दुर्ग, 13 फरवरी 2026।
ऑनलाइन ठगी के बढ़ते मामलों के बीच Durg Cyber Cell ने एक बड़ा खुलासा किया है। साइबर सेल दुर्ग ने विशेष अभियान चलाकर ऐसे बैंक खातों को चिन्हित किया है, जिनके माध्यम से ठगी की राशि का लेन-देन किया जा रहा था। इस कार्रवाई में 06 खाताधारकों के खिलाफ विधिवत वैधानिक कार्यवाही की गई है।
26 प्रकरणों से जुड़ा बैंक खाता चिन्हित
वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में जिले में दर्ज साइबर धोखाधड़ी मामलों की समीक्षा की गई। इसी दौरान एक बैंक खाते की जानकारी सामने आई, जो कुल 26 प्रकरणों में संलिप्त पाया गया।
जांच में स्पष्ट हुआ कि विभिन्न बैंकों के खातों में धोखाधड़ी की राशि प्राप्त कर चेक एवं अन्य माध्यमों से निकासी की गई। इसके बाद Durg Cyber Cell action on bank accounts के तहत विशेष टीम गठित कर 11 फरवरी 2026 को अभियान चलाया गया।
13 लाख से 50 लाख तक का संदिग्ध लेन-देन
साइबर सेल की जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
- एक खाते में 13,00,000 रुपये का संदिग्ध लेन-देन
- अन्य खातों में 15,000 रुपये, 38,800 रुपये
- एक प्रकरण में 50,00,000 रुपये तक की राशि का संदेहास्पद ट्रांजैक्शन
इन सभी मामलों में पहले से अपराध पंजीबद्ध हैं, जबकि अन्य प्रकरणों में अपराध क्रमांक दर्ज कर विवेचना जारी है। स्पष्ट है कि Durg Cyber Cell action on bank accounts जिले में साइबर ठगी के नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में बड़ा कदम है।
6 खाताधारकों पर वैधानिक कार्यवाही
साइबर सेल ने जिन खाताधारकों के विरुद्ध कार्रवाई की है, उनके नाम इस प्रकार हैं:
- रूपेश बंजारे, निवासी दुर्ग
- आजेन्द्र साहू, निवासी दुर्ग
- जावेद शेख, निवासी दुर्ग
- सरस्वती निषाद, निवासी दुर्ग
- हेमा बिनानी, निवासी दुर्ग
- अभिषेक गुप्ता, निवासी दुर्ग
इन सभी से पूछताछ कर संबंधित बैंक खातों के दस्तावेज, लेन-देन अभिलेख, चेक एवं अन्य बैंकिंग दस्तावेज जप्त किए गए हैं।
कैसे संचालित हो रहा था लेन-देन?
जांच के दौरान पाया गया कि विभिन्न खातों के माध्यम से ठगी की राशि प्राप्त कर उसे आहरित कर उपयोग किया जा रहा था। कई मामलों में खाताधारकों ने अपने खातों का दुरुपयोग होने दिया या संदिग्ध लेन-देन में सक्रिय भूमिका निभाई।
इस प्रकार, Durg Cyber Cell action on bank accounts ने यह स्पष्ट कर दिया है कि साइबर अपराधी अब स्थानीय खातों का उपयोग कर बड़े नेटवर्क संचालित कर रहे हैं।
सराहनीय रही साइबर टीम की भूमिका
इस पूरी कार्रवाई में साइबर सेल दुर्ग के प्रभारी अधिकारी, उप निरीक्षक स्तर के अधिकारियों तथा तकनीकी टीम की समन्वित और सक्रिय भूमिका रही। त्वरित विश्लेषण और तकनीकी ट्रैकिंग के कारण ही यह सफलता संभव हो सकी।
दुर्ग पुलिस की अपील
दुर्ग पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि—
- किसी भी अनजान कॉल, लिंक या मैसेज पर बैंकिंग जानकारी साझा न करें।
- ओटीपी, एटीएम पिन या खाता विवरण किसी से साझा न करें।
- किसी भी संदिग्ध लेन-देन की तुरंत सूचना साइबर हेल्पलाइन 1930 या निकटतम थाना में दें।
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि साइबर अपराध में संलिप्त पाए जाने पर कड़ी वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।
साइबर अपराध के इस दौर में जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। Durg Cyber Cell action on bank accounts यह संदेश देता है कि कानून की नजर से कोई भी बच नहीं सकता। साथ ही यह भी जरूरी है कि आम नागरिक सतर्क रहें, क्योंकि एक छोटी सी लापरवाही लाखों रुपये का नुकसान कर सकती है।
