Chandru Lamani Bribery Case: कर्नाटक की राजनीति में उस समय हलचल मच गई, जब लोकायुक्त ने शिरहट्टी से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक को कथित रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया।
Chandru Lamani Bribery Case में लोकायुक्त की टीम ने विधायक Chandru Lamani को 5 लाख रुपये लेते हुए गिरफ्तार किया। आरोप है कि उन्होंने कुल 11 लाख रुपये की रिश्वत की मांग की थी।
लोकायुक्त ने बिछाया जाल
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गडग जिले में सिंचाई विभाग के एक प्रोजेक्ट की मंजूरी के बदले रिश्वत मांगी गई थी। इस प्रोजेक्ट के तहत सड़क के दोनों ओर दीवार निर्माण का कार्य प्रस्तावित था।
यह काम क्लास-1 कॉन्ट्रैक्टर विजय पुजार को दिया गया था। पुजार ने ही एंटी-करप्शन अधिकारियों से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत की पुष्टि के बाद लोकायुक्त पुलिस ने 21 फरवरी को ट्रैप ऑपरेशन की योजना बनाई। वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में ऑपरेशन चलाया गया और Chandru Lamani Bribery Case में विधायक को कथित 11 लाख रुपये में से 5 लाख रुपये लेते हुए पकड़ लिया गया।
दो सहयोगी भी हिरासत में
इस कार्रवाई के दौरान विधायक के साथ मौजूद दो अन्य लोगों—मंजूनाथ वाल्मीकि और गुरुनाइक—को भी हिरासत में लिया गया।
जांच एजेंसियों को शक है कि वे भी इस कथित लेन-देन में शामिल थे। फिलहाल तीनों से पूछताछ जारी है और आवश्यक सबूत जुटाए जा रहे हैं।
लोकायुक्त ने मामला प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत दर्ज किया है।
CM सिद्दारमैया की प्रतिक्रिया
मामले पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री Siddaramaiah का बयान भी सामने आया है।
उन्होंने कहा कि उन्हें इस घटना की जानकारी टीवी के माध्यम से मिली है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच लोकायुक्त कर रहा है और सरकार इसमें हस्तक्षेप नहीं करेगी।
सीएम ने कहा कि जांच पूरी होने दी जानी चाहिए, उसके बाद ही इस मामले पर कोई टिप्पणी की जाएगी।
राजनीतिक और प्रशासनिक असर
Chandru Lamani Bribery Case ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई को लेकर लोकायुक्त की सक्रियता चर्चा में है।
साथ ही, यह मामला प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।
आम जनता अब इस बात पर नजर रखे हुए है कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और कानून के तहत क्या कार्रवाई होती है।
Chandru Lamani Bribery Case केवल एक गिरफ्तारी नहीं, बल्कि शासन और पारदर्शिता पर बड़ा सवाल भी है।
आगे की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। फिलहाल लोकायुक्त की कार्रवाई ने यह संदेश जरूर दिया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में सख्ती बरती जा रही है।
