बैकुंठपुर। मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai meets Dr Nirmal Ghosh के अवसर पर आज बैकुंठपुर में एक भावनात्मक और प्रेरणादायी मुलाकात देखने को मिली। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 92 वर्षीय लोकतंत्र सेनानी डॉ. निर्मल घोष के निवास पहुंचे और उनसे सौजन्य भेंट कर उनका कुशलक्षेम जाना।
मुख्यमंत्री ने शॉल और श्रीफल भेंट कर डॉ. घोष का सम्मान किया। इसके बाद उन्होंने परिजनों के साथ आत्मीय चर्चा भी की।
संघर्ष और राष्ट्रप्रेम को बताया प्रेरणा
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि डॉ. निर्मल घोष का संघर्ष, राष्ट्रप्रेम और जीवटता आज भी समाज के लिए प्रेरणादायी है।
उन्होंने कहा, “इस आयु में भी उनकी स्मरण शक्ति और ज्ञान हम सभी के लिए अनुकरणीय है। लोकतंत्र सेनानी से मिलना और उनका आशीर्वाद प्राप्त करना मेरे लिए सौभाग्य की बात है।”
स्पष्ट है कि Vishnu Deo Sai meets Dr Nirmal Ghosh केवल एक औपचारिक भेंट नहीं थी, बल्कि यह लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति सम्मान का प्रतीक भी थी।
आपातकाल की यादें हुईं साझा
मुलाकात के दौरान डॉ. निर्मल घोष ने वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल के दौर की स्मृतियां साझा कीं। उन्होंने बताया कि आपातकाल के समय उन्हें लगभग 19 माह तक विभिन्न जेलों में निरुद्ध रखा गया था।
उनके अनुभवों को सुनते समय वातावरण गंभीर और भावुक हो उठा। यह संवाद आने वाली पीढ़ियों को लोकतंत्र की रक्षा के महत्व का संदेश देता है।
छात्र जीवन से जनसेवा तक का सफर
डॉ. घोष ने अपने छात्र जीवन की यादें भी साझा कीं। उन्होंने मिशन स्कूल, माधव राव सप्रे स्कूल और नागपुर में अध्ययन किया। वर्ष 1955 में उन्होंने आयुर्वेदिक कॉलेज में प्रवेश लिया और सागर विश्वविद्यालय से बीएमएस की डिग्री प्राप्त की।
सरकारी सेवा के बजाय उन्होंने वर्ष 1960 में बैकुंठपुर में निजी चिकित्सालय प्रारंभ किया। इसके बाद उन्होंने लंबे समय तक जनसेवा की।
इस प्रकार Vishnu Deo Sai meets Dr Nirmal Ghosh की यह मुलाकात एक चिकित्सक, समाजसेवी और लोकतंत्र सेनानी के बहुआयामी जीवन को सामने लेकर आई।
मंत्रीगण भी रहे उपस्थित
इस अवसर पर कृषि मंत्री राम विचार नेताम, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल तथा भइया लाल राजवाड़े सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
लोकतांत्रिक मूल्यों के सम्मान का संदेश
निस्संदेह, Vishnu Deo Sai meets Dr Nirmal Ghosh की यह मुलाकात केवल शिष्टाचार नहीं थी। यह लोकतंत्र की रक्षा में संघर्ष करने वाले सेनानियों के प्रति कृतज्ञता और सम्मान का प्रतीक है।
ऐसी प्रेरणादायी मुलाकातें समाज को यह याद दिलाती हैं कि लोकतंत्र केवल व्यवस्था नहीं, बल्कि त्याग, साहस और समर्पण से सशक्त हुआ मूल्य है।
