Gaurav Rath at Maa Matangi Divya Dham: धमतरी में 25 हजार श्रद्धालुओं ने किया ऐतिहासिक स्वागत, शिव जन्मोत्सव यात्रा से गूंजा राष्ट्रभाव

धमतरी जिले के कुरूद स्थित जी-जमगांव में उस समय भक्तिभाव और राष्ट्रगौरव की अनोखी छटा देखने को मिली, जब Gaurav Rath at Maa Matangi Divya Dham का भव्य स्वागत किया गया।

करीब 20 से 25 हजार श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक और राष्ट्रभक्ति के वातावरण से ओत-प्रोत कर दिया। आयोजन माँ मातंगी दिव्य धाम के पीठाधीश्वर डॉ. प्रेमा साई जी महाराज के सानिध्य में संपन्न हुआ।


त्रिकाल दर्शी धाम में आध्यात्मिक ऊर्जा का संगम

माँ मातंगी दिव्य धाम, जिसे त्रिकाल दर्शी धाम के रूप में जाना जाता है, लंबे समय से आध्यात्मिक साधना और सामाजिक जागरण का केंद्र रहा है।

Gaurav Rath at Maa Matangi Divya Dham के आगमन ने इस पवित्र स्थल को और भी विशेष बना दिया।

श्रद्धालु सुबह से ही धाम में एकत्र होने लगे थे। हर ओर भजन-कीर्तन, जयघोष और राष्ट्रगान की ध्वनि गूंज रही थी।


राष्ट्र जागरण और सांस्कृतिक एकता का संदेश

मीडिया से चर्चा के दौरान डॉ. प्रेमा साई जी महाराज ने हिंदू जागरण, सांस्कृतिक समरसता और राष्ट्र चेतना पर अपने विचार साझा किए।

उन्होंने छत्तीसगढ़ शासन से आग्रह किया कि महापुरुषों के जीवन और उनके योगदान को शैक्षणिक पाठ्यक्रम में समुचित स्थान दिया जाए।

उनका कहना था कि नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास से जोड़ना समय की आवश्यकता है।


विधिवत पूजन और भव्य शोभायात्रा

सायं 5 बजे राष्ट्रीय गौरव रथ का विधिवत पूजन किया गया। इसके बाद भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल हुए।

भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन देर रात 11 बजे तक चलता रहा।

Gaurav Rath at Maa Matangi Divya Dham का यह स्वागत समारोह श्रद्धा, अनुशासन और उत्साह का अद्भुत संगम साबित हुआ।


नासिक से जगन्नाथ पुरी तक राष्ट्रीय गौरव रथयात्रा

उल्लेखनीय है कि छावा भारत क्रांति मिशन द्वारा राष्ट्रीय शिव जन्मोत्सव सोहळा 2026 के अंतर्गत यह रथयात्रा निकाली गई।

14 फरवरी को कालिका माता मंदिर, नासिक से प्रारंभ हुई यह यात्रा सिन्नर, शिरडी, छत्रपति संभाजीनगर, नागपुर, रायपुर सहित विभिन्न शहरों से होते हुए ओडिशा के जगन्नाथ पुरी पहुँची।

19 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय शिव जन्मोत्सव समारोह श्रद्धा और गरिमा के साथ संपन्न हुआ।

छत्रपति शिवाजी महाराज की अक्षत प्रतिमा के साथ निकली इस यात्रा ने देशभर में राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक एकता का संदेश प्रसारित किया।


छत्तीसगढ़ की धरती के लिए गौरवपूर्ण क्षण

आयोजकों ने इसे छत्तीसगढ़ के लिए ऐतिहासिक और अविस्मरणीय पल बताया।

Gaurav Rath at Maa Matangi Divya Dham केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं था, बल्कि यह राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बनकर उभरा।

श्रद्धालुओं की विशाल उपस्थिति ने यह सिद्ध कर दिया कि जब आस्था और राष्ट्रभाव एक साथ आते हैं, तो वातावरण प्रेरणा और ऊर्जा से भर उठता है।


धमतरी के जी-जमगांव में आयोजित यह समारोह आध्यात्मिकता और राष्ट्रभक्ति का अनूठा उदाहरण बना।

Gaurav Rath at Maa Matangi Divya Dham ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि संस्कृति, इतिहास और आस्था मिलकर समाज को नई दिशा दे सकते हैं।

यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।

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