Startup India को नई मजबूती: स्टार्टअप मान्यता नियम बदले, डीप टेक और सहकारी संस्थाओं को बड़ा लाभ

नई दिल्ली।

Startup India revised framework: भारत को वैश्विक नवाचार केंद्र (Global Innovation Hub) बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने Startup India Action Plan को और सशक्त बनाने के लिए स्टार्टअप मान्यता (Startup Recognition Framework) में अहम बदलाव किए हैं। यह संशोधित ढांचा प्रधानमंत्री के उस विज़न को आगे बढ़ाता है, जिसमें भारत को मैन्युफैक्चरिंग आधारित अर्थव्यवस्था, उभरती तकनीकों का केंद्र और इनोवेशन पावरहाउस बनाने का लक्ष्य शामिल है।

Startup India अपने दूसरे दशक में प्रवेश कर चुका है। ऐसे में यह नया फ्रेमवर्क स्टार्टअप फाउंडर्स के लिए अधिक स्पष्ट, समावेशी और भविष्य के लिए तैयार नीति वातावरण प्रदान करेगा, साथ ही हाई-टेक और रिसर्च आधारित क्षेत्रों में लॉन्ग-टर्म कैपिटल के प्रवाह को भी आसान बनाएगा।


स्टार्टअप मान्यता के लिए टर्नओवर सीमा बढ़ी

तेजी से विकसित हो रहे स्टार्टअप इकोसिस्टम को ध्यान में रखते हुए सरकार ने स्टार्टअप मान्यता के लिए टर्नओवर सीमा को बढ़ाने का फैसला किया है।
अब तक यह सीमा ₹100 करोड़ थी, जिसे बढ़ाकर ₹200 करोड़ कर दिया गया है।

इस बदलाव से उन स्टार्टअप्स को राहत मिलेगी जो शुरुआती दौर पार कर चुके हैं, लेकिन अभी भी नवाचार और विस्तार के चरण में हैं। इससे उन्हें सरकारी योजनाओं और प्रोत्साहनों का लाभ लंबे समय तक मिल सकेगा।


डीप टेक स्टार्टअप्स के लिए अलग श्रेणी

संशोधित ढांचे में “Deep Tech Startup” नाम से एक नई उप-श्रेणी जोड़ी गई है। यह श्रेणी उन स्टार्टअप्स के लिए है, जो अत्याधुनिक और ब्रेकथ्रू तकनीकों पर काम कर रहे हैं।

डीप टेक स्टार्टअप्स की खास जरूरतों को देखते हुए सरकार ने इनके लिए नियमों में विशेष छूट दी है।

  • स्टार्टअप की अधिकतम आयु सीमा 10 साल से बढ़ाकर 20 साल कर दी गई है।
  • टर्नओवर सीमा ₹300 करोड़ तक बढ़ाई गई है।

यह फैसला इसलिए अहम है, क्योंकि डीप टेक स्टार्टअप्स में लंबा रिसर्च समय, अधिक पूंजी निवेश और उच्च तकनीकी जोखिम शामिल होता है।


सहकारी संस्थाओं को भी स्टार्टअप मान्यता

ग्रामीण भारत और कृषि क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने एक और बड़ा बदलाव किया है।
अब सहकारी संस्थाएं (Cooperative Societies) भी स्टार्टअप मान्यता के लिए पात्र होंगी।

इसके तहत:

  • मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसायटी एक्ट, 2002 के तहत पंजीकृत संस्थाएं
  • राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के सहकारी अधिनियमों के तहत पंजीकृत सोसायटी

भी स्टार्टअप इंडिया के दायरे में आएंगी, बशर्ते वे अन्य आवश्यक शर्तें पूरी करें। इससे कृषि, ग्रामीण उद्योग और सामुदायिक उद्यमों में नवाचार को नई गति मिलने की उम्मीद है।


स्टेकहोल्डर्स से चर्चा के बाद लिया गया फैसला

यह संशोधित फ्रेमवर्क विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और स्टार्टअप इकोसिस्टम के हितधारकों से व्यापक परामर्श के बाद तैयार किया गया है।
सरकार का मानना है कि इन बदलावों से:

  • रिसर्च और इनोवेशन आधारित स्टार्टअप्स को अधिक लाभ मिलेगा
  • डीप टेक वेंचर्स को लक्षित समर्थन मिलेगा
  • सहकारी संस्थाएं ग्रामीण विकास में नवाचार की भूमिका निभा सकेंगी

कुल मिलाकर, यह पहल भारत को हाई-टेक और नॉलेज आधारित उद्यमिता का वैश्विक केंद्र बनाने में मदद करेगी।

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