Korba Leopard Rescue। जंगल की खामोशी उस समय टूट गई, जब ग्रामीणों ने देखा कि एक तेंदुआ शिकारियों के तार के फंदे में बुरी तरह फंसा हुआ है। यह घटना छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के Katghora Forest Division के पाली रेंज अंतर्गत लाफा बीट की है।
वन विभाग की त्वरित कार्रवाई से यह Korba Leopard Rescue सफल रहा और तेंदुए की जान बचाई जा सकी।
ग्रामीणों की सूचना से शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन
ग्रामीणों ने जैसे ही वन विभाग को सूचना दी, टीम तुरंत मौके पर पहुंची। तेंदुआ तार के फंदे में फंसा था और उसके शरीर पर चोट के निशान साफ दिखाई दे रहे थे।
रेस्क्यू टीम ने सावधानी बरतते हुए तेंदुए को ट्रेंकुलाइज किया। इसके बाद पशु चिकित्सकों ने मौके पर ही उसके घावों का उपचार किया।
इस पूरे Korba Leopard Rescue अभियान के दौरान सुरक्षा के सभी मानकों का पालन किया गया।
स्वस्थ होने के बाद अचानकमार में छोड़ा गया
इलाज के बाद जब तेंदुआ पूरी तरह स्वस्थ पाया गया, तो वन विभाग ने उसे सुरक्षित रूप से Achanakmar Tiger Reserve के कोर एरिया में छोड़ दिया।
अचानकमार टाइगर रिजर्व जैव विविधता के लिए जाना जाता है। यहां तेंदुए के लिए सुरक्षित और प्राकृतिक आवास उपलब्ध है।
वन अधिकारियों के अनुसार, यह कदम तेंदुए की सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण था।
डॉग स्क्वॉड ने खोला राज
इस मामले में वन विभाग को बड़ी सफलता भी मिली। घटना स्थल से सुराग जुटाने के लिए अचानकमार टाइगर रिजर्व के डॉग स्क्वॉड की मदद ली गई।
डॉग स्क्वॉड ने गंध का पीछा करते हुए टीम को पास के एक गांव तक पहुंचाया।
वहां 37 वर्षीय आरोपी विजय कुमार गोंद के घर से शिकार में इस्तेमाल होने वाले तार, फंदे और अन्य हथियार बरामद किए गए। पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया।
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई
आरोपी को गिरफ्तार कर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है।
वन विभाग ने साफ कहा है कि जंगल और वन्यजीवों के साथ खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
यह Korba Leopard Rescue केवल एक तेंदुए की जान बचाने की कहानी नहीं है, बल्कि यह वन विभाग और ग्रामीणों की सजगता का उदाहरण भी है।
संरक्षण का संदेश
आज जब जंगल सिकुड़ रहे हैं और वन्यजीव खतरे में हैं, ऐसे में Korba Leopard Rescue जैसी घटनाएं उम्मीद जगाती हैं।
ग्रामीणों की सतर्कता, वन विभाग की तत्परता और डॉग स्क्वॉड की सटीक कार्रवाई ने मिलकर एक बेजुबान की जिंदगी बचाई।
यह घटना याद दिलाती है कि अगर समाज और प्रशासन साथ आएं, तो वन्यजीव संरक्षण केवल कानून नहीं, बल्कि एक सामूहिक जिम्मेदारी बन सकता है।
