Maoist Top Leadership Surrender: देवजी और संग्राम सहित शीर्ष नक्सली नेताओं का आत्मसमर्पण, छत्तीसगढ़-तेलंगाना में बड़ा झटका

Maoist Top Leadership Surrender को हाल के वर्षों में नक्सल आंदोलन के लिए सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है। प्रतिबंधित संगठन के शीर्ष नेतृत्व ने हथियार डाल दिए हैं, जिससे छत्तीसगढ़ और पड़ोसी राज्यों में उसके संगठनात्मक ढांचे को गंभीर आघात पहुंचा है।

सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय समिति सचिव और संगठन के कथित “सुप्रीम कमांडर” थिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवजी ने तेलंगाना पुलिस के स्पेशल इंटेलिजेंस ब्यूरो के सामने आत्मसमर्पण किया। उनके साथ पोलित ब्यूरो सदस्य मल्ला राजिरेड्डी उर्फ संग्राम भी शामिल रहे। इसके अतिरिक्त लगभग 16 अन्य नक्सलियों ने भी आत्मसमर्पण किया।


कर्रेगुट्टा ऑपरेशन के बाद बड़ा घटनाक्रम

Maoist Top Leadership Surrender की पृष्ठभूमि में हाल ही में कर्रेगुट्टा पहाड़ियों में चलाए गए संयुक्त सुरक्षा अभियान को अहम माना जा रहा है। छत्तीसगढ़ और तेलंगाना की सीमा पर लगातार दबाव बनाए रखने से नक्सली ढांचा कमजोर पड़ा।

सूत्र बताते हैं कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई से संगठन के प्रमुख ठिकाने ध्वस्त हुए और संचार तंत्र बाधित हो गया। ऐसे में शीर्ष नेतृत्व के पास विकल्प सीमित हो गए थे।

तेलंगाना पुलिस अगले दो दिनों में इस “ऐतिहासिक उपलब्धि” पर औपचारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सकती है।


‘नक्सलवाद अंतिम चरण में’: विजय शर्मा

घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री Vijay Sharma ने कहा कि केंद्रीय गृहमंत्री Amit Shah के नेतृत्व में नक्सलवाद अपने अंतिम चरण में है।

उन्होंने कहा, “सुरक्षा बलों के निरंतर दबाव का परिणाम है कि आज बड़े नक्सली नेता आत्मसमर्पण कर रहे हैं। हमारा लक्ष्य 31 मार्च तक देश से नक्सलवाद का पूर्ण उन्मूलन करना है।”

यह बयान सरकार की उस समयसीमा को दर्शाता है, जिसके तहत दशकों पुराने इस उग्रवाद को समाप्त करने का लक्ष्य तय किया गया है।


संगठन में नेतृत्व शून्यता की आशंका

Maoist Top Leadership Surrender केवल एक सुरक्षा सफलता नहीं, बल्कि संगठन के भीतर संभावित नेतृत्व शून्यता का संकेत भी है। देवजी केंद्रीय समिति सचिव और रणनीतिकार माने जाते थे। उनके बाहर होने से बस्तर सहित कई इलाकों में संगठनात्मक समन्वय प्रभावित हो सकता है।

सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि वरिष्ठ नेताओं के आत्मसमर्पण से निचले स्तर के कैडर भी प्रेरित हो सकते हैं। इससे संघर्ष प्रभावित जिलों में शांति प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है।


बस्तर से तेलंगाना तक असर

छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल से लेकर तेलंगाना के वन क्षेत्रों तक नक्सली नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय रहा है। अनुभवी कमांडरों के भरोसे चलने वाला यह ढांचा अब वैचारिक और रणनीतिक असमंजस की स्थिति में आ सकता है।

Maoist Top Leadership Surrender को सुरक्षा एजेंसियां एक निर्णायक मोड़ मान रही हैं। यदि आने वाले समय में और कैडर आत्मसमर्पण करते हैं, तो क्षेत्र में स्थायी शांति की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

Maoist Top Leadership Surrender ने नक्सल आंदोलन को गहरी चोट पहुंचाई है। कर्रेगुट्टा ऑपरेशन के बाद यह आत्मसमर्पण सुरक्षा बलों के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है।

अब सबकी नजर इस पर है कि क्या यह घटनाक्रम दशकों पुराने उग्रवाद के अंत की शुरुआत साबित होगा।

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