Rabindranath Tagore Statue Disrespect Case ने भिलाई शहर में सांस्कृतिक और साहित्यिक जगत को झकझोर दिया है। सिविक सेंटर स्थित पायनियर मॉन्यूमेंट परिसर में गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर की प्रतिमा जमीन पर पड़ी मिली, जिससे स्थानीय नागरिकों और साहित्य प्रेमियों में आक्रोश फैल गया।
घटना की जानकारी मिलते ही कला और साहित्य से जुड़े लोग मौके पर पहुंचे और प्रशासन से प्रतिमा को सम्मानपूर्वक उचित स्थान पर पुनर्स्थापित करने की मांग की।
साहित्यकारों ने जताई आपत्ति
घटना के बाद कला साहित्य अकादमी से श्री शक्ति चक्रवर्ती, श्री मणिमय मुखर्जी और श्री शांतनु दासगुप्ता सहित अन्य गणमान्य नागरिक पायनियर मॉन्यूमेंट पहुंचे।
उन्होंने बीएसपी प्रबंधन और प्रशासन से आग्रह किया कि गुरुदेव की प्रतिमा को सम्मानजनक स्थान पर स्थापित किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो।
साहित्यकारों का कहना था कि गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर केवल एक कवि नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक चेतना के प्रतीक हैं। उनकी प्रतिमा का इस तरह जमीन पर मिलना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।

प्रशासन और बीएसपी प्रबंधन मौके पर पहुंचा
Rabindranath Tagore Statue Disrespect Case की सूचना मिलते ही थाना प्रभारी (कोतवाली) सेक्टर-6 एवं बीएसपी प्रबंधन के अधिकारी मौके पर पहुंचे।
प्रतिमा को सावधानीपूर्वक उठाकर बीएसपी प्रबंधन को सुरक्षित सौंप दिया गया। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि विचार-विमर्श के बाद प्रतिमा को सम्मानपूर्वक उचित स्थान पर स्थापित किया जाएगा।

सांस्कृतिक अस्मिता से जुड़ा मामला
गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर नोबेल पुरस्कार से सम्मानित महान साहित्यकार थे। उनकी रचनाएं आज भी समाज को प्रेरणा देती हैं। ऐसे में Rabindranath Tagore Statue Disrespect Case केवल एक प्रतिमा का मामला नहीं, बल्कि सांस्कृतिक अस्मिता और सम्मान से जुड़ा विषय बन गया है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सार्वजनिक स्थलों पर स्थापित महापुरुषों की प्रतिमाओं की नियमित देखरेख और सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।

प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि उचित प्रक्रिया के तहत निर्णय लेकर प्रतिमा को सम्मानपूर्वक स्थापित किया जाएगा।
अब शहर की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि गुरुदेव की प्रतिमा को कब और किस स्थान पर पुनर्स्थापित किया जाता है।
