India Israel Governance Model: चौंकाने वाला खुलासा

India Israel Governance Model को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो गई है। पिछले कुछ वर्षों में भारत और इज़राइल के रिश्ते केवल रक्षा और व्यापार तक सीमित नहीं रहे, बल्कि प्रशासनिक और सुरक्षा नीतियों में भी समानताएं दिखाई देने लगी हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि India Israel Governance Model अब केवल कूटनीतिक साझेदारी नहीं, बल्कि वैचारिक और रणनीतिक साझेदारी का रूप ले चुका है।


2019 का बयान और बढ़ती चर्चा

नवंबर 2019 में न्यूयॉर्क में एक कार्यक्रम के दौरान भारत के तत्कालीन कौंसुल जनरल Sandeep Chakravorty ने “इज़राइली मॉडल” का जिक्र किया था।

यह बयान उस समय आया जब अनुच्छेद 370 हटने के बाद कश्मीर में सख्त प्रतिबंध लागू थे। उस बयान के बाद पहली बार India Israel Governance Model शब्द व्यापक चर्चा में आया।

तब से यह सवाल उठता रहा है कि क्या भारत वास्तव में इज़राइल के प्रशासनिक ढांचे से प्रेरणा ले रहा है?


वैचारिक समानता: हिंदुत्व और ज़ायनिज़्म

प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में भारत ने इज़राइल के साथ खुलकर रणनीतिक संबंध मजबूत किए हैं।

विश्लेषकों का कहना है कि India Israel Governance Model की जड़ें वैचारिक समानताओं में भी दिखाई देती हैं। हिंदुत्व और ज़ायनिज़्म दोनों ही अपने-अपने राष्ट्र को सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के आधार पर परिभाषित करते हैं।

हालांकि, सरकार का आधिकारिक रुख यह है कि भारत की विदेश नीति पूरी तरह राष्ट्रीय हितों पर आधारित है।


बुलडोजर नीति और प्रशासनिक सख्ती

India Israel Governance Model की चर्चा सबसे अधिक “बुलडोजर कार्रवाई” को लेकर होती है।

पिछले वर्षों में भाजपा शासित राज्यों में अवैध निर्माण और दंगों के मामलों में संपत्तियों पर बुलडोजर चलाए गए।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath को समर्थक “बुलडोजर बाबा” कहकर पुकारते हैं।

आलोचकों का दावा है कि यह तरीका इज़राइल द्वारा वेस्ट बैंक में घरों को ध्वस्त करने की नीति से मिलता-जुलता है।

हालांकि नवंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना कानूनी प्रक्रिया के किसी संपत्ति को नहीं गिराया जा सकता। इसके बावजूद India Israel Governance Model पर बहस जारी है।

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India Israel Governance Model

सुरक्षा ढांचा और तकनीकी सहयोग

भारत इज़राइल का सबसे बड़ा रक्षा खरीदार है। ड्रोन, रडार और निगरानी प्रणाली भारत ने इज़राइल से खरीदी हैं।

India Israel Governance Model का एक महत्वपूर्ण पहलू सुरक्षा सहयोग भी है।

पेगासस स्पाइवेयर, जिसे इज़राइली कंपनी NSO ग्रुप ने बनाया, भारत में बड़े विवाद का विषय बना।

पत्रकार Siddharth Varadarajan सहित कई लोगों ने जासूसी के आरोप लगाए।

सुप्रीम कोर्ट की समिति ने कुछ उपकरणों में मैलवेयर की पुष्टि की, हालांकि इसे सीधे पेगासस से जोड़ने के पर्याप्त सबूत नहीं मिले।


कश्मीर: सबसे बड़ा उदाहरण?

विश्लेषकों के अनुसार India Israel Governance Model का सबसे अधिक उल्लेख कश्मीर के संदर्भ में किया जाता है।

अगस्त 2019 के बाद कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त कर दिया गया। इसके बाद सुरक्षा बलों की मौजूदगी और प्रशासनिक नियंत्रण और मजबूत हुआ।

कुछ विशेषज्ञ इसे इज़राइल के फिलिस्तीन नीति से जोड़कर देखते हैं।

हालांकि, यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि कश्मीर और फिलिस्तीन की ऐतिहासिक परिस्थितियां अलग हैं।

फिर भी, India Israel Governance Model को लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में तुलना जारी रहती है।


मीडिया विमर्श और जनभावना

2025 में पहलगाम में हुए हमले के बाद कई टीवी बहसों में इज़राइल का उदाहरण दिया गया।

उस दौरान India Israel Governance Model शब्द सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगा।

कुछ विशेषज्ञों ने कहा कि भारत की सख्त प्रतिक्रिया “इज़राइली शैली” की याद दिलाती है।

हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया कि भारत की हर कार्रवाई राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में होती है।


बदलता कूटनीतिक संतुलन

स्पष्ट है कि India Israel Governance Model केवल रक्षा समझौते तक सीमित नहीं है। यह अब राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन चुका है।

जहां समर्थक इसे रणनीतिक मजबूती बताते हैं, वहीं आलोचक इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए चुनौती मानते हैं।

आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि India Israel Governance Model भारत की विदेश नीति और आंतरिक प्रशासन को किस दिशा में प्रभावित करता है।

फिलहाल इतना तय है कि यह मुद्दा आने वाले वर्षों में भी चर्चा के केंद्र में रहेगा।


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