Navdrishti Foundation Eye Donation: संतरा बाड़ी निवासी स्वर्गीय श्री जगदीश चंद्र उजाला के निधन के पश्चात उनके परिवार ने जो निर्णय लिया, वह समाज के लिए एक मिसाल बन गया। Jagdish Chandra Ujala Eye Donation के माध्यम से अब दो नेत्रहीन व्यक्तियों को प्रकृति को सामान्य रूप से देखने का अवसर मिलेगा।
दुःख की इस घड़ी में भी उजाला परिवार ने मानवता को सर्वोपरि रखा और नेत्रदान कर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई।
परिवार की सहमति से सम्पन्न हुआ नेत्रदान
स्वर्गीय श्री जगदीश चंद्र उजाला के निधन के बाद उनकी पत्नी श्रीमती राम कुंवर उजाला, पुत्र रुपेश उजाला, खेमचंद उजाला तथा बहुएं सपना और गायत्री की सहमति से नेत्रदान सम्पन्न किया गया।
परिवार के इस निर्णय ने यह साबित कर दिया कि संवेदनशीलता और सामाजिक चेतना साथ-साथ चल सकती है।
दरअसल, Navdrishti Foundation Eye Donation अभियान से जुड़े होने के कारण परिवार पहले से ही समाजसेवा की भावना से प्रेरित रहा है।
मध्य रात्रि में पहुँची नवदृष्टि फाउंडेशन की टीम
निधन का समाचार मिलते ही नवदृष्टि फाउंडेशन के सदस्य राज आढ़तिया, कुलवंत भाटिया, राजेश पारख और मंगल अग्रवाल मध्य रात्रि में उजाला भवन पहुंचे।
उन्होंने तत्परता से नेत्रदान की पूरी व्यवस्था संभाली। यह समर्पण दर्शाता है कि संस्था समाजहित के कार्यों में कितनी सजग है।
मेडिकल टीम ने किया कॉर्निया कलेक्शन
श्री शंकराचार्य मेडिकल कॉलेज के डॉ. संदीप बचकर, डॉ. लीजन और नेत्र प्रभारी विवेक कसार ने बंसल निवास से कॉर्निया कलेक्ट किए।
विवेक कसार ने उजाला परिवार को नेत्रदान हेतु साधुवाद देते हुए कहा कि ऐसे निर्णय समाज में जागरूकता बढ़ाते हैं और अंधत्व जैसी समस्या से लड़ने में मददगार साबित होते हैं।
परिवार ने कही भावुक बात
नवदृष्टि फाउंडेशन के सक्रिय सदस्य प्रभुदयाल उजाला ने कहा कि संस्था से जुड़े होने के कारण वे प्रतिदिन लोगों की पीड़ा और अंधत्व का दुःख देखते हैं।
उन्होंने भावुक शब्दों में कहा,
“हम रोज लोगों को प्रेरित करते हैं, इसलिए हमने शुरुआत अपने परिवार से की। चाचाजी के जाने के बाद उनके नेत्रों से दो परिवारों को नई ज्योति मिलेगी। यह हमारे परिवार की ओर से पहला नेत्रदान है और अब इसे परंपरा बनाएंगे।”
वहीं, रुपेश उजाला ने कहा कि पिता के निधन से पूरा परिवार शोक में डूबा है, लेकिन नेत्रदान कर उन्होंने समाज के प्रति अपना कर्तव्य निभाया।
समाज के लिए प्रेरणादायक संदेश
फाउंडेशन के सदस्य राजेश पारख ने कहा कि प्रभुदयाल उजाला हमेशा समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं। आज उन्होंने अपने चाचा के नेत्रदान कर यह साबित किया कि प्रेरणा देने से पहले स्वयं उदाहरण प्रस्तुत करना आवश्यक है।
नवदृष्टि फाउंडेशन की ओर से अनिल बल्लेवार, कुलवंत भाटिया, राज आढ़तिया, प्रवीण तिवारी, मुकेश आढ़तिया, हरमन दुलई, रितेश जैन, राजेश पारख, जितेंद्र हासवानी, मंगल अग्रवाल, किरण भंडारी, उज्जवल पींचा, सत्येंद्र राजपूत, सुरेश जैन, पीयूष मालवीय, दीपक बंसल, विकास जायसवाल, मुकेश राठी, प्रभुदयाल उजाला, प्रमोद बाघ, सपन जैन, यतीन्द्र चावड़ा, जितेंद्र कारिया, बंसी अग्रवाल, अभिजीत पारख, मोहित अग्रवाल, चेतन जैन, दयाराम टांक, विनोद जैन और राकेश जैन ने श्रद्धांजलि अर्पित की तथा उजाला परिवार को साधुवाद दिया।
नेत्रदान: जीवन के बाद भी रोशनी
Jagdish Chandra Ujala Eye Donation केवल एक सामाजिक कार्य नहीं, बल्कि मानवता की सच्ची सेवा है। नेत्रदान से अंधत्व से जूझ रहे लोगों को नई जिंदगी मिलती है।
आज जब समाज को सकारात्मक उदाहरणों की आवश्यकता है, तब संतरा बाड़ी के उजाला परिवार ने यह दिखा दिया कि दुःख की घड़ी में भी मानवता की ज्योति बुझनी नहीं चाहिए।
नवदृष्टि फाउंडेशन के सहयोग से सम्पन्न यह नेत्रदान न केवल दो नेत्रहीनों के जीवन में प्रकाश लाएगा, बल्कि समाज को भी प्रेरित करेगा।
Jagdish Chandra Ujala Eye Donation आने वाली पीढ़ियों के लिए एक संदेश है — जीवन भले समाप्त हो जाए, लेकिन मानवता की रोशनी हमेशा जीवित रह सकती है।
