छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना में विवाद: कवर्धा में 272 जोड़ों के विवाह के दौरान दूल्हों को मालवाहक वाहन में लाने पर उठे सवाल

छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी Mukhyamantri Kanya Vivah Yojana एक बार फिर चर्चा में है। 10 फरवरी को प्रदेशभर में 6 हजार से ज्यादा कन्याओं का सामूहिक विवाह संपन्न कराया गया। सरकार की ओर से इसे सामाजिक समरसता और आर्थिक सहयोग की दिशा में बड़ा कदम बताया गया।

लेकिन अब Mukhyamantri Kanya Vivah Yojana controversy ने इस योजना की व्यवस्थाओं और संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कवर्धा से सामने आया एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने पूरे आयोजन की छवि पर असर डाला है।


कवर्धा में 272 जोड़ों का सामूहिक विवाह

कवर्धा जिले में कुल 272 जोड़ों का विवाह संपन्न कराया गया। योजना के तहत प्रत्येक कन्या के विवाह पर 50 हजार रुपए खर्च करने का प्रावधान है।

  • 35 हजार रुपए चेक के माध्यम से वधु को दिए जाते हैं
  • 7 हजार रुपए की उपहार सामग्री
  • 8 हजार रुपए आयोजन व्यवस्था पर खर्च

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए राहत का माध्यम है। लेकिन हालिया घटनाक्रम ने इसकी जमीनी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।


दूल्हों को मालवाहक वाहन में लाने पर विवाद

वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि दूल्हों को मालवाहक पिकअप वाहन में एक साथ बैठाकर मंडप तक लाया गया। चिलचिलाती धूप में इस तरह की व्यवस्था ने लोगों को असहज कर दिया।

सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि जब लाखों रुपए आयोजन पर खर्च किए जा रहे हैं, तो दूल्हों के लिए बस या कार जैसी समुचित व्यवस्था क्यों नहीं की गई।

यही दृश्य अब Mukhyamantri Kanya Vivah Yojana controversy का मुख्य कारण बन गया है।


कार्यक्रम में मौजूद थे जनप्रतिनिधि

कार्यक्रम में कवर्धा विधायक और प्रदेश के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा मौजूद रहे। उनके साथ पंडरिया विधायक भावना बोहरा सहित कई जनप्रतिनिधि भी शामिल हुए।

हालांकि, जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी के बावजूद परिवहन व्यवस्था को लेकर उठे सवाल थम नहीं रहे हैं।


आयोजन मद की राशि पर उठ रहे सवाल

सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि 272 जोड़ों के आयोजन में लाखों रुपए खर्च होने के बावजूद परिवहन के लिए मालवाहक वाहन का उपयोग क्यों किया गया।

आयोजन मद के 8 हजार रुपए प्रति जोड़ा आखिर किस व्यवस्था पर खर्च हुए?
क्या परिवहन सुविधा उसी मद का हिस्सा नहीं थी?

इन सवालों ने Mukhyamantri Kanya Vivah Yojana controversy को और गहरा कर दिया है।


विभागीय अधिकारी का बयान

इस मामले में जब विभाग के जिम्मेदार अधिकारी आनंद तिवारी से बात की गई, तो उन्होंने कैमरे के सामने बयान देने से इनकार कर दिया।

अनौपचारिक तौर पर उन्होंने सफाई दी कि योजना के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से दूल्हों को आधा किलोमीटर की दूरी से लाया गया। उन्होंने यह भी कहा कि पहले भी ऐसा किया गया है और दूल्हों की सहमति से ही उन्हें वाहन में बैठाया गया।

हालांकि, यह स्पष्टीकरण जनभावनाओं को पूरी तरह शांत नहीं कर सका है।


क्यों महत्वपूर्ण है यह विवाद?

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना जैसी सामाजिक योजनाएं केवल आर्थिक सहायता नहीं देतीं, बल्कि गरिमा और सम्मान का भी संदेश देती हैं।

ऐसे में यदि आयोजन की तस्वीरें संवेदनशीलता पर सवाल खड़े करें, तो यह सरकार और प्रशासन दोनों के लिए चिंतन का विषय बन जाता है।

Mukhyamantri Kanya Vivah Yojana controversy ने यह स्पष्ट कर दिया है कि योजनाओं की सफलता केवल बजट से नहीं, बल्कि जमीनी क्रियान्वयन और मानवीय दृष्टिकोण से तय होती है।


छत्तीसगढ़ की मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना का उद्देश्य सराहनीय है। हजारों परिवारों को इसका लाभ मिला है। लेकिन कवर्धा की घटना ने यह दिखाया कि व्यवस्थाओं में थोड़ी सी लापरवाही भी बड़ी बहस का कारण बन सकती है।

अब देखना होगा कि प्रशासन इस विवाद पर क्या कदम उठाता है और भविष्य में ऐसी स्थितियों से बचने के लिए क्या सुधार किए जाते हैं।

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