मां की मांग—नाबालिग ड्राइवर पर वयस्क की तरह मुकदमा चले, पिता पर सख्त कार्रवाई हो

Sahil Dhaneshra accident case में नया मोड़ आ गया है। अपने बेटे की मौत से टूट चुकी मां इन्ना मकान ने मांग की है कि हादसे में शामिल नाबालिग ड्राइवर पर वयस्क की तरह मुकदमा चलाया जाए। साथ ही, उन्होंने उसके पिता के खिलाफ भी कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है, जिन्होंने कथित रूप से नाबालिग को गाड़ी चलाने दी।


मां ने कहा—अब अदालत जाऊंगी

इन्ना मकान ने कहा कि वह FIR को चुनौती देंगी और उसमें कड़ी धाराएं जोड़ने की अपील करेंगी। उन्होंने बताया कि वह पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही थीं और अब जल्द ही अदालत का दरवाजा खटखटाएंगी।

Sahil Dhaneshra accident case में उनकी मांग है कि न्याय केवल औपचारिकता न हो, बल्कि एक मिसाल बने।


पिता ने जताया अफसोस

नाबालिग के पिता के खिलाफ पुलिस ने FIR दर्ज की है। उन्होंने मीडिया से कहा कि उन्हें हादसे का “अफसोस” है और वह “खेद व्यक्त” करते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी दावा किया कि हादसे वाले दिन वह दिल्ली में मौजूद नहीं थे।

फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और कानूनी प्रक्रिया जारी है।


2016 के सिविल लाइंस केस की याद

यह मामला 2016 के सिविल लाइंस हादसे की याद दिलाता है, जब एक 17 वर्षीय युवक ने तेज रफ्तार मर्सिडीज से सिद्धार्थ शर्मा (32) को कुचल दिया था। उस घटना ने भी नाबालिगों को महंगी गाड़ियां देने और अभिभावकों की जिम्मेदारी पर राष्ट्रीय बहस छेड़ दी थी।

अब Sahil Dhaneshra accident case ने फिर वही सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या माता-पिता की जवाबदेही तय होनी चाहिए?


एक मां का सूना घर

कानूनी लड़ाई अपनी जगह है, लेकिन इन्ना का व्यक्तिगत दर्द शब्दों में बयान करना मुश्किल है। द्वारका स्थित उनके घर में अब सन्नाटा पसरा है।

वह अपने बेटे साहिल द्वारा बचपन में बनाए गए दो ग्रीटिंग कार्ड्स को संभाल कर रखती हैं। एक कार्ड उसने तब बनाया था जब वह अस्पताल से घर लौटी थीं। दूसरे कार्ड पर सिर्फ दो शब्द लिखे थे—“Sorry Mamma”।

यही यादें अब उनके जीने का सहारा हैं।


सपनों से भरा था साहिल

दोस्तों के मुताबिक, साहिल एक खुशमिजाज और महत्वाकांक्षी युवक था। वह अक्सर प्रेरणादायक वीडियो देखता और बड़े सपने संजोता था। उसके लैपटॉप की वॉलपेपर पर एक स्पोर्ट्स कार और आलीशान घर की तस्वीर थी—उसके सपनों का प्रतीक।

उसे मैनचेस्टर की एक प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी में दाखिला मिल चुका था। इस सितंबर वह मास्टर्स की पढ़ाई के लिए यूके जाने वाला था।


मेहनत से खरीदी थी बाइक

हादसे में शामिल उसकी मोटरसाइकिल उसने खुद की कमाई से खरीदी थी। बीमा क्षेत्र में पार्ट-टाइम काम और अपने चचेरे भाई के साथ छोटे कारोबार से उसने 11 महीने पहले बाइक फाइनेंस की थी।

इन्ना बताती हैं कि साहिल अक्सर उन्हें ऑफिस छोड़ने जाता था। “वो छोटी-सी सवारी ही हमारे व्यस्त जीवन में साथ बिताया गया समय होता था,” उन्होंने कहा।


न्याय की उम्मीद

Sahil Dhaneshra accident case अब सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं रह गया है। यह अभिभावकों की जिम्मेदारी, कानून की सख्ती और न्याय की उम्मीद का प्रतीक बन गया है।

इन्ना की लड़ाई सिर्फ अपने बेटे के लिए नहीं, बल्कि उन सभी परिवारों के लिए है जो लापरवाही की कीमत अपनी जान देकर चुकाते हैं। अब सबकी नजर अदालत और जांच एजेंसियों पर है।

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