भंडार से जारी करने की योजना बनाई है।
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IEA Energy Data – https://www.iea.org
US Energy Department – https://www.energy.gov
मध्य-पूर्व तनाव और ऊर्जा संकट
हाल के दिनों में मध्य-पूर्व में तनाव तेजी से बढ़ा है। इसी कारण Oil Prices में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।
विश्लेषकों के अनुसार, गुरुवार को तेल की कीमतों में 9% से अधिक उछाल आया था। यह अगस्त 2022 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर था।
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने कहा कि ईरान संघर्ष जारी रखेगा और Strait of Hormuz को दबाव के रूप में बंद रखेगा।
यह जलमार्ग दुनिया के तेल व्यापार का लगभग एक-तिहाई संभालता है। इसलिए इसका बंद होना वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए बेहद गंभीर खतरा माना जाता है।
इसी बीच इराकी सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि इराकी जलक्षेत्र में दो ईंधन टैंकरों पर विस्फोटक से लदी ईरानी नौकाओं ने हमला किया। इसके बाद इराक के तेल बंदरगाहों ने पूरी तरह से संचालन रोक दिया।
Key Facts
- Oil Prices शुक्रवार को गिरकर Brent 99.75 डॉलर और WTI 94.85 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचे।
- अमेरिका ने समुद्र में फंसे रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिन का लाइसेंस जारी किया।
- अमेरिका अपने रणनीतिक भंडार से 172 मिलियन बैरल तेल जारी करेगा।
- IEA ने वैश्विक भंडार से 400 मिलियन बैरल तेल जारी करने की योजना बनाई।
- ईरान ने Strait of Hormuz को बंद रखने की चेतावनी दी है।
वैश्विक प्रतिक्रिया
हालांकि Oil Prices में हल्की गिरावट आई है, लेकिन बाजार की चिंता अभी खत्म नहीं हुई है। कई देशों ने एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।
ओमान ने अपने प्रमुख तेल निर्यात टर्मिनल मिना अल फहल से सभी जहाजों को हटा दिया है। यह फैसला सुरक्षा कारणों से लिया गया।
वहीं सऊदी अरब ने तेल टैंकरों को Red Sea के रास्ते भेजने के लिए अतिरिक्त प्रीमियम देना शुरू किया है। इसके लिए वह अपने East-West Pipeline का इस्तेमाल कर रहा है।
अमेरिका ने भी संकेत दिया है कि यदि जरूरत पड़ी तो उसकी नौसेना अंतरराष्ट्रीय गठबंधन के साथ मिलकर Strait of Hormuz से जहाजों को सुरक्षित एस्कॉर्ट दे सकती है।
दूसरी ओर, ईरान फिलहाल रोजाना एक-दो टैंकरों को गुजरने दे रहा है। ज्यादातर टैंकर चीन की ओर जा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इससे ईरान को आर्थिक नकदी प्रवाह बनाए रखने में मदद मिल रही है।
कुल मिलाकर, Oil Prices में आई गिरावट ने वैश्विक बाजार को थोड़ी राहत जरूर दी है। अमेरिकी लाइसेंस और रणनीतिक तेल रिलीज से आपूर्ति को लेकर चिंता कुछ कम हुई है। हालांकि, मध्य-पूर्व में जारी तनाव और Strait of Hormuz की स्थिति अभी भी सबसे बड़ा जोखिम बनी हुई है। अगर क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है, तो Oil Prices फिर तेजी से ऊपर जा सकती हैं। इसलिए आने वाले दिनों में वैश्विक ऊर्जा बाजार की दिशा पूरी तरह भू-राजनीतिक हालात पर निर्भर करेगी।
