दक्षिण बस्तर में माओवादी प्रभाव को कमजोर करने के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत शनिवार को बड़ा कदम उठाया गया। Bijapur Anti-Maoist Operation के दौरान बीजापुर जिले में सुरक्षा बलों ने पांच माओवादी स्मारकों को ध्वस्त कर दिया।
यह कार्रवाई माओवादियों के प्रचार तंत्र और ग्रामीण इलाकों में उनकी मनोवैज्ञानिक पकड़ को तोड़ने की रणनीति का हिस्सा है।
अलग-अलग थाना क्षेत्रों में समन्वित कार्रवाई
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, Bijapur Anti-Maoist Operation के तहत तर्रेम और उसूर थाना क्षेत्रों में संयुक्त बलों ने अभियान चलाया।
तर्रेम थाना क्षेत्र के मंडीमार्का जंगल में सीआरपीएफ की संयुक्त टीम ने एक माओवादी स्मारक को खोजकर ध्वस्त किया। कार्रवाई पूरी सुरक्षा प्रक्रिया के तहत की गई।
उसूर थाना क्षेत्र
उसूर क्षेत्र में सुरक्षा बलों को और बड़ी सफलता मिली।
- मरुधबाका जंगल में सीआरपीएफ और कोबरा बटालियन की संयुक्त टीम ने दो स्मारक गिराए।
- पौरगुड़ा और सिंगनापल्ली के जंगलों में सीआरपीएफ की दूसरी टीम ने दो और स्मारकों को ध्वस्त किया।
ये स्मारक आमतौर पर माओवादी नेताओं और कैडरों की याद में बनाए जाते हैं। इनका इस्तेमाल संगठन ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में अपनी विचारधारा फैलाने और भर्ती के लिए करता है।
प्रचार तंत्र को तोड़ने की रणनीति
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे स्मारक माओवादियों के “शहादत नैरेटिव” को मजबूत करते हैं।
Bijapur Anti-Maoist Operation का उद्देश्य केवल ढांचा गिराना नहीं, बल्कि उस प्रतीकात्मक शक्ति को खत्म करना है, जिससे संगठन स्थानीय युवाओं को प्रभावित करता है।
सुरक्षा बल लगातार सर्च ऑपरेशन, पेट्रोलिंग और एरिया डोमिनेशन अभियान चला रहे हैं, ताकि इलाके में राज्य की उपस्थिति मजबूत हो।
हालिया कार्रवाई और बड़ी सफलता
इससे पहले 13 फरवरी को भी एंटी-माओवादी अभियान के तहत कई आईईडी निष्क्रिय किए गए थे।
एक प्रमुख कार्रवाई में नंबाला केशव राव उर्फ बसवराजू के नाम पर बने स्मारक को ध्वस्त किया गया। बसवराजू, जो CPI (Maoist) के पूर्व महासचिव थे, 2025 में एक मुठभेड़ में मारे गए थे।
इसके अलावा तोड़का-कोरचोली और पेद्दाकोर्मा जैसे वन क्षेत्रों में भी स्मारकों को हटाया गया और सुरक्षा वाहनों को निशाना बनाने के लिए लगाए गए विस्फोटकों को निष्क्रिय किया गया।
मार्च 2026 तक उन्मूलन का लक्ष्य
छत्तीसगढ़ सरकार, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में, वामपंथी उग्रवाद को खत्म करने के लिए अभियान तेज कर चुकी है।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मार्च 2026 तक वामपंथी उग्रवाद के उन्मूलन का लक्ष्य रखा है।
बीजापुर, जो बस्तर संभाग में स्थित है, लंबे समय से माओवादी गतिविधियों का गढ़ माना जाता है। यहां जमीन, वन अधिकार और विकास से जुड़े मुद्दों का लाभ उठाकर संगठन अपनी पकड़ बनाए रखने की कोशिश करता रहा है।
निष्कर्ष
Bijapur Anti-Maoist Operation केवल सुरक्षा अभियान नहीं, बल्कि विचारधारा के खिलाफ एक मनोवैज्ञानिक लड़ाई भी है।
स्मारकों को ध्वस्त कर सुरक्षा बल यह संदेश दे रहे हैं कि अब बस्तर में भय और प्रचार की राजनीति नहीं चलेगी।
आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि लगातार चल रही कार्रवाइयों से दक्षिण बस्तर में स्थायी शांति और विकास का रास्ता कितना मजबूत होता है।
