छात्रों और अभिभावकों पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ
CG Board Exam Fees Hike 2026: छत्तीसगढ़ के लाखों विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के लिए एक अहम खबर है।
छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) ने हाई स्कूल (10वीं) और हायर सेकेंडरी (12वीं) परीक्षाओं से जुड़े शुल्कों में बड़ी बढ़ोतरी कर दी है।
यह नई दरें शैक्षणिक सत्र 2026–27 से लागू होंगी।
📌 क्यों बढ़ाए गए परीक्षा शुल्क?
माशिमं के अनुसार—
- यह फैसला वित्त समिति और कार्यपालिका समिति की
अक्टूबर और दिसंबर में हुई बैठकों में लिया गया - परीक्षा शुल्क में आखिरी संशोधन वर्ष 2021 में हुआ था
मंडल ने परीक्षा से पहले और बाद की प्रक्रियाओं, दस्तावेजों और पंजीयन से जुड़े शुल्कों में भी इजाफा किया है।
💰 10वीं-12वीं परीक्षा अब कितनी महंगी?
अब तक—
- नियमित परीक्षा शुल्क + अंकसूची + प्रति विषय प्रायोगिक शुल्क
- कुल 460 रुपए लिया जाता था
अब—
- यह राशि बढ़कर 800 रुपए हो गई है
यानी एक ही बार में 340 रुपए की सीधी बढ़ोतरी।
📝 आवेदन पत्र और विलंब शुल्क में भी इजाफा
आवेदन पत्र शुल्क
- पहले: ₹80
- अब: ₹150
विलंब शुल्क (31 दिसंबर तक)
- पहले: ₹1,540
- अब: ₹2,000 प्रति परीक्षा
नियमित समय पर फॉर्म न भरने वालों को अब ज्यादा कीमत चुकानी होगी।
📊 22 मदों में शुल्क बढ़ाने का फैसला
कार्यपालिका समिति ने परीक्षा से जुड़े 22 मदों में शुल्क वृद्धि को मंजूरी दी है।
इनमें शामिल हैं—
- नामांकन शुल्क
- अतिरिक्त विषय
- एक विषय और दो विषय (द्वितीय मुख्य/अवसर परीक्षा)
- स्वाध्यायी छात्रों का पंजीयन एवं अनुमति शुल्क
- राज्य से बाहर के छात्रों का पंजीयन शुल्क
इन मदों में शुल्क डेढ़ से दोगुनी तक बढ़ाए गए हैं।
🎓 स्वाध्यायी छात्रों पर ज्यादा असर
एससी/एसटी स्वाध्यायी छात्र (छत्तीसगढ़ राज्य)
- पहले: ₹560
- अब: ₹800
नए स्वाध्यायी और राज्य से बाहर के छात्र
- पहले: ₹1,540
- अब: ₹2,000
इसके अलावा—
- एक विषय परीक्षा शुल्क: ₹280 → ₹400
- दो विषय परीक्षा शुल्क: ₹340 → ₹600
👨👩👧👦 अभिभावकों की बढ़ी चिंता
शुल्क वृद्धि की खबर सामने आने के बाद
अभिभावकों और छात्रों में चिंता साफ दिखाई दे रही है।
महंगाई के दौर में यह बढ़ोतरी
मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए
एक अतिरिक्त आर्थिक दबाव बन सकती है।
CG Board exam fees hike 2026—
- प्रशासनिक दृष्टि से जरूरी कदम हो सकता है
- लेकिन इसका सीधा असर छात्रों और परिवारों पर पड़ेगा
अब सबकी नजर इस बात पर है कि
राज्य सरकार या शिक्षा विभाग
इस पर कोई राहत या पुनर्विचार करता है या नहीं।
