Chhattisgarh High Court ने नाबालिगों से जुड़े गंभीर अपराधों पर अहम टिप्पणी करते हुए साफ किया है कि जुवेनाइल जस्टिस एक्ट सुधारवादी जरूर है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि हत्या जैसे जघन्य मामलों में जमानत को अधिकार मान लिया जाए।
Chhattisgarh High Court juvenile bail murder case में अदालत ने धमतरी जिले के एक हत्या प्रकरण में नाबालिग आरोपी की बेल अपील खारिज कर दी। यह फैसला 13 फरवरी 2026 को सुनाया गया।
क्या है पूरा मामला?
मामला धमतरी जिले का है। आरोप है कि 6 जून 2025 को विवाद के बाद नाबालिग आरोपी ने चाकू से हमला किया, जिससे एक व्यक्ति की मौत हो गई।
बचाव पक्ष ने इसे आत्मरक्षा का मामला बताया और कहा कि आरोपी का कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। साथ ही यह तर्क भी रखा गया कि लंबी हिरासत से वह आपराधिक प्रभाव में आ सकता है।
हालांकि, Chhattisgarh High Court juvenile bail murder case में अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और आरोप की गंभीरता को प्राथमिकता दी।
धारा 12 की व्याख्या पर अदालत की स्पष्टता
फैसले में जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2015 की धारा 12 का विस्तार से विश्लेषण किया गया। अदालत ने कहा कि यह प्रावधान जमानत को पूर्ण अधिकार नहीं बनाता।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि आरोपी की रिहाई से न्याय की प्रक्रिया प्रभावित होने, अपराध दोहराने या समाज पर प्रतिकूल असर की आशंका हो, तो बेल रोकी जा सकती है।
यही कारण है कि Chhattisgarh High Court juvenile bail murder case में सामाजिक जांच रिपोर्ट सामान्य होने के बावजूद अपराध की प्रकृति को अधिक महत्व दिया गया।
केवल उम्र को आधार बनाकर राहत नहीं
बचाव पक्ष ने गरीबी, कम उम्र और आत्मरक्षा का हवाला दिया। लेकिन सरकारी पक्ष ने गवाहों के बयान और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पेश करते हुए कहा कि हमला गंभीर और सुनियोजित था।
अदालत ने साफ कहा कि हत्या जैसे मामलों में केवल उम्र को आधार बनाकर राहत नहीं दी जा सकती। न्याय प्रणाली को विवेकपूर्ण दृष्टिकोण अपनाना होगा।
सुधार बनाम सामाजिक सुरक्षा का संतुलन
कोर्ट ने माना कि जुवेनाइल कानून का मूल उद्देश्य पुनर्वास है। लेकिन हत्या जैसे अपराध सामाजिक संरचना को झकझोर देते हैं।
Chhattisgarh High Court juvenile bail murder case में अदालत ने कहा कि पीड़ित पक्ष के अधिकारों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसलिए सुधारवादी सोच और सामाजिक सुरक्षा के बीच संतुलन जरूरी है।
व्यापक प्रभाव और कानूनी संदेश
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह आदेश जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड्स के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगा। राज्य में बढ़ते किशोर अपराधों के संदर्भ में यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
साथ ही, अदालत ने यह भी संकेत दिया कि ऑब्जर्वेशन होम्स में सुधार कार्यक्रम और मनोवैज्ञानिक सहायता को मजबूत किया जाना चाहिए, ताकि सुधार की अवधारणा व्यवहार में भी दिखे।
Chhattisgarh High Court juvenile bail murder case यह स्पष्ट संदेश देता है कि जघन्य अपराधों में जमानत पर निर्णय करते समय अदालतें सतर्क रहेंगी। सुधार और न्याय — दोनों के बीच संतुलन ही न्याय प्रणाली की असली कसौटी है।
