नया रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद के ऑडिटोरियम में ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव ने पत्रकारों से संवाद करते हुए प्रदेश की ऊर्जा यात्रा की नई तस्वीर पेश की। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि Chhattisgarh Energy Capacity Expansion केवल आंकड़ों की बात नहीं है, बल्कि यह प्रदेश की औद्योगिक प्रगति, ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भरता का आधार बन रही है।
30,671 मेगावाट की स्थापित क्षमता: मजबूत आधार
डॉ. यादव ने बताया कि वर्तमान में छत्तीसगढ़ की कुल स्थापित विद्युत क्षमता 30,671.7 मेगावाट है। इसमें:
- 28,824 मेगावाट ताप विद्युत
- 220 मेगावाट जल विद्युत
- 2,047 मेगावाट सोलर, बायोमास सहित अन्य नवीकरणीय स्रोत
ताप विद्युत क्षेत्र में छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर जनरेशन कंपनी की 2,840 मेगावाट क्षमता है, जबकि एनटीपीसी एवं निजी उत्पादकों की 20,299 मेगावाट और कैप्टिव पावर प्लांट्स की 5,266 मेगावाट क्षमता शामिल है।
स्पष्ट है कि Chhattisgarh Energy Capacity Expansion के तहत राज्य ने पारंपरिक ऊर्जा के साथ नवीकरणीय स्रोतों पर भी समान ध्यान दिया है।
2030 तक नेट जीरो लक्ष्य की दिशा में कदम
भारत सरकार के नेट जीरो कार्बन लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2030 तक 500 गीगावॉट अक्षय ऊर्जा विकसित करने का राष्ट्रीय लक्ष्य रखा गया है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ सरकार ने 2023 में पंप स्टोरेज नीति लागू की।
- 8,300 मेगावाट क्षमता के 6 पंप स्टोरेज स्थलों का चिन्हांकन
- 5 परियोजनाओं की फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार
- निजी क्षेत्र में 5,000 मेगावाट क्षमता पर कार्य जारी
यह पहल न केवल ग्रिड संतुलन बनाएगी, बल्कि Chhattisgarh Energy Capacity Expansion को टिकाऊ दिशा भी देगी।
32,100 मेगावाट नई परियोजनाओं पर एमओयू
प्रदेश को ऊर्जा राजधानी बनाने के लिए 32,100 मेगावाट क्षमता की नई परियोजनाओं हेतु विभिन्न संस्थाओं के साथ एमओयू किए गए हैं। इनमें शामिल हैं:
- 12,100 मेगावाट ताप विद्युत
- 4,200 मेगावाट न्यूक्लियर
- 2,500 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर
- 13,300 मेगावाट पंप स्टोरेज
इन परियोजनाओं से लगभग 3.4 लाख करोड़ रुपये के निवेश का मार्ग प्रशस्त हुआ है। इससे प्रदेश में रोजगार, उद्योग और आधारभूत संरचना को नई गति मिलेगी।
कोरबा और मड़वा में सुपर क्रिटिकल इकाइयाँ
छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर जनरेशन कंपनी द्वारा:
- कोरबा पश्चिम में 660-660 मेगावाट की दो सुपर क्रिटिकल इकाइयाँ
- मड़वा में 800 मेगावाट की नई इकाई
स्थापित करने की दिशा में कार्य प्रगति पर है। यह Chhattisgarh Energy Capacity Expansion की आधारशिला को और मजबूत करेगा।
पारेषण और डिजिटल नेटवर्क में बड़ा सुधार
दिसंबर 2023 से जनवरी 2026 के बीच:
- उपकेन्द्रों की संख्या 132 से बढ़कर 137
- 5,200 किमी ऑप्टिकल फाइबर ग्राउंड वायर इंस्टॉलेशन
- 131 उपकेन्द्र डिजिटल संचार नेटवर्क से जुड़े
इसके साथ ही 132 केवी लाइनों में उच्च क्षमता वाले एचटीएलएस कंडक्टर लगाए जा रहे हैं।
65 लाख से अधिक उपभोक्ता, जनहितकारी योजनाओं का लाभ
प्रदेश में अब 65 लाख से अधिक बिजली उपभोक्ता हैं। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना, पीएम कुसुम योजना, डॉ. खूबचंद बघेल किसान विद्युत सहायता योजना और बीपीएल उपभोक्ताओं को मुफ्त बिजली जैसी योजनाओं से लाखों परिवार लाभान्वित हो रहे हैं।
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में “नियद नेल्ला नार योजना” के तहत सैकड़ों गांवों तक बिजली पहुंचाई गई है, जिससे अंधेरे में डूबे इलाकों में विकास की नई रोशनी आई है।
क्रेडा की उल्लेखनीय उपलब्धियां
पिछले दो वर्षों में:
- 26,794 सोलर सिंचाई पंप
- 7,833 सोलर पेयजल पंप
- 1,709 सोलर हाईमास्ट
स्थापित किए गए हैं। साथ ही ऑफग्रिड सोलर प्लांट और रूफटॉप सोलर संयंत्रों के विस्तार की योजना पर तेजी से काम चल रहा है।
ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़
डॉ. रोहित यादव ने स्पष्ट किया कि संतुलित ऊर्जा मिश्रण, तकनीकी आधुनिकीकरण और नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार के जरिए छत्तीसगढ़ को आत्मनिर्भर और अग्रणी राज्य बनाया जाएगा।
Chhattisgarh Energy Capacity Expansion केवल उत्पादन बढ़ाने की योजना नहीं, बल्कि आने वाले 10-15 वर्षों के औद्योगिक और सामाजिक विकास की नींव है।
ऊर्जा क्षेत्र में यह व्यापक कार्ययोजना निश्चित रूप से छत्तीसगढ़ को देश की ऊर्जा राजधानी के रूप में स्थापित करने की दिशा में निर्णायक साबित होगी।
