Achanakmar Tiger Reserve Tiger Death की घटना ने छत्तीसगढ़ के वन्यजीव प्रेमियों और वन विभाग को चिंतित कर दिया है। अचानकमार टाइगर रिजर्व (ATR) में एक करीब दो वर्षीय युवा नर बाघ का शव मिला है। यह शव 25 जनवरी को नियमित गश्त के दौरान सरसडोल के कुडेरपानी क्षेत्र में देखा गया।
वन विभाग के अनुसार, प्रारंभिक जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दो नर बाघों के बीच हुए हिंसक क्षेत्रीय संघर्ष को मौत की वजह बताया गया है।
पोस्टमार्टम में सामने आई संघर्ष की सच्चाई
वन अधिकारियों ने बताया कि मृत बाघ के गर्दन की हड्डी टूटी हुई पाई गई, जबकि निचली गर्दन पर गहरे दांतों के निशान दर्ज किए गए। ये संकेत साफ तौर पर इंटर-टाइगर फाइट की ओर इशारा करते हैं।
इसके अलावा, घटनास्थल पर टूटी हुई झाड़ियां, पंजों के खरोंच के निशान, बाल और मल भी मिले हैं, जो लंबे संघर्ष की पुष्टि करते हैं।
पंजों में मिले दूसरे बाघ के बाल
वन विभाग का दावा है कि मृत बाघ के पंजों में दूसरे बाघ के बाल फंसे हुए मिले हैं। इससे यह और मजबूत हुआ कि यह मामला किसी शिकारी गतिविधि का नहीं, बल्कि प्राकृतिक क्षेत्रीय संघर्ष का है।
अधिकारियों के अनुसार, संघर्ष के दौरान युवा बाघ ने लंबे समय तक खुद को बचाने की कोशिश की, लेकिन ताकतवर वयस्क बाघ के सामने टिक नहीं सका।
NTCA प्रोटोकॉल के तहत हुई कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही मौके को सुरक्षित किया गया और वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया गया। अगले दिन राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के तय मानकों के अनुसार गठित समिति की मौजूदगी में पशु चिकित्सकों की टीम ने पोस्टमार्टम किया।
पोस्टमार्टम के बाद विशेषज्ञों और अधिकारियों की मौजूदगी में शव का दाह संस्कार किया गया।
शिकार की आशंका से वन विभाग ने किया इनकार
MoEFCC समिति के सदस्य मंसूर खान, जो मौके पर मौजूद थे, ने स्पष्ट किया कि यह मामला पूरी तरह क्षेत्रीय संघर्ष का है। वन विभाग ने यह भी बताया कि बाघ के दांत, नाखून और अन्य अंग सुरक्षित पाए गए हैं, जिससे शिकार की कोई आशंका नहीं है।
कैमरा ट्रैप फुटेज से हुआ खुलासा
स्थानीय लोगों के अनुसार, यह घटना तब सामने आई जब टाइगर एस्टीमेशन अभियान के तहत लगे कैमरा ट्रैप फुटेज में संदिग्ध गतिविधि दिखी। इसके बाद खोज अभियान चलाया गया, जिसमें बाघ का शव मिला।
हालांकि, इस घटना के बाद ATR की सुरक्षा व्यवस्था, गश्त और रिपोर्टिंग प्रणाली को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं।
ATR में बढ़ रही है बाघों की संख्या
वन विभाग का कहना है कि कान्हा–बांधवगढ़ कॉरिडोर से प्राकृतिक आवागमन, बेहतर आवास और सफल प्रजनन के कारण अचानकमार टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ी है। इसी बढ़ती संख्या के चलते क्षेत्रीय संघर्ष की घटनाएं भी सामने आ रही हैं।
