Opium Farming Durg: 5 चौंकाने वाले खुलासे, अधिकारी सस्पेंड

Opium Farming Durg मामले ने पूरे जिले में प्रशासनिक व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। दुर्ग जिले के समोदा गांव में एक भाजपा नेता के खेत में अफीम की खेती मिलने के बाद प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। इस मामले में लापरवाही पाए जाने पर ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी एकता साहू को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। वहीं पटवारी और फसल सर्वेयर को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। जांच में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं, जिनसे सरकारी योजनाओं की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।


Opium Farming Durg: जांच में सामने आई गंभीर लापरवाही

Opium Farming Durg मामले में जिला प्रशासन ने जांच के बाद बड़ी कार्रवाई की है। दुर्ग कलेक्टर अभिजीत सिंह ने ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी एकता साहू को निलंबित कर दिया है। जांच में पाया गया कि उन्होंने अपने दायित्वों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही की।

अधिकारियों के अनुसार जिस खेत को मक्का फसल के प्रदर्शन प्लॉट के रूप में दिखाया गया था, वहां वास्तव में मक्का की फसल नहीं थी। निरीक्षण के दौरान उस खेत में धान की फसल मिली। यह प्लॉट राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत लगाया गया बताया गया था।

जांच में यह भी सामने आया कि कृषि मैप पोर्टल पर असली किसान की जगह किसी अन्य व्यक्ति की फोटो अपलोड की गई थी। इसके अलावा प्रदर्शन प्लॉट पर सूचना बोर्ड भी नहीं लगाया गया था। सबसे गंभीर बात यह रही कि पास में अफीम की खेती होने के बावजूद इसकी सूचना अधिकारियों को नहीं दी गई।

अधिकारी एकता साहू ने अपने जवाब में कहा कि नेटवर्क की समस्या के कारण फोटो सही तरह से अपलोड नहीं हो पाई। उन्होंने यह भी बताया कि किसान की तबीयत खराब होने के कारण उसके प्रतिनिधि की फोटो अपलोड की गई थी। हालांकि प्रशासन ने इन कारणों को संतोषजनक नहीं माना।

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मक्का प्रदर्शन प्लॉट से शुरू हुई जांच

इस पूरे मामले की शुरुआत 7 मार्च को हुई। उस दिन जिला कृषि विभाग के अधिकारियों ने समोदा गांव में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत लगाए गए मक्का फसल प्रदर्शन प्लॉट का निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को कई अनियमितताएं दिखाई दीं। जिस जमीन को मक्का फसल का प्रदर्शन प्लॉट बताया गया था, वहां वास्तव में मक्का की फसल मौजूद नहीं थी। उस खेत में धान की फसल लगी हुई थी।

जांच आगे बढ़ने पर पता चला कि कृषि मैप पोर्टल पर जो फोटो अपलोड की गई थी, वह असली खेत की नहीं थी। किसी ग्रामीण को मक्का के खेत के पास खड़ा कर फोटो ली गई थी और उसे ही पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया।

इसके अलावा यह भी सामने आया कि जिस जगह फोटो ली गई थी, वहां से करीब 100 मीटर दूर अफीम की खेती हो रही थी। इस जानकारी को अधिकारियों तक नहीं पहुंचाया गया।


Key Facts: Opium Farming Durg

  • समोदा गांव में भाजपा नेता के खेत के पास अफीम की खेती मिली
  • कृषि विस्तार अधिकारी एकता साहू को निलंबित किया गया
  • पटवारी अनिता साहू और सर्वेयर शशिकांत साहू को नोटिस
  • मक्का प्रदर्शन प्लॉट के नाम पर धान की फसल पाई गई
  • पोर्टल पर गलत फोटो अपलोड करने का मामला सामने आया

Opium Farming Durg मामले के सामने आने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था पर कई सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय पर जांच नहीं होती तो यह मामला शायद सामने ही नहीं आता।

विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि योजनाओं में पारदर्शिता बनाए रखना बेहद जरूरी है। यदि अधिकारी सही तरीके से निरीक्षण और रिपोर्टिंग नहीं करते, तो सरकारी योजनाओं का उद्देश्य पूरा नहीं हो पाता।

इस मामले में सर्वेयर और पटवारी की भूमिका भी जांच के दायरे में है। नियम के अनुसार सर्वेयर द्वारा अपलोड किए गए डेटा का सत्यापन पटवारी को मौके पर जाकर करना होता है। लेकिन इस मामले में बिना जांच के रिपोर्ट को मंजूरी दे दी गई।

प्रशासन का कहना है कि यदि अन्य कर्मचारियों की भी लापरवाही सामने आती है तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।


कुल मिलाकर Opium Farming Durg मामला प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर उदाहरण बनकर सामने आया है। जांच में कई अनियमितताएं उजागर हुई हैं और एक अधिकारी को निलंबित भी किया जा चुका है। अब बाकी कर्मचारियों के जवाब का इंतजार किया जा रहा है। यदि दोष सिद्ध होता है, तो और कार्रवाई हो सकती है। इस घटना ने साफ कर दिया है कि Opium Farming Durg जैसे मामलों में सख्त निगरानी और जवाबदेही बेहद जरूरी है।

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