बालोद जिले में इन दिनों Balod sugar mill cane payment को लेकर किसानों में चिंता और आक्रोश दोनों दिखाई दे रहे हैं। दंतेश्वरी मईया सहकारी शक्कर कारखाना में गन्ना बेचने वाले सैकड़ों किसानों को पिछले दो महीनों से भुगतान नहीं मिला है।
अब किसान अपनी मेहनत की कमाई पाने के लिए कलेक्ट्रेट का रुख कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि समय पर भुगतान नहीं होगा, तो अगली फसल की तैयारी कैसे होगी?
दिसंबर में शुरू हुई पेराई, फिर अटका भुगतान
जिले में दिसंबर से शक्कर कारखाना में गन्ने की पेराई शुरू हुई थी। उसी महीने किसानों को कुछ भुगतान किया गया। हालांकि, उसके बाद राशि की कमी के कारण Balod sugar mill cane payment रुक गया।
किसानों के अनुसार, उन्हें यह भी स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है कि शेष राशि कब तक मिलेगी। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ रहा है।
आंकड़े बताते हैं गंभीर स्थिति
शक्कर कारखाना प्रबंधन के अनुसार, 16 फरवरी तक केवल 3.68 करोड़ रुपए का ही भुगतान किया गया है।
- कुल 755 किसानों ने गन्ना बेचा है।
- बेचे गए गन्ने की कुल कीमत लगभग 11 करोड़ 93 लाख रुपए है।
- करीब 8 करोड़ रुपए का भुगतान अभी भी बाकी है।
इन आंकड़ों से साफ है कि Balod sugar mill cane payment का मुद्दा गंभीर हो चुका है।
किसानों की बढ़ती चिंता
गांवों से आए कई किसानों ने बताया कि गन्ना उत्पादन में लागत लगातार बढ़ रही है। खाद, बीज और मजदूरी पर खर्च पहले ही हो चुका है। ऐसे में भुगतान में देरी से परिवार की रोजमर्रा की जरूरतें भी प्रभावित हो रही हैं।
एक किसान ने कहा, “हमने समय पर गन्ना दिया, लेकिन अब भुगतान के लिए भटकना पड़ रहा है। अगर पैसा नहीं मिलेगा तो अगली फसल कैसे लगाएंगे?”
कलेक्ट्रेट पहुंच रहे किसान
भुगतान नहीं मिलने से परेशान किसान अब प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि Balod sugar mill cane payment में देरी से न केवल उनकी आर्थिक स्थिति डगमगा रही है, बल्कि भरोसा भी कमजोर हो रहा है।
किसानों को उम्मीद है कि जिला प्रशासन और कारखाना प्रबंधन जल्द ही समाधान निकालेंगे और बकाया राशि का भुगतान सुनिश्चित करेंगे।
निष्कर्ष
बालोद जिले में गन्ना भुगतान संकट केवल आर्थिक मुद्दा नहीं, बल्कि किसानों के जीवन से जुड़ा सवाल है। यदि Balod sugar mill cane payment जल्द नहीं सुलझा, तो इसका असर आने वाले सीजन पर भी पड़ सकता है। अब निगाहें प्रशासनिक पहल और कारखाना प्रबंधन के फैसले पर टिकी हैं।
