रायपुर, 14 फरवरी 2026।
Subhadra Kumari Chauhan Punyatithi 2026 के अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और प्रख्यात कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि सुभद्रा जी का जीवन और साहित्य आज भी राष्ट्रभक्ति, साहस और महिला सशक्तिकरण का सशक्त संदेश देता है।
‘झाँसी की रानी’ आज भी प्रेरणा का स्रोत
Subhadra Kumari Chauhan Punyatithi 2026 पर मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से उनकी अमर कविता “झाँसी की रानी” का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह कविता आज भी हर भारतीय के हृदय में स्वाभिमान और वीरता की ज्योति प्रज्वलित करती है।
“खूब लड़ी मर्दानी, वह तो झाँसी वाली रानी थी”— इन पंक्तियों ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान जन-जन में नई ऊर्जा का संचार किया था। आज भी विद्यालयों से लेकर सार्वजनिक मंचों तक यह कविता प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।
साहित्य के माध्यम से जागृत की स्वतंत्रता चेतना
Subhadra Kumari Chauhan Punyatithi 2026 के संदर्भ में मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सुभद्रा जी ने अपने लेखन के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम की चेतना को घर-घर तक पहुँचाया। उनकी रचनाएँ केवल साहित्यिक कृतियाँ नहीं, बल्कि राष्ट्रप्रेम और आत्मगौरव की जीवंत अभिव्यक्ति हैं।
उन्होंने कहा कि सुभद्रा कुमारी चौहान ने अपने साहसिक लेखन और सक्रिय भागीदारी से स्वतंत्रता आंदोलन को मजबूती दी। उनका जीवन संघर्ष और समर्पण की मिसाल है।
महिला सशक्तिकरण का सशक्त संदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि Subhadra Kumari Chauhan Punyatithi 2026 हमें यह याद दिलाती है कि महिलाओं की भूमिका राष्ट्र निर्माण में कितनी महत्वपूर्ण है। सुभद्रा जी ने साहित्य और कर्म दोनों से यह सिद्ध किया कि नारी शक्ति समाज को नई दिशा दे सकती है।
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण और समाज सेवा के कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाएँ।
आदर्शों से प्रेरणा लेने का संदेश
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि सुभद्रा कुमारी चौहान का जीवन त्याग, साहस और देशभक्ति की मिसाल है। Subhadra Kumari Chauhan Punyatithi 2026 के अवसर पर हम सभी का कर्तव्य है कि उनके आदर्शों को आत्मसात करें और समाज व राष्ट्र के उत्थान के लिए योगदान दें।
उन्होंने अंत में ईश्वर से प्रार्थना की कि सुभद्रा जी के विचार आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करते रहें।
