Bilaspur News में एक चौंकाने वाला और दिल दहलाने वाला मामला सामने आया है। बिलासपुर के तोरवा थाना क्षेत्र में एक रिटायर्ड कर्मचारी से उनके बेटे को रेलवे में नौकरी दिलाने का झांसा देकर करीब 15 लाख रुपए की ठगी की गई।
विशाखापट्टनम की एक महिला और उसकी बेटी ने मिलकर कूटरचना के जरिए फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार किया और ईमेल से भेजा। पांच साल तक पीड़ित को झूठे भरोसे में रखा गया।
अब तोरवा पुलिस ने शिकायत पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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कौन है पीड़ित और कैसे हुई ठगी की शुरुआत
Bilaspur News के इस मामले में पीड़ित हैं तोरवा क्षेत्र निवासी एन. वेंकट सूर्यप्रताप, जो पहले प्राइवेट नौकरी करते थे और अब रिटायर हो चुके हैं।
उन्होंने पुलिस को बताया कि अगस्त 2020 में उन्हें तेनिटी इंद्राणी नाम की एक महिला का फोन आया। महिला ने दावा किया कि वह उनके बेटे को रेलवे में नौकरी दिला सकती है।
शुरुआत में महिला ने 6 लाख रुपए की मांग की। लंबी बातचीत के बाद 4 लाख रुपए में सौदा तय हुआ और बेटे के दस्तावेज ईमेल के जरिए मंगवाए गए।
यहीं से शुरू हुआ एक लंबे धोखे का सिलसिला, जो पांच साल तक चला।
राजनीतिक कोटे का झांसा – कैसे बढ़ती गई रकम
एक के बाद एक बहाने बनाकर वसूले पैसे
आरोपी इंद्राणी ने पीड़ित को राजनीतिक कोटे में नियुक्ति दिलाने का दावा किया। उसने अपनी बेटी वलिवेती वेंकट नागा कीर्ति के बैंक खाते में रकम ट्रांसफर करने को कहा।
पहले 4 लाख रुपए जमा कराए गए। इसके बाद 50-50 हजार रुपए की अतिरिक्त किस्तें लेना शुरू किया गया।
फिर राजनीतिक कोटा, फाइल प्रोसेसिंग और अन्य बहानों से रकम बढ़ाई जाती रही। हर बार नए बहाने और नए दावे किए गए।
Bilaspur News: फर्जी नियुक्ति पत्र – रेल मंत्रालय के नाम पर बड़ा धोखा
Bilaspur News का यह पहलू सबसे चौंकाने वाला है।
जून 2024 में आरोपियों ने रेल मंत्रालय के नाम से एक फर्जी ज्वाइनिंग लेटर ईमेल के जरिए भेजा। यह नियुक्ति पत्र देखने में बिल्कुल असली जैसा था – जिसमें सरकारी फॉर्मेट, मुहर और दस्तावेज सब कुछ नकली था।
इस फर्जी नियुक्ति पत्र पर भरोसा करके पीड़ित ने और अधिक रकम देना जारी रखा। यह ठगी का सबसे खतरनाक हथकंडा था।
| ठगी का तरीका | विवरण |
|---|---|
| पहला संपर्क | अगस्त 2020, फोन के जरिए |
| पहली रकम | 4 लाख रुपए |
| झांसा | राजनीतिक कोटे में रेलवे नौकरी |
| फर्जी दस्तावेज | रेल मंत्रालय का नकली ज्वाइनिंग लेटर (जून 2024) |
| कुल ठगी | 15 लाख रुपए |
| कुल ट्रांजेक्शन | 18 अलग-अलग |
| ठगी का समय | 2020 से 2025 तक (5 साल) |
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2024-25 में फिर मांगे लाखों – 18 ट्रांजेक्शन में ₹15 लाख हड़पे
दिसंबर 2024 से फरवरी 2025 के बीच आरोपियों ने फिर से रकम की मांग की।
अलग-अलग तारीखों में UPI, बैंक ट्रांसफर और NEFT के जरिए पैसे जमा कराए गए। पीड़ित के अनुसार, कुल मिलाकर करीब ₹15 लाख रुपए 18 अलग-अलग ट्रांजेक्शन में आरोपियों के खातों में ट्रांसफर किए गए।
यह ठगी का सुनियोजित और लंबे समय तक चला षड्यंत्र था, जिसमें पीड़ित को हर बार नई उम्मीद दिखाकर पैसे ऐंठे गए।
कोविड और चुनाव का बहाना – 5 साल तक टालते रहे आरोपी
जब नौकरी नहीं लगी तो आरोपियों ने कोविड-19 महामारी और चुनाव का हवाला देकर समय टालना शुरू किया।
हर बार नया बहाना – कभी लॉकडाउन, कभी चुनाव आचार संहिता, कभी विभागीय प्रक्रिया में देरी। इस तरह पांच साल तक पीड़ित को झूठी उम्मीद में रखा गया।
यह मनोवैज्ञानिक ठगी का एक क्लासिक उदाहरण है, जहां पीड़ित पहले ही इतना पैसा दे चुका होता है कि वह पीछे हटने में डरता है और और अधिक पैसे गंवाता चला जाता है।
तोरवा पुलिस ने दर्ज किया मामला – जांच शुरू
Bilaspur News में पुलिस कार्रवाई की जानकारी अहम है।
पीड़ित एन. वेंकट सूर्यप्रताप की शिकायत पर तोरवा पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है। आरोपी हैं तेनिटी इंद्राणी और उसकी बेटी वलिवेती वेंकट नागा कीर्ति, दोनों विशाखापट्टनम की निवासी हैं।
पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। 18 ट्रांजेक्शन के बैंक रिकॉर्ड और फर्जी ईमेल जांच के महत्वपूर्ण साक्ष्य हैं। पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशाखापट्टनम से संपर्क कर सकती है।
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ऐसी ठगी से कैसे बचें – जरूरी सावधानियां
Bilaspur News के पाठकों के लिए यह जानना जरूरी है कि ऐसी ठगी से कैसे बचा जाए।
इन बातों का रखें ध्यान:
सरकारी नौकरी केवल आधिकारिक वेबसाइट (जैसे indianrailways.gov.in या RRB पोर्टल) के जरिए ही मिलती है। राजनीतिक कोटे में रेलवे नौकरी का कोई प्रावधान नहीं है – यह पूरी तरह झूठा दावा है।
किसी अनजान व्यक्ति के बैंक खाते में नौकरी के नाम पर पैसे कभी न भेजें। किसी भी नियुक्ति पत्र की आधिकारिक स्रोत से पुष्टि जरूर करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें।
Bilaspur News: नौकरी ठगों से रहें सावधान, पुलिस कर रही है कार्रवाई
Bilaspur News का यह मामला पूरे छत्तीसगढ़ के लिए एक बड़ी चेतावनी है। रेलवे या किसी भी सरकारी नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह अब और भी शातिर और तकनीकी रूप से सक्षम हो गए हैं।
फर्जी ईमेल, नकली नियुक्ति पत्र और पांच साल तक झूठे भरोसे में रखना – यह दर्शाता है कि ये ठग कितने संगठित हैं। Bilaspur के पीड़ित परिवार की यह कहानी हमें सिखाती है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के जरिए नौकरी दिलाने के दावे पर आंख मूंदकर भरोसा न करें।
तोरवा पुलिस की जांच से उम्मीद है कि आरोपियों को जल्द न्याय के कटघरे में लाया जाएगा। Bilaspur News इस मामले पर नजर बनाए रखेगा।
