1.80 लाख से बना कूप, सिंचाई मजबूत हुई और किसानों की आय बढ़ी

ग्रामीण विकास और जल संरक्षण एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। जब गांव में पानी की स्थायी व्यवस्था होती है, तब खेती सुरक्षित होती है, आजीविका मजबूत होती है और परिवारों का जीवन स्तर सुधरता है। इसी दिशा में Shaktigat Koop Construction Chiraula एक प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आया है।

मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिला के ग्राम पंचायत चिड़ौला में शक्तिगत कूप निर्माण कार्य ने न केवल एक किसान, बल्कि पूरे गांव की तस्वीर बदल दी है।


1.80 लाख की लागत से बना स्थायी जल स्रोत

ग्राम पंचायत चिड़ौला में किसान जयबहादुर सिंह के लिए शक्तिगत कूप निर्माण स्वीकृत किया गया। इस कार्य के लिए शासन द्वारा 1.80 लाख रुपये की राशि प्रदान की गई।

Shaktigat Koop Construction Chiraula का उद्देश्य किसानों को स्थायी जल स्रोत उपलब्ध कराना और जल संरक्षण को बढ़ावा देना था।


पहले वर्षा पर निर्भर थी खेती

कूप निर्माण से पहले जयबहादुर सिंह सहित आसपास के किसान पूरी तरह वर्षा पर निर्भर थे। बारिश कम होने पर फसल प्रभावित होती थी।

समय पर सिंचाई न होने से उत्पादन घटता था और आय अनिश्चित रहती थी। किसान अक्सर जोखिम में खेती करते थे।


अब नियमित सिंचाई, बढ़ा उत्पादन

लेकिन Shaktigat Koop Construction Chiraula के बाद स्थिति बदल गई।

अब खेतों तक नियमित पानी पहुंच रहा है। फसलों की समय पर सिंचाई संभव हो रही है। परिणामस्वरूप:

  • कृषि उत्पादन में वृद्धि हुई
  • किसानों की आय में सुधार हुआ
  • समय पर बुवाई संभव हुई
  • दोहरी फसल लेने की संभावनाएं बढ़ीं

यह कूप केवल एक परिवार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा बना।


जल संरक्षण से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत

शक्तिगत कूप के निर्माण से भूजल स्तर संरक्षण को भी बढ़ावा मिला है। जल का समुचित उपयोग सुनिश्चित हुआ है।

साथ ही, खेती की लागत में कमी आई है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिली है।

Shaktigat Koop Construction Chiraula ने यह साबित किया है कि छोटे लेकिन प्रभावी कदम गांवों में स्थायी विकास की मजबूत नींव रख सकते हैं।


ग्रामीणों ने जताया आभार

गांव के लोगों ने शासन की इस जनहितकारी पहल के प्रति आभार व्यक्त किया। उनका कहना है कि इस प्रकार की योजनाएं गांवों की तस्वीर और तकदीर दोनों बदलने की क्षमता रखती हैं।

1.80 लाख रुपये की लागत से पूर्ण हुआ यह कूप अब आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन चुका है।


सतत विकास की दिशा में मजबूत कदम

ग्रामीण विकास, जल संरक्षण और कृषि सशक्तिकरण—इन तीनों को जोड़ता हुआ Shaktigat Koop Construction Chiraula एक सफल और अनुकरणीय उदाहरण है।

यह पहल दर्शाती है कि जब योजनाएं जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू होती हैं, तो उनका लाभ सीधे किसानों तक पहुंचता है और गांवों में स्थायी परिवर्तन संभव होता है।

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