Iran Israel War ने मध्य-पूर्व को एक बार फिर गहरे संकट में डाल दिया है। रविवार तड़के ईरान के इस्फहान शहर पर अमेरिका और इज़राइल के हमलों में कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई। इसके तुरंत बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इज़राइल और खाड़ी देशों में मिसाइल और ड्रोन दागे। सायरन बजते रहे और कई जगह आग लगने की खबरें आईं। इस बीच Donald Trump ने दावा किया कि तेहरान समझौता करना चाहता है। हालांकि ज़मीन पर हालात लगातार बिगड़ते दिख रहे हैं और पूरे क्षेत्र में युद्ध का खतरा बढ़ता जा रहा है।
Iran Israel War: इस्फहान हमला और ईरान की जवाबी कार्रवाई
ईरान के केंद्रीय औद्योगिक शहर Isfahan पर रविवार सुबह हुए हमले में कम से कम 15 लोगों की मौत हुई और कई लोग घायल हुए। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार हमले में औद्योगिक क्षेत्र और आसपास के इलाकों को भारी नुकसान पहुंचा।
इसी दौरान दक्षिणी शहर Shiraz के रिहायशी इलाके भी निशाने पर आए। ईरानी समाचार एजेंसी के मुताबिक यह हमला “आतंकी और अमानवीय” कार्रवाई था।
ईरान ने तुरंत जवाबी हमला किया। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसने अपनी “50वीं लहर” के तहत क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया। यह हमले खासकर संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य बेस पर किए गए।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने क्रूज़ मिसाइलों का इस्तेमाल किया। उनका दावा है कि ये मिसाइलें दुबई के पास से दागी गईं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर हमले जारी रहे तो पूरा क्षेत्र अस्थिर हो सकता है।
ईरान ने यह भी बताया कि एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ब्रिगेडियर जनरल अब्दुल्ला जलाली नसब की भी इज़राइली हमले में मौत हो गई। इससे पहले ईरान के कई बड़े सैन्य अधिकारी भी मारे जा चुके हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक करीब 10,000 घर नष्ट या क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। वहीं युद्ध शुरू होने के बाद से 1,400 से ज्यादा लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है।
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Iran Israel War कैसे बढ़ा
Iran Israel War की शुरुआत फरवरी के अंत में बड़े सैन्य हमलों के साथ हुई। 28 फरवरी को Israel और United States ने ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों पर हमले किए।
इन हमलों का मुख्य लक्ष्य ईरान की सैन्य क्षमता और मिसाइल कार्यक्रम को कमजोर करना बताया गया। लेकिन इसके बाद हालात तेजी से बिगड़ते गए।
ईरान ने भी जवाब में इज़राइल और अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इसके अलावा क्षेत्र के कई खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी बेस भी हमलों की जद में आ गए।
स्थिति और गंभीर इसलिए हो गई क्योंकि दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक Strait of Hormuz भी तनाव के केंद्र में आ गया है।
ईरान ने साफ किया कि उसने इस जलमार्ग को बंद नहीं किया है, लेकिन उसकी नौसेना इस पर “नियंत्रण” बनाए हुए है।
Key Facts
- इस्फहान हमले में कम से कम 15 लोगों की मौत और कई घायल।
- ईरान ने खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन दागे।
- लगभग 10,000 घर हमलों में क्षतिग्रस्त या नष्ट हुए।
- अब तक युद्ध में 1,400 से अधिक लोगों की मौत।
- अमेरिका ने दावा किया कि 15,000 से ज्यादा “दुश्मन ठिकाने” निशाना बनाए गए।
वैश्विक प्रतिक्रियाएं
Iran Israel War का असर पूरे मध्य-पूर्व में दिखाई दे रहा है।
Saudi Arabia में चार ड्रोन को मार गिराया गया। राजधानी रियाद के आसपास सुरक्षा अलर्ट जारी किया गया।
United Arab Emirates के अल-धफरा एयरबेस को भी ईरान ने निशाना बनाया। वहीं फुजैराह बंदरगाह के पास ड्रोन के मलबे से एक व्यक्ति घायल हो गया।
Bahrain और Kuwait में भी मिसाइल हमलों की खबरें आईं। कई जगह एयरबेस और हवाई अड्डों को नुकसान पहुंचा।
इसी बीच इज़राइल में भी सायरन बजते रहे। Tel Aviv के पास मिसाइल के टुकड़े गिरने से आग लग गई।
इज़राइल के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार पिछले 24 घंटों में 108 लोग घायल हुए।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा कि ईरान समझौता करना चाहता है। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि अभी शर्तें पर्याप्त नहीं हैं।
उन्होंने यह भी प्रस्ताव दिया कि खाड़ी के तेल मार्गों की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक गठबंधन बनाया जाए।
अधिक जानकारी:
https://www.aljazeera.com
https://www.reuters.com
Iran Israel War अब केवल दो देशों का संघर्ष नहीं रह गया है। यह पूरे मध्य-पूर्व को अस्थिर कर सकता है। खाड़ी देशों में हमले, तेल मार्गों पर खतरा और लगातार बढ़ती सैन्य कार्रवाई स्थिति को और गंभीर बना रही है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर जल्द कूटनीतिक समाधान नहीं निकला तो Iran Israel War वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा दोनों के लिए बड़ा संकट बन सकता है।
