प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) को लेकर 18 फरवरी को प्रकाशित खबर के बाद प्रशासन हरकत में आया। जिला स्तरीय जांच दल ने विस्तृत भौतिक सत्यापन किया। अब सामने आई PMAY-G Chhattisgarh investigation report में कई दावे भ्रामक और अपूर्ण जानकारी पर आधारित पाए गए हैं।
उपायुक्त, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), छत्तीसगढ़ ने स्पष्ट किया है कि अधिकांश मामलों में भुगतान नियमानुसार हुआ है और निर्माण कार्य प्रगति पर है। साथ ही, योजना की मॉनिटरिंग जियो-टैगिंग और ऑनलाइन सिस्टम के जरिए की जा रही है।
महासमुंद: 12 हजार किश्त अटकी होने का दावा गलत
खबर में जनपद पंचायत बागबाहरा में 12,366 हितग्राहियों की दूसरी किश्त अटकी होने और केवल 25 हजार रुपये पहली किश्त दिए जाने का दावा किया गया था।
हालांकि, PMAY-G Chhattisgarh investigation report के अनुसार वास्तविक स्थिति अलग है। योजना प्रारंभ होने से अब तक बागबाहरा जनपद में 22,910 आवास स्वीकृत हुए हैं।
- 19,411 मकान पूर्ण हो चुके हैं।
- 3,499 आवास निर्माणाधीन हैं।
प्रशासन का कहना है कि किश्तों का भुगतान निर्माण की प्रगति के अनुसार चरणबद्ध तरीके से किया जाता है। इसलिए “किश्त अटकी” होने का दावा तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है।
गरियाबंद: जिन्हें अधूरा बताया, वे निर्माणाधीन
ग्राम तुहामेटा का मामला
प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत वर्ष 2023-24 में स्वीकृत आवास में दो किश्तों में एक लाख रुपये जारी किए जा चुके हैं। जांच में पाया गया कि छत ढलाई का कार्य पूरा हो चुका है।
हितग्राही श्रीमती झूलबती के निधन के बाद उनके पति श्री पीलाराम को उत्तराधिकारी के रूप में पोर्टल में दर्ज किया गया है। मामला पीएफएमएस में प्रक्रियाधीन है।
अडगडी और जाड़ापदर में स्थिति स्पष्ट
- ग्राम पंचायत अडगडी में सुगारो के नाम से वर्ष 2024-25 में आवास स्वीकृत है। 40 हजार रुपये की पहली किश्त जारी हो चुकी है। मकान प्लिंथ स्तर तक बन चुका है और दूसरी किश्त के लिए जियो-टैगिंग पूरी हो चुकी है।
- ग्राम पंचायत जाड़ापदर में खेतुराम बंजारा के नाम से स्वीकृत आवास में दो किश्तों में 95 हजार रुपये जमा किए जा चुके हैं। मकान चौखट स्तर तक तैयार है।
जांच में फर्जी भुगतान का आरोप सही नहीं पाया गया।
मनरेगा भुगतान में गड़बड़ी नहीं
फिंगेश्वर ब्लॉक के लफंदी गांव में मनरेगा मजदूरी में 4 लाख रुपये की कथित गड़बड़ी की शिकायत की भी जांच की गई।
मस्टररोल, मांगपत्र और सहमति पत्रों की गहन जांच के बाद प्रशासन ने स्पष्ट किया कि श्रमिकों को नियमानुसार भुगतान हुआ है। किसी भी वित्तीय अनियमितता का प्रमाण नहीं मिला।
सामूहिक गृह प्रवेश पर भी स्थिति स्पष्ट
गरियाबंद जिले के मैनपुर जनपद में 3817 घरों को कागजों में पूर्ण दर्शाने और सामूहिक गृह प्रवेश कराने के आरोपों की भी जांच की गई।
PMAY-G Chhattisgarh investigation report के अनुसार जिन आवासों को पूर्ण दर्शाया गया है, वे निर्धारित मानकों के अनुरूप विभिन्न स्तरों पर पूर्ण पाए गए।
निर्माण कार्य की निगरानी जियो-टैगिंग और ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम से की जा रही है, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित होती है।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर
उपायुक्त, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), छत्तीसगढ़ ने बताया कि भुगतान सीधे लाभार्थियों के खातों में ऑनलाइन माध्यम से किया जाता है।
निर्माण की प्रगति जियो-टैगिंग के माध्यम से ट्रैक होती है। शिकायत मिलने पर तत्काल जांच कर कार्रवाई की जाती है।
प्रशासन का कहना है कि प्रकाशित खबर के कई बिंदु अपूर्ण तथ्यों पर आधारित थे, जिससे आमजन में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो सकती थी।
योजना का मूल उद्देश्य
प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) का उद्देश्य पात्र परिवारों को सुरक्षित और पक्की छत उपलब्ध कराना है।
जब किसी ग्रामीण परिवार के सिर पर मजबूत छत बनती है, तो वह केवल ईंट और सीमेंट का ढांचा नहीं होता, बल्कि सुरक्षा, सम्मान और स्थायित्व का प्रतीक होता है।
इसी उद्देश्य के साथ योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है और हर स्तर पर पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित की जा रही है।
स्पष्ट है कि PMAY-G Chhattisgarh investigation report में अधिकांश आरोपों को तथ्यों के आधार पर खारिज किया गया है।
निर्माण कार्य जारी है, भुगतान प्रगति के अनुसार हो रहा है और मॉनिटरिंग डिजिटल माध्यम से की जा रही है।
प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बनाए रखते हुए पात्र हितग्राहियों को समय पर लाभ पहुंचाया जाएगा।
