राजिम कुंभ कल्प के सातवें दिन भक्ति और लोकसंस्कृति का महासंगम, शिव-हनुमान झांकियों और छत्तीसगढ़ी गीतों ने बांधा समां

राजिम | कुंभ कल्प मेला 2026

Rajim Kumbh Kalp Cultural: राजिम कुंभ कल्प के सातवें दिन मुख्य मंच पर भक्ति, संस्कृति और लोककला का ऐसा अद्भुत संगम देखने को मिला, जिसने श्रद्धालुओं और दर्शकों को देर रात तक मंत्रमुग्ध कर दिया। मनोज राजपूत इंटरटेनमेंट के तत्वावधान में आयोजित सांस्कृतिक संध्या में एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियों ने माहौल को भक्तिमय बना दिया।


जगराता से हुई शुरुआत, गणपति वंदना ने रचा भक्तिरस

कार्यक्रम की शुरुआत संतोष थापा द्वारा प्रस्तुत जगराता से हुई। जैसे ही “हे गणपति गणराज तेरी जय हो…” की स्वर लहरियां गूंजीं, पूरा पंडाल श्रद्धा से भर उठा। इसके बाद “तोर चरण म कर्मा माता दिन-रात…” गीत के माध्यम से कर्मा माता की महिमा का भावपूर्ण वर्णन किया गया, जिसे सुनकर दर्शक भक्ति में डूब गए।


शिवमय हुआ मंच, झांकी बनी विशेष आकर्षण

इसके बाद मंच पूरी तरह शिवमय हो गया। “हर हर हर हर भोला…” और “बम बम भोलेनाथ…” जैसे गीतों पर श्रद्धालु झूम उठे। इस दौरान मनोज राजपूत द्वारा शिवजी की वेशभूषा में प्रस्तुत की गई भव्य झांकी ने सभी का ध्यान खींचा और जमकर तालियां बटोरीं।

वहीं “झिलझिल ओ झिलझिल ओ… हे शीतला दाई मोर गांव के” गीत पर दर्शक भी गुनगुनाते नजर आए।


राधा-कृष्ण और हनुमान भक्ति में डूबा पंडाल

संतोष थापा ने जस गीतों की प्रस्तुति देकर कार्यक्रम में नई ऊर्जा भर दी। अंतिम चरण में मनोज राजपूत विशाल हनुमान जी की वेशभूषा में मंच पर आए।
बजरंग बली, गली-गली में नाम है…” गीत पर उनके सशक्त नृत्य ने वातावरण को पुनः भक्तिमय बना दिया।


देवराज मिश्रा की प्रस्तुति ने दर्शकों का दिल जीता

बेमेतरा से आए कलाकार देवराज मिश्रा ने
राजनांदगांव के पाताल भैरवी तोला प्रणाम…”,
ओम नमः शिवाय…” और
मंगल भवन अमंगल हारी…
जैसे गीतों से दर्शकों को भावविभोर कर दिया।

इसके बाद छत्तीसगढ़ी गीत
आजा न गोरी मया के झुलना…”,
जिंदगी लिख देव तोर नाव रे…
और “मया होगे रे तोर संग…
ने प्रेम रस की अनुभूति कराई। “तोर नथली के मोती रे…” गीत की दर्शकों ने दोबारा फरमाइश भी की।


लोक संस्कृति की खुशबू से महका मंच

कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुति मया के सिंगार नवागांव चंपारण द्वारा दी गई।
गणपति गणराज पहली सुमिरौ…” से शुरुआत करते हुए कलाकारों ने छत्तीसगढ़ी लोकगीतों की झड़ी लगा दी।
जय जवान जय किसान…”,
आमा मउर गे…
और “परसा फूल फर गे…
जैसे गीतों ने फागुन की मस्ती का एहसास करा दिया।


कलाकारों का हुआ सम्मान

कार्यक्रम के समापन पर सभी कलाकारों का सम्मान राजिम विधायक रोहित साहू, सरपंच संघ फिंगेश्वर के अध्यक्ष हरीश साहू एवं जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि नेहरू साहू द्वारा स्मृति चिन्ह भेंट कर किया गया।
कार्यक्रम का सफल संचालन निरंजन साहू, मनोज सेन और किशोर निर्मलकर ने किया।

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