CG RTE Admission Policy Controversy को लेकर छत्तीसगढ़ में सियासी हलचल तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस सचिव अय्यूब खान ने राज्य सरकार के उस निर्णय का विरोध किया है, जिसमें आरटीई (Right to Education) के अंतर्गत अब नर्सरी, केजी-1 और केजी-2 कक्षाओं में प्रवेश बंद कर केवल कक्षा 1 से एडमिशन देने का प्रावधान किया गया है।
कांग्रेस का कहना है कि यह फैसला गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों के भविष्य के साथ अन्याय है।
क्या है पूरा मामला?
अब तक आरटीई के तहत निजी स्कूलों में नर्सरी, केजी-1 और केजी-2 में भी प्रवेश दिया जाता था। इससे हजारों जरूरतमंद बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा का अवसर मिलता रहा है।
हालांकि, नई व्यवस्था के अनुसार 16 फरवरी को खुले आरटीई पोर्टल में केवल कक्षा 1 से प्रवेश का विकल्प दिखाई दे रहा है।
इसी बदलाव को लेकर CG RTE Admission Policy Controversy गहराती जा रही है।
कांग्रेस का आरोप: शिक्षा के अधिकार की भावना के विपरीत फैसला
अय्यूब खान ने कहा कि यह निर्णय शिक्षा के अधिकार की मूल भावना के खिलाफ है। आरटीई का उद्देश्य हर बच्चे को समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है, लेकिन नर्सरी और केजी स्तर पर प्रवेश बंद करना इस उद्देश्य को कमजोर करता है।
उनका कहना है कि प्रारंभिक शिक्षा ही बच्चे की नींव होती है। यदि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को शुरुआत से अवसर नहीं मिलेगा, तो वे आगे की प्रतिस्पर्धा में पीछे रह जाएंगे।
निजी प्ले स्कूलों को फायदा पहुंचाने का आरोप
कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार का यह कदम निजी प्ले स्कूलों और नर्सरी संस्थानों को लाभ पहुंचाने वाला प्रतीत होता है।
CG RTE Admission Policy Controversy के बीच कांग्रेस ने मांग की है कि:
- नर्सरी, केजी-1 और केजी-2 में आरटीई प्रवेश तत्काल बहाल किया जाए।
- आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के शिक्षा अधिकार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
- शिक्षा नीति में पारदर्शिता और समान अवसर की गारंटी दी जाए।
सरकार से पुनर्विचार की मांग
कांग्रेस ने राज्य सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की अपील की है। पार्टी का कहना है कि यदि फैसला वापस नहीं लिया गया, तो अभिभावकों और शिक्षा से जुड़े लोगों के साथ लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
CG RTE Admission Policy Controversy अब केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि हजारों परिवारों की चिंता का विषय बन चुका है।
अभिभावकों में बढ़ी चिंता
कई अभिभावकों का मानना है कि यदि बच्चों को प्रारंभिक स्तर पर निजी स्कूलों में पढ़ने का अवसर नहीं मिलेगा, तो उनकी शैक्षणिक प्रगति प्रभावित हो सकती है।
प्रारंभिक शिक्षा में समान अवसर देना ही आरटीई की आत्मा है। ऐसे में नीति में बदलाव से समाज के कमजोर वर्ग पर सीधा असर पड़ सकता है।
CG RTE Admission Policy Controversy छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। एक ओर सरकार नीति परिवर्तन को प्रशासनिक निर्णय बता सकती है, वहीं विपक्ष इसे गरीबों के अधिकारों पर प्रहार बता रहा है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या राज्य सरकार इस फैसले पर पुनर्विचार करेगी या फिर यह मुद्दा आने वाले दिनों में और बड़ा राजनीतिक आंदोलन बन जाएगा।
