जब जज्बा बदले रास्ता, तो आसान हो जाता है जीवन
Surrendered Maoists Rehabilitation Training Chhattisgarh: अगर मन में कुछ कर गुजरने का दृढ़ संकल्प हो, तो जीवन की दिशा बदली जा सकती है। इस कथन को आज छत्तीसगढ़ के आत्मसमर्पित माओवादी सच कर दिखा रहे हैं।
जिन हाथों में कभी बंदूक थी, आज वही हाथ हुनर और मेहनत से अपना भविष्य संवार रहे हैं।
राज्य सरकार की नक्सल पुनर्वास नीति के तहत जिला प्रशासन द्वारा उन्हें हिंसा से हुनर की राह पर लाया जा रहा है।
चौगेल (मुल्ला) कैंप बना ‘कौशलगढ़’
उत्तर बस्तर कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर विकासखंड से लगे ग्राम चौगेल (मुल्ला) स्थित बीएसएफ कैंप परिसर अब केवल सुरक्षा का नहीं, बल्कि नए जीवन की शुरुआत का केंद्र बन चुका है।
यहां 40 आत्मसमर्पित माओवादियों को अलग-अलग रोजगारमूलक ट्रेड में प्रशिक्षित किया जा रहा है। यह पहल Surrendered Maoists Rehabilitation Training Chhattisgarh का एक सशक्त उदाहरण बनकर उभरी है।
आजीविका से जुड़ा कौशल प्रशिक्षण
कैंप में आत्मसमर्पित युवक-युवतियों को—
- चारपहिया वाहन ड्राइविंग
- सिलाई
- काष्ठशिल्प कला
- सहायक इलेक्ट्रिशियन
जैसे ट्रेड में निरंतर प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे समाज की मुख्यधारा में लौटकर सम्मानपूर्वक आजीविका अर्जित कर सकें।
शिक्षा से भी जुड़ रहा भविष्य
केवल कौशल ही नहीं, बल्कि शिक्षा पर भी समान रूप से ध्यान दिया जा रहा है।
जो माओवादी पढ़ाई से वंचित रह गए थे, उन्हें कक्षा 1 से 8 तक के पाठ्यक्रमों का नियमित अध्ययन कराया जा रहा है।
20-20 के बैच बनाकर प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे सीखने की प्रक्रिया प्रभावी हो सके।
ड्राइविंग सीखकर सपनों को उड़ान – मनहेर तारम
40 वर्षीय मनहेर तारम बताते हैं—
“ड्राइविंग सीखने की इच्छा वर्षों से थी। अब यहां दो हफ्तों से प्रशिक्षण मिल रहा है। स्टेयरिंग, क्लच, ब्रेक—सब कुछ सीख रहा हूं। अब लगता है कि जिंदगी फिर से पटरी पर आ रही है।”
इसी तरह नरसिंह नेताम, सुकदू पद्दा और काजल वेड़दा जैसे कई युवा प्रशिक्षण पाकर आत्मनिर्भर बनने की राह पर आगे बढ़ रहे हैं।

स्वास्थ्य और मनोरंजन की भी व्यवस्था
कैंप में—
- नियमित स्वास्थ्य जांच
- आवश्यक दवाइयां
- कैरम, खेलकूद
- वाद्य यंत्र और सांस्कृतिक गतिविधियां
भी कराई जाती हैं, ताकि मानसिक और शारीरिक रूप से सभी सशक्त बन सकें।
आगे और भी अवसर मिलेंगे
पुनर्वास कैंप के नोडल अधिकारी श्री विनोद अहिरवार के अनुसार,
आगामी दिनों में—
- मशरूम उत्पादन
- बागवानी
- स्वरोजगार से जुड़े अन्य सृजनात्मक पाठ्यक्रम
भी शुरू किए जाएंगे।
मुख्यधारा में लौटते सपने
यह पहल दिखाती है कि यदि अवसर और मार्गदर्शन मिले, तो भटके कदम भी नई दिशा पा सकते हैं।
Surrendered Maoists Rehabilitation Training Chhattisgarh केवल पुनर्वास नहीं, बल्कि विश्वास और बदलाव की कहानी है।
