कभी जहां सन्नाटा शाम ढलने से पहले गांव को दरवाजों के भीतर कैद कर देता था, आज वहीं मैदान में चौके-छक्कों की गूंज सुनाई दे रही है। Sukma Bastar Cricket Tournament 2026 ने नक्सल प्रभावित बस्तर की तस्वीर बदलने की एक नई कहानी लिखी है।
सुकमा जिले के अंदरूनी इलाकों में आयोजित बस्तर पंडुम खेल महोत्सव के तहत यह क्रिकेट प्रतियोगिता बुरकापाल शहीदों की स्मृति में आयोजित की गई।
जब IED के साये में था यह इलाका
एक समय था जब यह क्षेत्र बारूदी सुरंगों और घात लगाकर किए जाने वाले हमलों के लिए जाना जाता था।
सुकमा और आसपास के इलाकों में नक्सली हिंसा ने विकास कार्यों को पूरी तरह रोक दिया था। सड़क, बिजली, पानी और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं भी प्रभावित थीं।
लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। सुरक्षा बलों की सख्ती, प्रशासनिक पहल और स्थानीय समुदाय के सहयोग से शांति का माहौल बन रहा है।
बुरकापाल शहीदों की स्मृति में आयोजन
यह Sukma Bastar Cricket Tournament 2026 केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की 74वीं बटालियन के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ।
कमांडेंट हिमांशु पांडेय के नेतृत्व में आयोजित इस टूर्नामेंट में दूरस्थ और भीतरी इलाकों की चार टीमों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
मैदान में उतरते समय खिलाड़ियों के चेहरे पर आत्मविश्वास और गर्व साफ झलक रहा था। कई युवाओं ने कहा कि यह उनके जीवन का पहला अवसर है जब उन्हें संगठित रूप से खेलने और अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिला।
खिलाड़ियों को मिली जर्सी और खेल सामग्री
CRPF 74वीं बटालियन ने सभी टीमों को खेल सामग्री और क्रिकेट जर्सी उपलब्ध कराई।
स्थानीय लोगों के अनुसार, यहां खेले गए मुकाबले भारत-पाकिस्तान मैच से कम रोमांचक नहीं थे। दर्शकों की संख्या भले कम रही, लेकिन तालियों की गूंज ने खिलाड़ियों का उत्साह दोगुना कर दिया।
दो मिनट का मौन, शहीदों को श्रद्धांजलि
टूर्नामेंट का आयोजन बुरकापाल के शहीद जवानों की स्मृति में किया गया।
बुरकापाल में 24 अप्रैल 2017 को CRPF की 74वीं बटालियन के 25 जवान नक्सलियों के घात लगाकर किए गए हमले में शहीद हुए थे।
उद्घाटन समारोह में सैनिकों, ग्रामीणों और युवाओं ने दो मिनट का मौन रखकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। यह संदेश स्पष्ट था—आज बस्तर में दिख रही शांति सुरक्षा बलों के बलिदान की देन है।

बदलाव की नई शुरुआत
Sukma Bastar Cricket Tournament 2026 केवल एक खेल आयोजन नहीं, बल्कि बदलाव का प्रतीक बनकर उभरा है।
नागरम और आसपास के क्षेत्रों में अब आत्मसमर्पण नीति, पुनर्वास योजना और विश्वास निर्माण अभियानों का सकारात्मक असर दिख रहा है। युवा अब हथियार नहीं, बल्कि क्रिकेट बैट थाम रहे हैं।
CRPF की 74वीं बटालियन केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य शिविर, शिक्षा सहायता और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए भी विश्वास कायम कर रही है।
भविष्य की ओर बढ़ता बस्तर
आज जब बस्तर के मैदान में चौके-छक्के गूंजते हैं, तो यह केवल खेल नहीं होता, बल्कि शांति और उम्मीद की आवाज होती है।
Sukma Bastar Cricket Tournament 2026 ने यह साबित कर दिया है कि बदलाव संभव है।
जब युवा हथियारों की जगह खेल को अपनाते हैं, तो भविष्य सुरक्षित और उज्ज्वल नजर आता है।
