रायपुर, 12 फरवरी 2026।
राज्य शासन ने गरियाबंद जिले के विकासखंड मैनपुर अंतर्गत ग्राम टोहेमेटा में Gariaband Anicut Construction के लिए 356.36 लाख रुपये (तीन करोड़ छप्पन लाख छत्तीस हजार रुपये) की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की है। इस निर्णय से क्षेत्र के किसानों और ग्रामीणों में नई उम्मीद जगी है।
सरकार का मानना है कि यह एनीकट निर्माण न केवल जल संरक्षण को मजबूत करेगा, बल्कि ग्रामीण जीवन की बुनियादी जरूरतों को भी पूरा करेगा।
55 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित होगी सिंचाई सुविधा
प्रस्तावित Gariaband Anicut Construction परियोजना के तहत लगभग 55 हेक्टेयर कृषि भूमि में सिंचाई सुविधा विकसित की जाएगी। अभी तक बारिश पर निर्भर रहने वाले किसान अब साल भर फसल लेने की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे।
विशेषज्ञों के अनुसार, एनीकट बनने से—
- निस्तारी व्यवस्था सुदृढ़ होगी
- पेयजल उपलब्धता बेहतर होगी
- भू-जल स्तर में सुधार आएगा
- कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी
इससे छोटे और सीमांत किसानों को सबसे अधिक लाभ मिलने की संभावना है।
वित्त एवं योजना विभाग से मिली अनुशंसा
इस परियोजना को पहले वित्त एवं योजना विभाग की समिति द्वारा अनुशंसित किया गया। इसके बाद विभागीय मंत्री और मुख्यमंत्री ने प्रशासकीय अनुमोदन प्रदान किया।
सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि Gariaband Anicut Construction कार्य—
- स्वीकृत लागत के भीतर
- निर्धारित समय-सीमा में
- तकनीकी स्वीकृति प्राप्त कर
- पारदर्शी निविदा प्रक्रिया के माध्यम से
- सभी वित्तीय एवं प्रशासनिक नियमों का पालन करते हुए
गुणवत्ता सुनिश्चित कर पूर्ण किया जाए।
ग्रामीणों के लिए जल संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम
टोहेमेटा गांव के किसानों के लिए यह निर्णय बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अक्सर गर्मियों में जल संकट की स्थिति बन जाती थी। अब एनीकट निर्माण से जल संग्रहण बढ़ेगा और गांव की जीवनरेखा मजबूत होगी।
दरअसल, Gariaband Anicut Construction केवल एक निर्माण परियोजना नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण आत्मनिर्भरता और सतत विकास की दिशा में एक ठोस पहल है।
यदि यह परियोजना समय पर पूर्ण होती है, तो आने वाले वर्षों में इसका सकारात्मक प्रभाव पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर दिखाई देगा।
📌 निष्कर्ष
गरियाबंद जिले के मैनपुर स्थित टोहेमेटा गांव में स्वीकृत Gariaband Anicut Construction परियोजना जल संरक्षण, सिंचाई विस्तार और ग्रामीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे किसानों को स्थायी सिंचाई सुविधा मिलेगी और भू-जल संवर्धन को भी बल मिलेगा।
राज्य शासन की यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत संरचना को मजबूत करने की दिशा में सार्थक प्रयास मानी जा रही है।
