छत्तीसगढ़ की धार्मिक नगरी दुर्ग इस वर्ष भक्ति और श्रद्धा के रंग में रंगने जा रही है। Durg Falgun Ekadashi Nishan Yatra 2026 के तहत पहली बार शहर में खाटू धाम की तर्ज पर भव्य फाल्गुन एकादशी निशान यात्रा निकाली जाएगी। इस ऐतिहासिक आयोजन को लेकर श्याम भक्तों में उत्साह चरम पर है।
फाल्गुन मास की पावन ग्यारस पर आयोजित होने वाली यह निशान यात्रा उन श्रद्धालुओं के लिए विशेष है, जो किसी कारणवश राजस्थान के सीकर स्थित खाटू धाम नहीं पहुंच पाते। अब उन्हें दुर्ग में ही बाबा श्याम के सजीव दर्शन और आशीर्वाद का अवसर मिलेगा।
मंदिर–मंदिर जाकर दिया गया निमंत्रण
निशान यात्रा की तैयारियों की शुरुआत एक अनोखी परंपरा के साथ की गई। आयोजक समिति ने सबसे पहले शहर के प्रमुख मंदिरों में पहुंचकर देवी–देवताओं को औपचारिक आमंत्रण दिया।
समिति के सदस्य सत्ती माता मंदिर, दुर्गा मंदिर, लंगूरवीर मंदिर, श्याम मंदिर, राम मंदिर, सिद्धि विनायक गणेश मंदिर, राधा कृष्ण मंदिर, रामदेव बाबा मंदिर सहित अन्य मंदिरों में पहुंचे। वहां विधिवत पूजा-अर्चना कर सभी देवताओं से निशान यात्रा में आशीर्वाद देने का निवेदन किया गया।
यह पहल शहरवासियों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है और इससे आयोजन को आध्यात्मिक गरिमा मिली है।
फाल्गुन एकादशी पर दिखेगी खाटू की झलक
आयोजक समिति के योगेंद्र शर्मा ‘बंटी’ ने बताया कि Durg Falgun Ekadashi Nishan Yatra 2026 को भव्य बनाने के लिए विशेष तैयारियां की जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि—
- सैकड़ों भक्त हाथों में श्याम बाबा का निशान लेकर शहर के मुख्य मार्गों से गुजरेंगे।
- यात्रा के दौरान पुष्प वर्षा और इत्र वर्षा की जाएगी।
- बाबा का आकर्षक रथ और घोड़ा बग्गी मुख्य आकर्षण रहेंगे।
- मधुर भजनों और श्याम नाम के जयकारों से पूरा शहर गूंज उठेगा।
गुजरात से बाबा श्याम का विशेष और अलौकिक ध्वज मंगवाया गया है। इसे श्री सत्तीचौरा माँ दुर्गा मंदिर में भक्तगण श्रद्धा के साथ तैयार करेंगे।
क्या है खाटू श्याम को निशान चढ़ाने का महत्व?
फाल्गुन एकादशी पर निकाली जाने वाली निशान यात्रा का धार्मिक महत्व अत्यंत गहरा है। खाटू श्याम जी को चढ़ाया जाने वाला निशान (ध्वज) सनातन परंपरा में विजय और समर्पण का प्रतीक माना जाता है।
मान्यता है कि—
- भक्त जब मन्नत मांगते हैं, तो मनोकामना पूर्ण होने पर बाबा के दरबार में निशान चढ़ाने का संकल्प लेते हैं।
- कई श्रद्धालु मन्नत पूरी होने से पहले भी श्रद्धा स्वरूप निशान अर्पित करते हैं।
- निशान का रंग प्रायः केसरिया, नारंगी और लाल होता है।
- ध्वज पर श्याम बाबा और भगवान कृष्ण के चित्र तथा मंत्र अंकित रहते हैं।
- नारियल और मोर पंख भी ध्वज का हिस्सा होते हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, बाबा श्याम ने धर्म की विजय के लिए अपना शीश समर्पित किया था। इसलिए उन्हें “हारे का सहारा”, “लखदातार” और “शीश के दानी” कहा जाता है। निशान उसी त्याग और समर्पण का प्रतीक है।
निशान यात्रा में कई भक्त नंगे पांव चलकर मंदिर तक पहुंचते हैं और विधि-विधान से ध्वज अर्पित करते हैं। इसे अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।
शहर में बना धार्मिक माहौल
Durg Falgun Ekadashi Nishan Yatra 2026 को लेकर दुर्ग में अभी से भक्ति का वातावरण बन गया है। विभिन्न समाजों और संगठनों के लोग इसमें सहयोग कर रहे हैं। बाजारों में श्याम ध्वज, केसरिया वस्त्र और पूजा सामग्री की खरीदारी बढ़ गई है।
यह आयोजन केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि शहर की आस्था, एकता और सांस्कृतिक विरासत का उत्सव बनने जा रहा है।
आयोजकों का मानना है कि इस पहल से दुर्ग में भी खाटू धाम जैसी भक्ति की अनुभूति होगी और हजारों श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होगी।
दुर्ग में पहली बार आयोजित हो रही Durg Falgun Ekadashi Nishan Yatra 2026 न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह शहर की सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूत करेगी। फाल्गुन एकादशी पर जब श्याम नाम के जयकारों से शहर गूंजेगा, तब दुर्ग सचमुच खाटू धाम की झलक प्रस्तुत करेगा।
