बेमेतरा हिंसा में पिता-पुत्र हत्याकांड के 17 आरोपी बरी, पीड़िता बोलीं– ‘न्याय की उम्मीद टूटी’

छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के बिरनपुर गांव में वर्ष 2023 में हुई सांप्रदायिक हिंसा का मामला एक बार फिर चर्चा में है। Bemetara communal violence verdict में सत्र न्यायालय ने पिता-पुत्र की हत्या के आरोप में गिरफ्तार सभी 17 आरोपियों को बरी कर दिया है।

फैसले के बाद पीड़िता आलम बी ने कहा कि यह निर्णय उनकी “न्याय की उम्मीद पर गहरा आघात” है।


2023 की हिंसा और दोहरी हत्या

8 अप्रैल 2023 को दो समुदायों के नाबालिगों के बीच झड़प हुई, जिसने बाद में सांप्रदायिक हिंसा का रूप ले लिया। इसी दौरान 22 वर्षीय भुनेश्वर साहू की हत्या की खबर सामने आई, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया।

10 अप्रैल को विश्व हिंदू परिषद ने बंद का आह्वान किया। उस समय विपक्ष में रही भाजपा ने तत्कालीन कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाए।

11 अप्रैल को भारी पुलिस मौजूदगी के बावजूद आलम बी के पति रहीम उम्मद मोहम्मद (55) और बेटे इदुल मोहम्मद (35) के शव बरामद हुए। आरोप था कि दोनों को भीड़ ने उस समय पीट-पीटकर मार डाला, जब वे बकरियां चराने ले जा रहे थे।


‘हमारी 100 बकरियां भी चली गईं’

आलम बी कहती हैं,
“मैं गांव से बाहर थी, तभी खबर मिली कि भीड़ ने मेरे पति और बेटे को मार डाला। हमारी करीब 100 बकरियां भी गायब हो गईं या लूट ली गईं। तीन साल से खेत में धान और चना बोने वाला कोई नहीं है।”

Bemetara communal violence verdict के बाद उनका कहना है कि अब परिवार पूरी तरह टूट चुका है।


आर्थिक संकट और सरकारी सहायता

परिवार अब राज्य सरकार की ‘महतारी वंदन योजना’ के तहत मिलने वाली ₹1,000 मासिक सहायता पर निर्भर है।

इदुल की पत्नी शकीला बानो और उनका नौ वर्षीय बेटा पास के घर में रहते हैं। शकीला दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार चलाने की कोशिश करती हैं। अधिकांश खर्च समुदाय के लोगों की मदद से पूरे हो रहे हैं।


6 एफआईआर, 17 गिरफ्तार, फिर बरी

हिंसा के बाद कुल छह एफआईआर दर्ज हुई थीं। दोहरे हत्याकांड की जांच में 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया था।

हालांकि, हालिया Bemetara communal violence verdict में सत्र न्यायालय ने सबूतों के अभाव में सभी आरोपियों को बरी कर दिया।


राजनीतिक असर और सीबीआई जांच

बाद में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। भुनेश्वर साहू के पिता ईश्वर साहू को साजा विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया गया। उन्होंने कांग्रेस नेता रविंद्र चौबे को हराकर जीत दर्ज की।

सरकार बनने के बाद अप्रैल 2024 में भुनेश्वर साहू हत्याकांड को सीबीआई को सौंप दिया गया। मामला वर्तमान में रायपुर स्थित सीबीआई अदालत में विचाराधीन है।


‘सिस्टम पर भरोसा नहीं’

रहीम के बड़े भाई शाह मोहम्मद का कहना है कि आलम बी को अब तक कोई मुआवजा नहीं मिला।

उनका आरोप है कि पुलिस आरोपियों को सजा दिलाने में विफल रही। वे कहते हैं,
“भुनेश्वर के पिता विधायक बने, उनका केस सीबीआई को गया। हमारे लिए क्या हुआ?”

परिवार का कहना है कि अब उन्हें “सिस्टम पर भरोसा” नहीं बचा।


Bemetara communal violence verdict ने एक बार फिर उस घटना की पीड़ा को ताजा कर दिया है, जिसने एक परिवार की दुनिया उजाड़ दी।

न्यायालय का फैसला कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन पीड़ित परिवार के लिए यह न्याय की राह को और कठिन बना गया है।

आने वाले समय में यह मामला सामाजिक और राजनीतिक दोनों स्तर पर चर्चा का विषय बना रहेगा।

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