दुनिया की बदलती आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियों के बीच India-EU free trade agreement 2026 ने वैश्विक व्यापार संतुलन को नई दिशा दे दी है। 27 जनवरी 2026 को हस्ताक्षरित यह ऐतिहासिक समझौता ऐसे समय आया है, जब कई देश अमेरिका की संरक्षणवादी नीतियों और अनिश्चित टैरिफ रणनीति से दूरी बनाना चाहते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे दो प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच “परफेक्ट पार्टनरशिप का उदाहरण” बताया, जबकि यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसे “मदर ऑफ ऑल डील्स” करार दिया।
दो अरब लोगों का मुक्त व्यापार क्षेत्र
India-EU free trade agreement 2026 के तहत भारत और यूरोपीय संघ ने मिलकर लगभग दो अरब आबादी और वैश्विक GDP के करीब 25% को कवर करने वाला मुक्त व्यापार क्षेत्र बनाया है।
इस समझौते के प्रमुख बिंदु:
- EU, भारत को होने वाले 96.6% निर्यात पर टैरिफ घटाएगा या खत्म करेगा, जिससे हर साल €4 बिलियन तक की बचत होगी।
- भारत पहले चरण में 90% वस्तुओं पर शुल्क हटाएगा, जो सात वर्षों में बढ़कर 93% होगा।
- भारत में EU कार, वाइन, चॉकलेट और पास्ता जैसे उत्पाद सस्ते होंगे।
ट्रंप की नीतियों से ‘डी-रिस्किंग’ की कोशिश
इस डील की पृष्ठभूमि में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक टैरिफ नीति है। भारत पर जहां 50% तक शुल्क लगाया गया है, वहीं कनाडा पर 35% और अन्य देशों पर भी व्यापारिक दबाव बढ़ा है।
यही वजह है कि देश अब ट्रेड डाइवर्सिफिकेशन की राह पकड़ रहे हैं।
ब्रिटेन का चीन की ओर झुकाव
इसी वैश्विक बदलाव के तहत ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर आठ साल बाद चीन दौरे पर जा रहे हैं। उनका उद्देश्य अमेरिका पर आर्थिक निर्भरता कम करना और चीन के साथ व्यापारिक रिश्ते सुधारना है।
ब्रिटेन और चीन के बीच व्यापार 2025 तक करीब £100 बिलियन तक पहुंच चुका है, जो चीन को ब्रिटेन का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बनाता है।
कनाडा-भारत रिश्तों में नई गर्माहट
वहीं, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी मार्च के पहले सप्ताह भारत आने की तैयारी में हैं। यह दौरा जस्टिन ट्रूडो के दौर में बिगड़े रिश्तों के बाद नई शुरुआत माना जा रहा है।
भारत-कनाडा के बीच:
- यूरेनियम
- ऊर्जा
- क्रिटिकल मिनरल्स
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
जैसे क्षेत्रों में बड़े समझौते होने की संभावना है।
भारत की ‘रणनीतिक स्वायत्तता’
विदेश मंत्री एस. जयशंकर पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि भारत किसी एक देश पर निर्भर नहीं रहेगा।
“किसी भी देश को यह उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि वह भारत के अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर वीटो लगाए,”
— एस. जयशंकर
यही सोच आज India-EU free trade agreement 2026 को भारत की वैश्विक कूटनीति का मजबूत स्तंभ बनाती है।
जहां अमेरिका अपनी सख्त व्यापार नीतियों से दबाव बना रहा है, वहीं भारत विश्वसनीय, लोकतांत्रिक और संतुलित साझेदार के रूप में उभर रहा है। भारत-EU समझौता केवल आर्थिक नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन में भारत की बढ़ती भूमिका का संकेत भी है।
