धान टोकन न मिलने से आहत किसान हाईटेंशन टावर पर चढ़ा, 6 घंटे बाद सुरक्षित रेस्क्यू

paddy procurement token protest: छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में शनिवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब धान खरीदी टोकन जारी न होने से आहत एक किसान हाईटेंशन बिजली टावर पर चढ़ गया। यह घटना कसौंदी गांव की है, जहां कई घंटे तक तनावपूर्ण माहौल बना रहा।

बचा हुआ धान बेचने के लिए नहीं मिला टोकन

प्राप्त जानकारी के अनुसार किसान अनिल गढ़वाल (35 वर्ष) ने बताया कि वह पहले ही 28 क्विंटल धान बेच चुका है, लेकिन शेष 29 क्विंटल धान के लिए उसका टोकन अब तक जारी नहीं हुआ।
बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने के बावजूद समस्या का समाधान न होने से वह मानसिक रूप से टूट गया।

गांव में फैली खबर, पुलिस को दी गई सूचना

जैसे ही ग्रामीणों को इस घटना की जानकारी मिली, मौके पर भीड़ जमा हो गई। इसके बाद जांजगीर पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस टीम ने तुरंत पहुंचकर किसान को सुरक्षित नीचे उतरने के लिए समझाइश शुरू की।

प्रशासन और परिजनों ने की घंटों काउंसलिंग

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तहसीलदार और एसडीएम सहित राजस्व एवं नागरिक प्रशासन के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे।
होमगार्ड के जवानों को तैनात किया गया और एहतियात के तौर पर सुरक्षा जाल लगाया गया।

किसान की पत्नी और अन्य परिजन फोन पर लगातार उसे समझाते रहे, लेकिन अनिल गढ़वाल अपनी मांग पर अड़ा रहा। उसका कहना था कि जब तक धान खरीदा नहीं जाएगा, वह नीचे नहीं उतरेगा।

कर्ज और मानसिक दबाव ने बढ़ाई पीड़ा

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार किसान अत्यधिक मानसिक तनाव में था। स्थानीय लोगों ने बताया कि उस पर करीब 1.5 लाख रुपये का कर्ज है, जिससे उसकी परेशानी और बढ़ गई थी।
यह घटना Chhattisgarh farmer paddy procurement token protest की गंभीरता को उजागर करती है।

6 घंटे बाद सफल हुआ रेस्क्यू

लगभग छह घंटे की लगातार बातचीत के बाद प्रशासन किसान को सुरक्षित नीचे उतारने में सफल रहा। इसके बाद उसे स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी हालत स्थिर बताई।

राजनीतिक प्रतिक्रिया भी आई सामने

घटना के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं।
स्थानीय कांग्रेस विधायक व्यास कश्यप ने कहा कि धान खरीदी प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट लिखित निर्देशों की कमी किसानों को भ्रमित कर रही है, जिससे वे इस तरह के कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं।

प्रशासन ने दिया जांच का आश्वासन

जिला प्रशासन ने कहा है कि किसान की शिकायत की प्राथमिकता से जांच की जाएगी और जिन मामलों में वास्तव में देरी हुई है, उन्हें जल्द सुलझाया जाएगा।

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