धर्मस्थल मंदिर मामला: झूठे आरोपों का सच, SIT ने शिकायतकर्ता चिनैय्या को किया गिरफ्तार

मंगलुरु, 23 अगस्त 2025।
कर्नाटक के धर्मस्थल मंजनाथ स्वामी मंदिर को लेकर लगाए गए बहुचर्चित हत्या, बलात्कार और दफन के आरोप अब खुद झूठ की परतों में उलझते दिखाई दे रहे हैं। इन सनसनीखेज दावों को करने वाले पूर्व सफाईकर्मी सी.एन. चिनैय्या को शनिवार को विशेष जांच दल (SIT) ने गिरफ्तार कर लिया।

चिनैय्या ने जांच समिति के सामने वर्षों तक मास्क पहनकर पेशी दी थी, मानो कोई बड़ा रहस्य उसके पास हो। लेकिन SIT की गहन पूछताछ में उसके बयानों और प्रस्तुत दस्तावेज़ों में भारी विरोधाभास सामने आया। यही नहीं, जिन 17 जगहों की खुदाई उसने बताई थी, उनमें से 15 जगहों पर कुछ नहीं मिला, केवल दो जगहों से आंशिक मानव अवशेष बरामद हुए। अदालत ने उसे 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है।


झूठी गुमशुदगी का खुलासा

इस केस का दूसरा पहलू तब खुला जब सुजाता भट नामक महिला ने टीवी चैनल पर कबूल किया कि उसने 2003 में अपनी बेटी अनन्या भट के लापता होने की फर्जी शिकायत दबाव में दर्ज कराई थी। बाद में उसने स्वीकार किया कि उसकी कोई बेटी इस नाम से थी ही नहीं और उसने यह सब एक जमीन विवाद की खीझ में किया था।

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आरोप और साजिश का आरोप

धर्मस्थल धर्माधिकारी डी. वीरेन्द्र हेगड़े ने इन आरोपों को शुरू से ही “निराधार” और “साजिश” बताया। उनके समर्थकों का कहना है कि यह पूरा विवाद हिंदू धार्मिक संस्थानों की छवि खराब करने की सोची-समझी योजना है।

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा कि सरकार सच के साथ खड़ी है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। वहीं, बीजेपी ने SIT से अंतरिम रिपोर्ट की मांग की और इसे “हिंदू धर्म को बदनाम करने की toolkit” बताया।


यूट्यूबर पर कार्रवाई

इस विवाद में सोशल मीडिया भी शामिल हो गया है। यूट्यूबर एम.डी. समीर पर आरोप है कि उसने इस केस से जुड़े भड़काऊ और भ्रामक वीडियो अपलोड किए। अदालत ने उसे फिलहाल जमानत दी है लेकिन SIT ने चेतावनी दी है कि वह जांच में सहयोग करे और कोई उत्तेजक बयान न दे।


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मानवीय पहलू

धर्मस्थल, जिसे लाखों लोग “दक्षिण का तीर्थ” कहते हैं, अब अविश्वास और अफवाहों के बोझ तले दब गया है। गांवों और कस्बों में लोग आपस में चर्चा कर रहे हैं— “क्या वाकई यहां कोई भयावह सच दफन है या यह सब बदले की राजनीति है?”

फिलहाल, जनता की नज़रें SIT की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो तय करेगी कि यह मामला सच का उद्घाटन करेगा या साजिश का पर्दाफाश