Myanmar Election 2025 की प्रक्रिया रविवार को मतदान शुरू होने के साथ औपचारिक रूप से शुरू हो गई। म्यांमार की सैन्य सरकार का दावा है कि यह चुनाव देश में लोकतंत्र की बहाली की दिशा में एक अहम कदम है। लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग तस्वीर पेश करती है।
यह चुनाव ऐसे समय हो रहा है, जब देश करीब पांच साल से गृहयुद्ध की आग में झुलस रहा है और सैन्य शासन अब तक सत्ता पर अपनी पकड़ पूरी तरह सुरक्षित नहीं कर पाया है।
🗳️ किन हालात में हो रहा है मतदान?
म्यांमार की सबसे लोकप्रिय नेता और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता आंग सान सू ची जेल में हैं। उनकी पार्टी नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (NLD) को भंग कर दिया गया है। ऐसे में चुनावी मैदान में वही दल बचे हैं, जिन्हें सैन्य शासन के करीब माना जाता है।
इसके अलावा:
- सैकड़ों लोगों को चुनाव में बाधा डालने या आलोचना करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया
- देश के कई हिस्सों में मतदान ही नहीं होगा
- सीमावर्ती पहाड़ी इलाकों और मध्य म्यांमार में लड़ाई जारी है
विशेषज्ञों का कहना है कि यह चुनाव सीमित, नियंत्रित और असमान परिस्थितियों में कराया जा रहा है।
⚔️ गृहयुद्ध की पृष्ठभूमि
फरवरी 2021 में म्यांमार की सेना ने चुनाव में धांधली का आरोप लगाकर सत्ता पर कब्जा कर लिया था। अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने उस चुनाव को काफी हद तक निष्पक्ष बताया था।
सैन्य कार्रवाई के बाद शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों को कुचल दिया गया। इसके चलते हजारों युवा:
- जंगलों और पहाड़ियों में पहुंचे
- जातीय विद्रोही संगठनों के साथ मिलकर पीपुल्स डिफेंस फोर्स (PDF) बनाए
शुरुआत में इन समूहों ने सेना को भारी नुकसान पहुंचाया और ऐसा लगा कि सैन्य शासन गिर सकता है।
🔄 इस साल क्यों बदली स्थिति?
इस साल सैन्य सरकार ने:
- नया जबरन भर्ती कानून लागू किया
- हजारों नए सैनिकों को युद्ध में उतारा
- चीन से मिले नए हथियारों का इस्तेमाल किया
इसके चलते सेना ने कई इलाकों में खोया हुआ नियंत्रण वापस पा लिया। विश्लेषकों का मानना है कि इसी वजह से अब चुनाव कराने का रास्ता साफ हुआ।
🏛️ संसद में सेना की स्थायी पकड़
सैन्य शासन की योजना के अनुसार, बनने वाली नई संसद में:
- 25% सीटें सीधे सेना के लिए आरक्षित होंगी
जनरल मिन आंग ह्लाइंग, जिन्होंने 2021 का तख्तापलट किया था, ने खुले तौर पर मतदाताओं से ऐसे उम्मीदवारों को चुनने की अपील की है, जो सेना के साथ “ईमानदारी से सहयोग” कर सकें।
🕊️ आंग सान सू ची की अनुपस्थिति
पिछले एक दशक में हुए चुनावों के विपरीत, इस बार:
- पोस्टरों और प्रचार में आंग सान सू ची कहीं नहीं दिखतीं
- 80 वर्षीय सू ची 27 साल की सजा काट रही हैं
- उन पर लगे आरोपों को आलोचक राजनीति से हटाने की साजिश बताते हैं
अहिंसक आंदोलन की उनकी नीति अब गृहयुद्ध की हिंसा में कहीं खो गई है।
🚨 मानवाधिकारों पर गंभीर आरोप
संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों ने सेना पर:
- गांव जलाने
- नागरिकों की हत्या
- जबरन भर्ती
- बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियों
जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि सैन्य शासन इन आरोपों को खारिज करते हुए खुद को “आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई” में बताता है।
🌍 अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और सैन्य सरकार का जवाब
अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने चुनावों की वैधता पर सवाल उठाए हैं, लेकिन म्यांमार की सेना का कहना है:
“यह चुनाव म्यांमार के लोगों के लिए है, दुनिया को खुश करने के लिए नहीं।”
📉 देश की हालत आज
लगभग पांच साल के संघर्ष में:
- 30 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हो चुके हैं
- हजारों युवा देश छोड़ चुके हैं
- अर्थव्यवस्था बर्बाद हो चुकी है
- म्यांमार दुनिया का सबसे बड़ा मेथामफेटामिन और अफीम उत्पादक बन गया है
🔍 निष्कर्ष
Myanmar Election 2025 को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या यह वाकई लोकतंत्र की ओर कदम है, या फिर सैन्य शासन को वैध ठहराने की कोशिश?
जब तक देश में शांति, निष्पक्ष राजनीति और जनप्रतिनिधियों की आज़ादी सुनिश्चित नहीं होती, तब तक इस चुनाव पर उठते सवाल बने रहेंगे।
