पोटाकेबिन स्कूलों में शुरू हुई एआई आधारित शिक्षा, वनांचल के बच्चे बनेंगे फ्यूचर रेडी

सुकमा। नक्सल प्रभावित और वनांचल क्षेत्र के रूप में पहचाने जाने वाले सुकमा जिले ने अब शिक्षा के क्षेत्र में एक नई पहचान बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। AI Based Education in Sukma के तहत पोटाकेबिन (आवासीय विद्यालयों) में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित शिक्षण की शुरुआत की गई है।

यह पहल मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के ‘सशक्त छत्तीसगढ़’ विजन के अनुरूप जिला प्रशासन द्वारा लागू की गई है। इसका उद्देश्य वनांचल के विद्यार्थियों को डिजिटल युग की मुख्यधारा से जोड़ना है।


लाइवलीहुड कॉलेज से हुई पहल की शुरुआत

AI Based Education in Sukma अभियान का शुभारंभ कलेक्टर के मार्गदर्शन में लाइवलीहुड कॉलेज, सुकमा से किया गया। यहां आयोजित विशेष कार्यशाला में पोटाकेबिन विद्यालयों के शिक्षकों को अत्याधुनिक एआई टूल्स का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।

प्रशासन का स्पष्ट मानना है कि जब शिक्षक तकनीकी रूप से सशक्त होंगे, तभी विद्यार्थी भविष्य की चुनौतियों का सामना कर सकेंगे।


स्मार्ट लर्निंग से बदलेगी पढ़ाई की तस्वीर

कलेक्टर अमित कुमार ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को ‘फ्यूचर रेडी’ बनाना है।

पोटाकेबिन विद्यालयों में अब स्मार्ट लर्निंग मॉडल और स्मार्ट प्रोजेक्टर के माध्यम से गणित और विज्ञान जैसे विषयों को सरल एवं रोचक तरीके से पढ़ाया जाएगा।

AI Based Education in Sukma के माध्यम से बच्चों में कोडिंग, तार्किक चिंतन और समस्या समाधान की क्षमता विकसित की जाएगी। इससे वे डिजिटल कौशल से लैस होकर वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार होंगे।


वनांचल से डिजिटल मुख्यधारा तक

अब तक महानगरों में उपलब्ध उन्नत शैक्षणिक संसाधन दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों के लिए केवल कल्पना थे। लेकिन AI Based Education in Sukma ने इस दूरी को कम कर दिया है।

अब सुदूर अंचलों के विद्यार्थी भी एआई आधारित शिक्षा का लाभ निःशुल्क प्राप्त करेंगे। यह पहल शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में एक ठोस कदम है।


सुकमा बनेगा शिक्षा नवाचार मॉडल

जिला प्रशासन का विश्वास है कि AI Based Education in Sukma आने वाले समय में सुकमा को शिक्षा के नवाचार मॉडल के रूप में स्थापित करेगा।

यह पहल न केवल विद्यार्थियों के शैक्षणिक स्तर को ऊंचा उठाएगी, बल्कि उनके आत्मविश्वास और भविष्य की संभावनाओं को भी मजबूत करेगी।

स्पष्ट है कि सुकमा अब केवल चुनौतियों के लिए नहीं, बल्कि शिक्षा में नवाचार के लिए भी जाना जाएगा।

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