बागेश्वर धाम के पं. धीरेन्द्र शास्त्री 28 मार्च से सुनाएंगे दिव्य कथा, सफाई कर्मी बनेंगे मुख्य यजमान

छत्तीसगढ़ के कोरबा में भक्ति और आध्यात्मिकता का अनूठा संगम होने जा रहा है। Korba Hanumant Katha के तहत अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त कथावाचक पं. धीरेन्द्र शास्त्री एक बार फिर प्रदेश आ रहे हैं।

भगवान श्रीराम के अनन्य भक्त और संकटमोचन हनुमान जी की महिमा का रसपान कराने के लिए यह दिव्य कथा 28 मार्च से प्रारंभ होगी।


28 मार्च से शुरू होगी Korba Hanumant Katha

आयोजन समिति के अनुसार, Korba Hanumant Katha का शुभारंभ 28 मार्च को होगा। समाजसेवी राणा मुखर्जी ने बताया कि कथा के लिए व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।

कोरबा ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से श्रद्धालु इस पावन अवसर पर शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं।


27 फरवरी को निकलेगी 21 हजार महिलाओं की कलश यात्रा

कथा से पहले 27 फरवरी को भव्य और ऐतिहासिक कलश यात्रा निकाली जाएगी।

इस यात्रा में 21 हजार माताओं और बहनों के सहभागी होने का संकल्प लिया गया है। यह कलश यात्रा नगर में भक्ति और उत्साह का वातावरण बनाएगी।

Korba Hanumant Katha से पहले होने वाली यह यात्रा आयोजन को और अधिक दिव्य रूप देगी।


सफाई कर्मी होंगे मुख्य यजमान

इस आयोजन की सबसे विशेष और सराहनीय पहल यह है कि शहर के सफाई कर्मियों को मुख्य यजमान का दर्जा दिया गया है।

यह कदम समाज में सेवा भाव के प्रति सम्मान और समरसता का संदेश देता है।

जो लोग प्रतिदिन शहर की स्वच्छता के लिए निस्वार्थ कार्य करते हैं, उन्हें इस धार्मिक आयोजन में सम्मानित भूमिका देना सामाजिक समावेशन की मिसाल बनेगा।

इस पहल से Korba Hanumant Katha केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता का प्रतीक भी बन गई है।


भक्तों में उत्साह, व्यापक तैयारियां

पं. धीरेन्द्र शास्त्री की ओजस्वी वाणी में जब हनुमान जी की महिमा और भक्ति की गाथा गूंजेगी, तो श्रद्धालुओं का मन श्रद्धा और शांति से भर उठेगा।

आयोजन समिति ने श्रद्धालुओं के लिए बैठने, पेयजल, सुरक्षा और यातायात की विशेष व्यवस्था की है।

कोरबा शहर आने वाले दिनों में भक्ति, उल्लास और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहेगा।


Korba Hanumant Katha न केवल धार्मिक आस्था का पर्व है, बल्कि समाज में सम्मान, सेवा और समरसता का संदेश देने वाला आयोजन भी है।

28 मार्च से शुरू होने वाली इस दिव्य कथा का इंतजार पूरे प्रदेश को है। भक्ति की यह गूंज निश्चित ही कोरबा को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देगी।

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