उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने अमूल-बनास डेयरी मॉडल से लिया सीखने का संकल्प

छत्तीसगढ़ सरकार अब Chhattisgarh Dairy Cooperative Model को मजबूत बनाने की दिशा में ठोस कदम उठा रही है। इसी कड़ी में प्रदेश के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और वन, पर्यावरण एवं सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने गुजरात के मेहसाणा जिले के बनासकांठा स्थित प्रमुख डेयरियों का शैक्षणिक भ्रमण किया। इस भ्रमण में पशुपालकों और बिहान समूह की महिलाओं ने भी भाग लिया।

प्रतिनिधिमंडल ने अमूल, बनास डेयरी और दूधसागर डेयरी का दौरा किया। इस दौरान अधिकारियों ने पूरी उत्पादन प्रक्रिया, दुग्ध संकलन प्रणाली, गुणवत्ता नियंत्रण और विपणन व्यवस्था की विस्तार से जानकारी दी।

मंत्रियों ने डेयरी प्लांट, बायो-सीएनजी प्लांट, खाद्य तेल इकाई, आटा प्लांट और शेरपुरा डेयरी कोऑपरेटिव सोसायटी का निरीक्षण किया।


Chhattisgarh Dairy Cooperative Model को मिलेगा नया आधार

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि यह भ्रमण केवल देखने तक सीमित नहीं है। बल्कि इसका उद्देश्य सफल मॉडल को सीखकर छत्तीसगढ़ में लागू करना है।

उन्होंने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे:

  • संतुलित चारा विकास की तकनीक समझें
  • उन्नत पशुपालन पद्धति अपनाएं
  • आधुनिक दुग्ध प्रसंस्करण तकनीक सीखें
  • डेयरी उत्पाद निर्माण और विपणन के व्यावहारिक पहलुओं को जानें

स्पष्ट है कि Chhattisgarh Dairy Cooperative Model को मजबूत बनाने के लिए यह पहल मील का पत्थर साबित हो सकती है।


बिहान दीदियों के लिए आत्मनिर्भरता का अवसर

इस 50 सदस्यीय दल में 25 पशुपालक और 25 बिहान (एनआरएलएम) समूह की महिलाएं शामिल रहीं।

ग्रामीण महिलाएं जब अमूल और बनास के बड़े प्लांट में आधुनिक मशीनें देख रही थीं, तो उनके मन में एक ही सवाल था—क्या यह मॉडल छत्तीसगढ़ में भी संभव है?

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार पहले से ही महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ रही है। बिहान समूहों के माध्यम से उन्हें स्वरोजगार और आय के अवसर मिल रहे हैं।

अब Chhattisgarh Dairy Cooperative Model के जरिए उनकी आय में और वृद्धि की संभावना है।


सहकारी मॉडल से बदलेगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था

मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि डेयरी सहकारी मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने का प्रभावी माध्यम है।

यदि इसे योजनाबद्ध तरीके से लागू किया जाए, तो:

  • पशुपालकों की आय बढ़ेगी
  • गांवों में रोजगार के नए अवसर बनेंगे
  • दुग्ध उत्पादन में वृद्धि होगी
  • स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित होंगी

यानी, Chhattisgarh Dairy Cooperative Model केवल दूध उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ग्रामीण विकास की नई कहानी लिख सकता है।


गुजरात का डेयरी सहकारी मॉडल देश में सफल उदाहरण माना जाता है। अब छत्तीसगढ़ उस सफलता से सीख लेकर अपने राज्य में नई शुरुआत करने की तैयारी में है।

यदि यह पहल जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो आने वाले वर्षों में Chhattisgarh Dairy Cooperative Model ग्रामीण समृद्धि का मजबूत स्तंभ बन सकता है।

यह केवल एक शैक्षणिक भ्रमण नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर गांवों की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *