बिलासपुर की बेटी ने एक बार फिर शहर का नाम रोशन किया है। Akanksha Khess Panna Civil Judge परीक्षा परिणाम में अपने वर्ग, अनुसूचित जनजाति (ST) ओपन कैटेगरी में दूसरा स्थान प्राप्त कर सिविल जज (जूनियर डिवीजन) बनी हैं।
जैसे ही परिणाम घोषित हुआ, परिवार, मित्रों और शुभचिंतकों में खुशी की लहर दौड़ गई। बधाइयों का सिलसिला लगातार जारी है।
संस्कारधानी की बेटी बनी जज
बिलासपुर, जिसे संस्कारधानी के नाम से भी जाना जाता है, अब आकांक्षा की इस उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहा है।
परिजनों के अनुसार, Akanksha Khess Panna Civil Judge बनना उनकी वर्षों की मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प का परिणाम है। उन्होंने शुरुआत से ही अपने लक्ष्य को स्पष्ट रखा और निरंतर अध्ययन करती रहीं।
शिक्षकों और साथियों ने भी उनकी लगन और समर्पण की सराहना की है।
विवाह और मातृत्व के साथ की तैयारी
आकांक्षा की सफलता की कहानी और भी प्रेरणादायक है। विवाह के बाद उन्होंने एल.एल.बी. की डिग्री हासिल की। इसके बाद मातृत्व और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाते हुए उन्होंने सिविल जज (जूनियर डिवीजन) परीक्षा की तैयारी की।
उनके दो बेटे हैं—एक 8 वर्ष का और दूसरा 3 वर्ष का। घर और पढ़ाई के बीच समय प्रबंधन आसान नहीं था। फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी।
आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और Akanksha Khess Panna Civil Judge परीक्षा में अच्छे अंकों से सफल हुईं।
छत्तीसगढ़ से सफल अभ्यर्थियों की सूची
इस परीक्षा में छत्तीसगढ़ से कुल 57 अभ्यर्थी सफल होकर सिविल जज बने हैं। सफल उम्मीदवारों में शामिल हैं:
- अंजुम आरा (UR)
- शिवांगी तिवारी (UR)
- सृष्टि सोंकला (OBC)
- प्रज्ञा वैष्णव (OBC)
- कोमल प्रीति उरांव (ST)
- आकांक्षा खेस्स पन्ना (ST)
- ज्योति शर्मा (SC)
- सीमा टांडे (SC)
इन सभी अभ्यर्थियों ने कठिन प्रतिस्पर्धा के बीच सफलता हासिल की है।
युवाओं और महिलाओं के लिए प्रेरणा
Akanksha Khess Panna Civil Judge की सफलता उन महिलाओं के लिए विशेष रूप से प्रेरणादायक है, जो वैवाहिक जीवन और पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करना चाहती हैं।
सीमित संसाधनों में भी उन्होंने निरंतर अध्ययन, सकारात्मक सोच और मजबूत समय प्रबंधन के बल पर यह मुकाम हासिल किया।
उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, गुरुओं और साथियों को दिया है।
बिलासपुर की आकांक्षा खेस्स पन्ना ने यह साबित कर दिया कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदार हो, तो कोई भी बाधा रास्ता नहीं रोक सकती। Akanksha Khess Panna Civil Judge बनकर उन्होंने न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे प्रदेश का मान बढ़ाया है।
उनकी सफलता आने वाली पीढ़ी के लिए एक प्रेरक कहानी बन गई है।
