छत्तीसगढ़ पुलिस में बड़ा सुधार: ICJS एकीकरण, साइबर अपराध पर सख्ती और नक्सल पुनर्वास को मिली नई रफ्तार – गृह मंत्री विजय शर्मा

रायपुर, 13 फरवरी 2026।
राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने के उद्देश्य से उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री श्री विजय शर्मा ने नया रायपुर स्थित संवाद ऑडिटोरियम में गृह एवं जेल विभाग की उपलब्धियों की विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि Chhattisgarh Police Reforms केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि आम नागरिकों को त्वरित न्याय और सुरक्षित वातावरण देने की प्रतिबद्धता है।


ICJS के तहत पांचों स्तंभों का एकीकरण: छत्तीसगढ़ अग्रणी

गृह मंत्री ने बताया कि नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए ICJS के अंतर्गत पुलिस, अभियोजन, फॉरेंसिक, जेल और न्यायालय—इन पांचों स्तंभों को एकीकृत किया जा रहा है।

दुर्ग और बिलासपुर को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में विकसित किया गया है, जहां यह मॉडल सफलतापूर्वक लागू हुआ है। पहले पुलिस को साक्ष्य जुटाने में कई अड़चनों का सामना करना पड़ता था। अब ई-साक्ष्य प्रणाली से तुरंत प्रमाण उपलब्ध हो रहे हैं, जिससे जांच प्रक्रिया तेज और पारदर्शी बनी है।

यह पहल Chhattisgarh Police Reforms का मजबूत आधार बन रही है।


पुलिसकर्मियों के लिए बीमा सुविधा: 8 बैंकों से एमओयू

सरकार ने पुलिस कर्मियों के कल्याण को प्राथमिकता देते हुए 8 बैंकों के साथ एमओयू किया है। इसके तहत बिना किसी प्रीमियम के सैलरी अकाउंट पर बीमा सुविधा दी जा रही है।

अब तक 15 शहीद पुलिसकर्मियों के आश्रितों को 16 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि प्रदान की जा चुकी है। यह कदम पुलिस बल के मनोबल को मजबूत कर रहा है।


डिजिटल पुलिसिंग: CCTNS से लेकर ऑनलाइन एफआईआर तक

गृह मंत्री ने बताया कि पुलिस कार्यों के आधुनिकीकरण के लिए CCTNS, ई-समन, ई-कोर्ट, ऑनलाइन एफआईआर, ई-श्रुति और मेडलीपार जैसी डिजिटल सेवाएं लागू की गई हैं।

अब अपराध समीक्षा एप्लीकेशन से राज्यभर में दर्ज एफआईआर की निगरानी और विश्लेषण हो रहा है। इससे समय-सीमा में विवेचना सुनिश्चित हो रही है और जवाबदेही बढ़ी है।

साथ ही, ऑनलाइन कम्प्लेंट मैनेजमेंट पोर्टल से शिकायतों का त्वरित निराकरण संभव हुआ है। पहले डाक से भेजी जाने वाली शिकायतें अब डिजिटल माध्यम से तुरंत निपटाई जा रही हैं।


अवैध प्रवासियों पर सख्ती और विशेष टास्क फोर्स

राज्य सरकार ने अवैध प्रवासियों के खिलाफ विशेष टास्क फोर्स का गठन किया है। 34 लोगों को विदेशी नागरिक अधिनियम के तहत निष्कासित किया गया है।

साथ ही, एंटी टेररिस्ट स्क्वाड को सक्रिय कर 2025 में पहली बड़ी कार्रवाई की गई। यह सुरक्षा के मोर्चे पर Chhattisgarh Police Reforms की निर्णायक पहल मानी जा रही है।


गौवंश संरक्षण और गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई

प्रदेश में गौवंश वध, परिवहन और अवैध व्यापार पर सख्त कार्रवाई की गई है।

  • 142 वाहन राजसात
  • 27 वाहनों की नीलामी
  • 19 आरोपियों पर गैंगस्टर अधिनियम के तहत निगरानी

देश में पहली बार आदतन आरोपियों की सूची बनाकर सतत निगरानी की जा रही है।


नशे और साइबर अपराध पर कड़ा प्रहार

एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई कर नशे के कारोबारियों की संपत्ति जब्त की जा रही है। गांजा, हेरोइन, एमडीएमए, ब्राउन शुगर और अन्य मादक पदार्थों का नष्टीकरण किया गया है।

साइबर अपराध के खिलाफ 255 ऑनलाइन जुआ लिंक्स और पोर्टल्स को ब्लॉक किया गया। 165 संचालकों की गिरफ्तारी हुई। कई जिलों में साइबर थानों की शुरुआत की गई है।


नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक अभियान

गृह मंत्री ने दोहराया कि 31 मार्च 2026 तक सशस्त्र नक्सलवाद के खात्मे का लक्ष्य निर्धारित है।

सरकार पुनर्वास नीति पर जोर दे रही है। पिछले दो वर्षों में बड़ी संख्या में माओवादी मुख्यधारा में लौटे हैं। उन्हें कौशल प्रशिक्षण, 5G मोबाइल फोन, योजनाओं का लाभ और सामूहिक विवाह जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं।

दो पंचायतों ने स्वयं को नक्सल मुक्त घोषित किया है। यह शांति और विकास की दिशा में बड़ा संकेत है।


जेल सुधार: उमंग-तरंग रेडियो से सकारात्मक पहल

राज्य की चार केंद्रीय जेलों को आईएसओ प्रमाणन मिला है।
रायपुर केंद्रीय जेल में ‘उमंग-तरंग’ रेडियो स्टेशन शुरू किया गया है।

बंदियों को मसाला उद्योग, एलईडी निर्माण, ऑयल एक्सट्रेक्शन और पेट्रोल पंप संचालन जैसे उद्योगों से जोड़ा जा रहा है। यह पुनर्वास की दिशा में एक मानवीय पहल है।


स्पष्ट है कि Chhattisgarh Police Reforms केवल कानून व्यवस्था की बात नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक सामाजिक बदलाव का प्रयास है। डिजिटल पारदर्शिता, कठोर कानून प्रवर्तन और मानवीय पुनर्वास नीति—इन तीनों के संतुलन से राज्य नई दिशा में आगे बढ़ रहा है।

सरकार का संदेश साफ है—लोकतंत्र में भय और हिंसा की कोई जगह नहीं, लेकिन सुधार और पुनर्वास के लिए द्वार हमेशा खुले हैं।

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